संजय राउत सनसनीखेज दावा : 17 अप्रैल 2026 को शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद और प्रमुख प्रवक्ता संजय राउत ने एक बार फिर विवादास्पद बयान देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कपिल सिब्बल के कार्यक्रम “दिल से” में दिए इंटरव्यू में राउत ने दावा किया कि वर्षों पहले जब अमित शाह गुजरात में कांग्रेस सरकार के केसों से परेशान थे, तब वे मदद मांगने बालासाहेब ठाकरे के मातोश्री आवास पहुंचे थे। राउत के अनुसार, बाल ठाकरे ने जज से फोन पर बात करते हुए कहा था – “तुम तो हिंदू हो, मदद करो”।
यह दावा शिवसेना के विभाजन और पुरानी राजनीतिक दोस्ती-दुश्मनी को लेकर किया गया है। राउत ने कहा कि बाल ठाकरे की मदद के बावजूद भाजपा ने राजनीतिक स्वार्थ के लिए शिवसेना तोड़ दी।

क्या था पूरा घटनाक्रम? संजय राउत का बयान
संजय राउत ने बताया कि मातोश्री में बालासाहेब ठाकरे, खुद राउत और कुछ साथी बैठे थे। गेट से बार-बार मैसेज आ रहा था कि गुजरात से एक विधायक अमित शाह मिलना चाहते हैं। बाल ठाकरे ने पहले शाम को आने को कहा। शाम को जब अमित शाह पहुंचे, तो सिक्योरिटी का फोन राउत ने ही उठाया। उन्होंने बाल ठाकरे से कहा कि अमित शाह बहुत परेशानी में हैं, एक बार मिल लीजिए। बाल ठाकरे ने अगले दिन 11 बजे बुलाने को कहा।
- अगले दिन अमित शाह 11 बजे पहुंचे और बाल ठाकरे को प्रणाम किया। अमित शाह ने कहा
- “साहेब, मैं कट्टर हिंदुवादी हूं। कांग्रेस ने मेरे ऊपर बहुत से केस कर दिए हैं। मुझे तड़ीपार कर दिया है।
- गुजरात भी नहीं जा सकता। अब मेरी फाइल मुंबई ट्रांसफर हो गई है। आप जज को फोन कर दीजिए, वो आपकी बात मानेंगे।”
- राउत के दावे के अनुसार, बाल ठाकरे ने तत्कालीन शिवसेना नेता मनोहर जोशी
- को जज के पास भेजा। उन्होंने जोशी से कहा कि अपने फोन से जज से मेरी बात करवाओ।
- जब बात हुई तो बाल ठाकरे ने जज से कहा – “तुम अमित शाह की मदद करो, वो परेशानी में हैं।”
- जज ने जवाब दिया कि यह डबल बेंच का मामला है और दूसरा जज मुस्लिम है।
- इस पर बाल ठाकरे ने कहा – “तुम तो हिंदू हो, मदद करो”।
- राउत ने जोर देकर कहा कि बाल ठाकरे की इस मदद और उपकार के बाद भी “इन लोगों”
- ने राजनीतिक स्वार्थ के लिए शिवसेना तोड़ दी।
#संजय राउत सनसनीखेज दावा अमित शाह का उस समय का बैकग्राउंड
- उस दौर में अमित शाह गुजरात भाजपा के प्रमुख नेता थे। कांग्रेस सरकार के समय उनके खिलाफ
- कई मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले का भी जिक्र रहता है।
- अमित शाह को तड़ीपार भी किया गया था और वे गुजरात छोड़कर अन्य जगहों पर रह रहे थे।
- बाद में कई मामलों में उन्हें राहत मिली और वे राष्ट्रीय स्तर पर उभरे। आज वे भारत के गृह मंत्री हैं।
राउत का मकसद और राजनीतिक संदर्भ
संजय राउत यह दावा शिवसेना के 2022-23 में हुए विभाजन के संदर्भ में कर रहे हैं। उद्धव ठाकरे गुट का आरोप है कि एकनाथ शिंदे और भाजपा ने मिलकर असली शिवसेना को तोड़ा। राउत बार-बार कहते रहे हैं कि बाल ठाकरे की विचारधारा और हिंदुत्व को भाजपा ने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया लेकिन शिवसेना को कमजोर किया।
- यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति अभी भी शिवसेना के दो गुटों
- शिवसेना (UBT) और महायुति के शिवसेना (शिंदे) – के बीच तीखी लड़ाई में है।
- राउत ने इसे अपनी आगामी किताब या पुरानी यादों के आधार पर बताया है।
संजय राउत सनसनीखेज दावा क्या कहते हैं विशेषज्ञ और विपक्ष?
- यह दावा काफी विवादास्पद है क्योंकि इसमें एक पूर्व जज की भूमिका और हिंदू-मुस्लिम का जिक्र शामिल है।
- अभी तक अमित शाह या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
- विपक्षी दलों में कुछ लोग इसे पुरानी राजनीतिक दोस्ती का प्रमाण बता रहे हैं
- तो कुछ इसे राउत की “काल्पनिक कहानी” करार दे रहे हैं।
बाल ठाकरे हमेशा से हिंदुत्व के प्रतीक रहे हैं। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई बार कहा था कि वे हिंदू हितों की रक्षा के लिए कुछ भी कर सकते हैं। अगर राउत का दावा सही है, तो यह बाल ठाकरे की हिंदुत्ववादी सोच को दर्शाता है, लेकिन साथ ही राजनीतिक मदद के लेन-देन का भी संकेत देता है।
राजनीतिक निहितार्थ
यह घटना (अगर सच है) 2000 के दशक की शुरुआत की लगती है, जब भाजपा और शिवसेना महाराष्ट्र में गठबंधन में थे। बाद में दोनों दलों के रिश्ते उतार-चढ़ाव भरे रहे। 2019 के बाद उद्धव ठाकरे के कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बनाने और 2022 के फ्लोर टेस्ट के बाद शिवसेना के टूटने से रिश्ते पूरी तरह बिगड़ गए।
- संजय राउत अक्सर ऐसे खुलासे करते रहते हैं जो सुर्खियां बन जाते हैं।
- इससे पहले भी उन्होंने कई मुद्दों पर विवादित बयान दिए हैं। इस दावे से महाराष्ट्र की
- राजनीति में फिर से हिंदुत्व vs राजनीतिक स्वार्थ की बहस छिड़ सकती है।
संजय राउत का यह दावा बाल ठाकरे की यादों को ताजा करता है और अमित शाह के शुरुआती संघर्ष को भी उजागर करता है। चाहे यह कहानी कितनी भी पुरानी हो, आज के समय में यह शिवसेना के विभाजन और हिंदुत्व की राजनीति पर नया सवाल खड़ा करती है। बाल ठाकरे की विरासत पर कौन सच्चा वारिस है – यह बहस अब और तेज हो सकती है।