कर्नाटक सरकार में बड़ा रिशफल : कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार में कैबिनेट फेरबदल की मांग को लेकर कांग्रेस के करीब 30 विधायक दिल्ली रवाना हो गए हैं। ये विधायक पार्टी हाईकमान से मुलाकात कर मंत्री पद की दावेदारी पेश करने वाले हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस घटनाक्रम को बड़े रिशफल या नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
कर्नाटक कांग्रेस में क्यों मचा बवाल?
#कर्नाटक कांग्रेस के अंदर लंबे समय से असंतोष की खबरें आ रही थीं। सरकार बनने के तीन साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन कई वरिष्ठ विधायकों को अभी तक मंत्री पद नहीं मिला है। पहले सिद्धारमैया ने संकेत दिए थे कि 2-2.5 साल बाद कैबिनेट में बदलाव होगा और नए चेहरों को मौका मिलेगा। लेकिन अब विधायकों का कहना है कि वादा पूरा नहीं हुआ।

वरिष्ठ विधायक जैसे टीबी जयचंद्र (कर्नाटक सरकार के विशेष प्रतिनिधि) और अशोक पट्टन (विधानसभा मुख्य सचेतक) इस समूह का नेतृत्व कर रहे हैं। तीन या इससे अधिक बार चुनाव जीत चुके कई नेता दिल्ली पहुंचे हैं। इनकी मुख्य मांग है कि कैबिनेट रिशफल में कम से कम 20-25 नए या वरिष्ठ विधायकों को मंत्री बनाया जाए।
- पहली बार चुने गए विधायकों ने भी दबाव बढ़ा दिया है। उन्होंने पत्र लिखकर मांग की है
- कि फेरबदल के दौरान उनमें से कम से कम पांच को मंत्री पद दिया जाए। बेलूर गोपालकृष्ण
- जैसे विधायकों ने स्पष्ट कहा कि कई नेताओं को तीन-चार या पांच बार मौका मिल चुका है
- अब बारी उन लोगों की होनी चाहिए जिन्हें अभी तक कुछ नहीं मिला।
राहुल गांधी और हाईकमान से क्या मुलाकात?
विधायकों का दावा है कि वे राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला से मुलाकात करेंगे। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह मुलाकात सिर्फ मंत्री पद के लिए है, लेकिन विपक्षी भाजपा इसे सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच गुटबाजी से जोड़ रही है।
भाजपा नेता आर अशोक ने आरोप लगाया कि कुछ विधायक डीके शिवकुमार को अगला मुख्यमंत्री बनाने के लिए दबाव बना रहे हैं, जबकि दूसरे गुट सिद्धारमैया को बरकरार रखने की पैरवी कर रहे हैं। हालांकि कांग्रेस विधायकों ने इसे साधारण संगठनात्मक मुद्दा बताया है और कहा कि नेतृत्व परिवर्तन का कोई सवाल नहीं है।
कर्नाटक सरकार में बड़ा रिशफल कर्नाटक राजनीति का पृष्ठभूमि
- कर्नाटक में कांग्रेस सरकार 2023 के विधानसभा चुनाव में जीतकर सत्ता में आई थी।
- सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने और डीके शिवकुमार उपमुख्यमंत्री। शुरू से ही दोनों नेताओं के बीच तनाव की खबरें
- आती रहीं, लेकिन दोनों ने इसे खारिज किया। अब उपचुनाव खत्म होने के बाद यह दबाव बढ़ गया है।
- कई विधायकों का मानना है कि मंत्रिमंडल में विस्तार या फेरबदल से पार्टी की
- एकता मजबूत होगी और 2028 के चुनाव की तैयारी भी हो सकेगी।
- लेकिन अगर हाईकमान ने सख्त रुख अपनाया तो अंदरूनी कलह और बढ़ सकती है।
क्या होगा आगे?
अभी तक सिद्धारमैया की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। माना जा रहा है कि हाईकमान के निर्देश पर ही फैसला होगा। अगर रिशफल होता है तो कई मंत्रियों की कुर्सी जा सकती है और नए चेहरों को मौका मिलेगा। कुछ अटकलें CM बदलाव तक की भी चल रही हैं, लेकिन कांग्रेस इसे सिरे से खारिज कर रही है।
- कर्नाटक की यह घटना पूरे देश की राजनीति पर असर डाल सकती है
- क्योंकि कांग्रेस की राज्य इकाई में स्थिरता बनी रहे तो राष्ट्रीय स्तर पर भी फायदा होगा।
- वहीं भाजपा इसे कांग्रेस की आंतरिक कमजोरी बताकर हमला बोल रही है।
- कर्नाटक कांग्रेस के इस ड्रामे पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। क्या हाईकमान विधायकों
- की मांग मान लेगा या सिद्धारमैया की सरकार को और मजबूत बनाएगा?
- फैसला आने वाले दिनों में साफ होगा।
कर्नाटक में कैबिनेट रिशफल की मांग सिर्फ पद की लड़ाई नहीं, बल्कि पार्टी के अंदरूनी संतुलन और भविष्य की रणनीति से जुड़ी है। 30 विधायकों का दिल्ली जाना दिखाता है कि सत्ता के बंटवारे में असंतोष कितना गहरा हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि हाईकमान अगर सही समय पर हस्तक्षेप करता है तो स्थिति संभल सकती है, वरना कांग्रेस को नुकसान हो सकता है।