तमिलनाडु में फ्री कार तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री थलपति विजय की ओर से विधायकों को सरकारी गाड़ी देने के फैसले को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के सभी 234 विधायकों को सरकारी वाहन उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। इसके साथ ही वाहन से जुड़े खर्च, ड्राइवर और कार्यालय सहायक के लिए मासिक राशि देने की बात भी सामने आई। अब विपक्षी दल डीएमके ने इस योजना पर सवाल उठाते हुए इसे स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है।

DMK के 59 विधायकों ने ठुकराया सरकारी कार का ऑफर
तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि डीएमके के सभी 59 विधायक सरकार की ओर से दिए जाने वाले इस कार ऑफर का लाभ नहीं लेंगे। उनका तर्क है कि जब सरकार लगातार राज्य पर कर्ज का बोझ होने की बात कर रही है, तब सरकारी खजाने से विधायकों को नई सुविधाएं देना उचित नहीं है।
- उदयनिधि स्टालिन ने सरकार से यह भी मांग की कि यदि विधायकों को सरकारी
- वाहन दिए जा रहे हैं तो पहले उनके चुनावी हलफनामों की जांच की जाए। इससे यह पता लगाया
- जा सके कि किन विधायकों के पास पहले से निजी वाहन हैं और उनकी वास्तविक आर्थिक स्थिति क्या है।
क्या है मुख्यमंत्री विजय की फ्री कार योजना?
मुख्यमंत्री विजय की घोषणा के मुताबिक राज्य के 234 विधायकों को सरकारी वाहन उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। खास तौर पर उन विधायकों को सुविधा देने की बात कही गई है जिनके पास अपना निजी वाहन नहीं है।
- रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की तरफ से वाहन के साथ ईंधन, ड्राइवर और रखरखाव
- से जुड़े खर्च के लिए हर महीने 75 हजार रुपये तथा कार्यालय सहायक के लिए 25 हजार
- रुपये की राशि देने का प्रस्ताव है। यानी इन सुविधाओं के लिए कुल मासिक राशि करीब 1 लाख रुपये तक बताई गई है।
- इस घोषणा के बाद सचिवालय में विधायकों की पसंद के लिए महिंद्रा स्कॉर्पियो और XUV 3XO जैसी गाड़ियां भी प्रदर्शित की गईं।
तमिलनाडु में फ्री कार सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
सरकार का कहना है कि विधायकों का काम केवल विधानसभा तक सीमित नहीं है। उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्रों में लगातार जनता से मिलना, शिकायतें सुनना और अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ता है। ऐसे में वाहन को केवल विलासिता की सुविधा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
सरकार की ओर से मंत्री आधाव अर्जुना ने योजना का बचाव करते हुए कहा कि कई छोटे दलों के विधायकों की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। ऐसे विधायकों के लिए सरकारी वाहन उनके सार्वजनिक कामकाज को आसान बना सकता है।
फ्रीबीज को लेकर भी बढ़ी राजनीतिक बहस
- सरकारी कार योजना के साथ तमिलनाडु में फ्रीबीज यानी मुफ्त सुविधाओं को लेकर भी
- राजनीतिक बहस तेज हो गई है। डीएमके का कहना है कि यदि सरकार खुद राज्य की
- आर्थिक स्थिति और कर्ज को लेकर चिंता जताती है, तो ऐसे समय
- में विधायकों के लिए अतिरिक्त सुविधाओं पर खर्च करने का फैसला सवाल खड़े करता है।
- उदयनिधि स्टालिन ने इसी मुद्दे को आधार बनाकर सरकार पर निशाना साधा है। डीएमके
- प्रवक्ता ने भी तर्क दिया कि जनता के पैसे का इस्तेमाल ऐसी सुविधाओं
- के बजाय जरूरी सार्वजनिक सेवाओं पर होना चाहिए।
दूसरे दलों का क्या है रुख?
सरकारी कार योजना को लेकर केवल डीएमके ही सवाल नहीं उठा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक सीपीआई के विधायक थलाई रामचंद्रन ने भी सरकारी कार के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने की बात कही है। वहीं पीएमके विधायक गणेश कुमार ने सुझाव दिया कि सरकार को वाहन देने से पहले विधायकों की आर्थिक स्थिति और उनकी मौजूदा वाहन सुविधा की जांच करनी चाहिए।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
इस विवाद की शुरुआत 12 अगस्त को हुई, जब वीसीके की विधायक जे. जोथिमनी ने विधायकों को सचिवालय और अपने विधानसभा क्षेत्रों के बीच आने-जाने में होने वाली परेशानियों को देखते हुए सरकारी वाहन उपलब्ध कराने की मांग की थी।
- इसके बाद मुख्यमंत्री विजय ने विधायकों के लिए सरकारी वाहन उपलब्ध कराने की घोषणा की।
- लेकिन घोषणा के कुछ ही समय बाद यह मुद्दा राजनीतिक विवाद में बदल गया।
- विपक्ष ने सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए
- जबकि सरकार ने इसे विधायकों के काम को आसान बनाने वाली सुविधा बताया।
आगे क्या होगा?
- तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय की सरकार और डीएमके के बीच राजनीतिक टकराव
- लगातार दिखाई दे रहा है। सरकारी कार योजना अब केवल एक प्रशासनिक फैसला
- नहीं रह गई है, बल्कि यह सरकार की आर्थिक नीतियों और राजनीतिक प्राथमिकताओं पर बहस का मुद्दा बन गई है।
- एक तरफ सरकार का दावा है कि वाहन उपलब्ध कराने से विधायक अपने क्षेत्रों में जनता की
- समस्याओं तक आसानी से पहुंच सकेंगे। दूसरी तरफ विपक्ष राज्य के वित्तीय बोझ का हवाला देकर इस खर्च पर सवाल उठा रहा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार सभी विधायकों के लिए इस योजना को आगे बढ़ाएगी और क्या अन्य विपक्षी विधायक भी डीएमके की तरह सरकारी कार लेने से इनकार करेंगे। आने वाले दिनों में विधानसभा के अंदर और बाहर इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
Read More : यूपी में Ola Uber और डिलीवरी सेवाओं के नए नियम जानें क्या बदला!