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होर्मुज जलडमरूमध्य UN स्टेटमेंट होर्मुज जलडमरूमध्य पर भारत का सख्त बयान जहाजों पर हमला और नाविकों की मौत स्वीकार्य नहीं UN में दो टूक

On: May 22, 2026 2:49 AM
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होर्मुज जलडमरूमध्य UN स्टेटमेंट : 17 अप्रैल 2026 को संयुक्त राष्ट्र में भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव पर अपनी चिंता जताते हुए साफ कहा कि व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना, बेगुनाह नाविकों की जान खतरे में डालना और नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा डालना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि एम्बेसडर हरीश पी (पर्वथनेनी हरीश) ने यूएन जनरल असेंबली की बहस में यह बयान दिया।

भारत ने कहा कि इस संघर्ष में कई भारतीय नाविकों की जान चली गई है, जो बेहद दुखद है। होर्मुज से होने वाला व्यापार भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए यहां सुरक्षित और बेरोकटोक नौवहन बहाल करने की मांग की गई।

होर्मुज जलडमरूमध्य का राजनीतिक मानचित्र
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का मानचित्र, जो ईरान और ओमान के बीच स्थित है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता

होर्मुज जलडमरूमध्य UN स्टेटमेंट भारत का पूरा बयान क्या था?

  • एम्बेसडर हरीश ने कहा, “भारत के लिए अपनी ऊर्जा और अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के
  • लिहाज से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाला व्यापार बहुत जरूरी है।
  • भारत इस बात पर गहरा दुख जताता है कि इस संघर्ष में व्यापारिक जहाजों
  • को सैन्य हमलों का निशाना बनाया गया है।”

उन्होंने आगे कहा, “इस युद्ध के दौरान जहाजों पर काम करने वाले कई भारतीय नाविकों को अपनी कीमती जान गंवानी पड़ी है। हम इस बात को फिर से दोहराते हैं कि व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना, बेगुनाह नाविकों की जान खतरे में डालना या होर्मुज में जहाजों के आने-जाने और व्यापार में रुकावट पैदा करना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।”

भारत ने जोर देकर मांग की कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पूरी तरह पालन किया जाए और होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही जल्द से जल्द बहाल की जाए। साथ ही सभी देशों से संयम बरतने, तनाव न बढ़ाने और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है। यहां से विश्व का लगभग 20-30 प्रतिशत तेल गुजरता है। भारत अपनी कुल तेल आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से करता है। होर्मुज बंद होने या बाधित होने से भारत की पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, मुद्रास्फीति प्रभावित हो सकती है और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

  • 28 फरवरी 2026 से ईरान और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद स्थिति और बिगड़ी।
  • अमेरिका ने पाकिस्तान में ईरान के साथ वार्ता विफल होने के बाद होर्मुज पर नाकाबंदी
  • जैसे कदम उठाए, जिससे कई जहाजों को वापस लौटना पड़ा। ईरान ने अपने नियंत्रण का दावा किया
  • जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय सुरक्षित नौवहन की मांग कर रहा है।

भारतीय नाविकों पर क्या असर पड़ा?

  • संघर्ष के दौरान कई भारतीय नाविक जहाजों पर फंस गए या हमलों का शिकार हुए।
  • भारत सरकार ने पहले भी इन नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।
  • एम्बेसडर हरीश ने स्पष्ट रूप से कहा कि बेगुनाह नाविकों की जान खतरे में डालना अस्वीकार्य है।
  • भारत ने हमेशा से मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता की वकालत की है
  • क्योंकि लाखों भारतीय वहां काम करते हैं और तेल-गैस आयात पर देश की निर्भरता है।

भारत की अपील और अंतरराष्ट्रीय संदर्भ

  • भारत ने यूएन में कहा कि सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।
  • कूटनीति और बातचीत से तनाव कम करने पर जोर दिया गया। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने
  • भी ईरान से होर्मुज खोलने की अपील की थी।
  • यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में ईरान-अमेरिका और संबंधित तनाव के कारण
  • वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है। भारत ने हमेशा “सभी पक्षों से संयम” की बात कही है
  • और किसी एक पक्ष को दोषी ठहराए बिना शांति की अपील की।

भारत की विदेश नीति का स्टैंड

#भारत की विदेश नीति में ऊर्जा सुरक्षा, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार मार्गों की स्वतंत्रता सर्वोच्च प्राथमिकता है। होर्मुज संकट पर भारत का यह स्पष्ट बयान दिखाता है कि देश अपने हितों की रक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय मूल्यों का भी सम्मान करता है।

  • विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज में स्थिति सामान्य नहीं हुई तो वैश्विक तेल कीमतें
  • बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ेगा। भारत ने पहले
  • भी IMO (International Maritime Organization) में ऐसे हमलों की निंदा की थी।

संयुक्त राष्ट्र में भारत का दो टूक बयान होर्मुज जलडमरूमध्य में शांति और सुरक्षित नौवहन की मांग को मजबूती देता है। “जहाजों पर हमला अस्वीकार्य” कहकर भारत ने न सिर्फ अपने ऊर्जा हितों की रक्षा की, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी जिम्मेदार होने का संदेश दिया।

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