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तमिलनाडु परिसीमन विवाद परिसीमन पर कांग्रेस ने थलपति विजय का दिया साथ 25 साल तक 543 लोकसभा सीटें बरकरार रखने की मांग!

On: August 22, 2026 3:18 AM
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तमिलनाडु परिसीमन विवाद लोकसभा सीटों के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर देश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। अब कांग्रेस ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके नेता थलपति विजय के रुख का समर्थन करते हुए मौजूदा लोकसभा सीटों को अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखने की मांग की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने साफ कहा है कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या में बदलाव नहीं होना चाहिए और तमिलनाडु को मिलने वाली 39 सीटें भी यथावत रखी जानी चाहिए।

तमिलनाडु परिसीमन विवाद
तमिलनाडु परिसीमन विवाद पर कांग्रेस और थलपति विजय का रुख

कांग्रेस ने परिसीमन पर क्या कहा?

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट है। उनके मुताबिक मौजूदा 543 लोकसभा सीटों और तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। कांग्रेस चाहती है कि मौजूदा सीटों का आवंटन अगले 25 वर्षों तक जारी रखा जाए।

  • चिदंबरम ने यह भी कहा कि तमिलनाडु विधानसभा और कांग्रेस कार्यसमिति की
  • ओर से पारित प्रस्तावों में भी इसी तरह का रुख सामने आया है। उन्होंने तमिलनाडु की
  • सत्तारूढ़ पार्टी टीवीके और मुख्य विपक्षी दल डीएमके के इस रुख से सहमत होने पर भी खुशी जताई।

थलपति विजय क्यों उठा रहे हैं परिसीमन का मुद्दा?

  • तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय ने हाल ही में परिसीमन को लेकर दक्षिणी
  • राज्यों की चिंता सामने रखी थी। उनका तर्क है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण
  • के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें इसका राजनीतिक नुकसान नहीं होना चाहिए।

विजय का कहना है कि अगर भविष्य में लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण मुख्य रूप से जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो दक्षिण भारत के कुछ राज्यों की संसद में हिस्सेदारी कम हो सकती है। इससे इन राज्यों की राजनीतिक आवाज कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है।

543 लोकसभा सीटों को फ्रीज करने की मांग

  • #तमिलनाडु सरकार पहले ही लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को स्थायी रूप से बनाए
  • रखने की मांग कर चुकी है। मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में भी इस मुद्दे को उठाया था।
  • उन्होंने राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के मौजूदा आवंटन को बनाए रखने
  • और इसके लिए जरूरी संवैधानिक बदलाव करने का सुझाव दिया था।

तमिलनाडु विधानसभा ने भी 12 अगस्त 2026 को परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव में लोकसभा की कुल संख्या 543 बनाए रखने की मांग की थी। इसके साथ ही मौजूदा सीटों के आधार पर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की बात भी प्रस्ताव में शामिल थी।

तमिलनाडु परिसीमन विवाद दक्षिणी राज्यों को किस बात की चिंता है?

  • परिसीमन का सबसे बड़ा सवाल लोकसभा सीटों के राज्यों के बीच बंटवारे को लेकर है।
  • दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि उन्होंने लंबे समय तक जनसंख्या नियंत्रण, शिक्षा, स्वास्थ्य
  • और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। ऐसे में यदि भविष्य में केवल आबादी के
  • आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण होता है, तो कम जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों की सीटों में अपेक्षाकृत कमी आ सकती है।
  • इसी वजह से तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के कई राजनीतिक दल इस मुद्दे पर सावधानी
  • बरतने की मांग कर रहे हैं। थलपति विजय ने भी कहा है कि जनसंख्या नियंत्रण
  • में सफल राज्यों को संसद में प्रतिनिधित्व कम होने का नुकसान नहीं मिलना चाहिए।

कांग्रेस और तमिलनाडु की राजनीति

  • परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस का यह रुख तमिलनाडु की राजनीति के लिहाज से भी
  • महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस ने मौजूदा सीट व्यवस्था को 25 वर्षों तक बनाए
  • रखने की मांग करके टीवीके सरकार के रुख को समर्थन दिया है।

तमिलनाडु में परिसीमन का मुद्दा केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है। इसे राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संघीय ढांचे और दक्षिणी राज्यों की आवाज से भी जोड़कर देखा जा रहा है। यही वजह है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और ज्यादा चर्चा का विषय बन सकता है।

क्या 25 साल तक सीटें फ्रीज होंगी?

  • फिलहाल कांग्रेस ने मौजूदा 543 लोकसभा सीटों और तमिलनाडु की 39 सीटों को अगले 25 वर्षों
  • तक बरकरार रखने की मांग की है। हालांकि अंतिम फैसला केंद्र सरकार और संसद की
  • संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही होगा। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी
  • कि लोकसभा सीटों का मौजूदा आवंटन वास्तव में अगले 25 वर्षों तक बिल्कुल इसी तरह बना रहेगा।

तमिलनाडु परिसीमन विवाद अब राष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है। थलपति विजय द्वारा दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व की चिंता उठाने के बाद कांग्रेस ने भी मौजूदा लोकसभा सीटों को अगले 25 वर्षों तक बनाए रखने का समर्थन किया है। कांग्रेस के पी. चिदंबरम ने 543 लोकसभा सीटों और तमिलनाडु की 39 सीटों को बरकरार रखने की बात कही है।

आने वाले समय में परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार, दक्षिणी राज्यों और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच चर्चा और तेज हो सकती है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया में जनसंख्या, प्रतिनिधित्व और राज्यों के हितों के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है।

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