इस्लामाबाद टॉक्स 2026 : से पहले ईरान ने सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया। ईरानी डेलिगेशन को पाकिस्तान भेजने के लिए कई नकली (डिकॉय) विमान भेजे गए, जिनमें से केवल एक में असली प्रतिनिधिमंडल सवार था।
यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि ईरान को पाकिस्तान पर पूरा भरोसा नहीं है और इजराइल से हवाई हमले का खतरा मंडरा रहा था। इस घटना ने मिडिल ईस्ट की नाजुक शांति वार्ता को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है।

इस्लामाबाद टॉक्स 2026 क्यों भेजे गए नकली विमान?
ईरान को डर था कि पाकिस्तान में डेलिगेशन पर हमला हो सकता है। इसलिए सुरक्षा के लिहाज से डिकॉय एयरक्राफ्ट की रणनीति अपनाई गई। सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि कई विमान उड़ान भरकर इस्लामाबाद पहुंचे, लेकिन असली डेलिगेशन सिर्फ एक में था।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ डेलिगेशन का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अरागची भी शामिल हैं। गालिबाफ ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि लेबनान में युद्धविराम और ईरान की फ्रोजन संपत्तियां रिलीज करने की शर्तें अभी पूरी नहीं हुई हैं।
ईरान की अर्ध-सरकारी एजेंसी तसनीम ने भी कहा कि शर्तें पूरी होने तक बातचीत शुरू नहीं होगी।
पाकिस्तान पर क्यों नहीं भरोसा?
- पाकिस्तान खुद को अमेरिका-ईरान वार्ता का मध्यस्थ बता रहा है, लेकिन ईरान जैसे
- देश को भी उस पर भरोसा नहीं है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि पाकिस्तान
- आतंकवाद का अड्डा माना जाता है। इजराइली राजदूत ने भी पाकिस्तान को “आतंकवाद प्रायोजक” करार दिया
- और कहा कि उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
पाकिस्तानी एयर फोर्स ने ईरानी डेलिगेशन को एस्कॉर्ट करने के लिए फाइटर जेट्स और AWACS भेजे थे, लेकिन ईरान ने सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती।
अमेरिकी डेलिगेशन और ट्रंप की भूमिका
- #अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस डेलिगेशन का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके साथ ट्रंप के विशेष
- दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। अमेरिकी टीम में
- राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद, विदेश विभाग और पेंटागन के विशेषज्ञ भी हैं।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 अप्रैल 2026 को दो हफ्ते के सीजफायर की घोषणा की थी।
- ट्रंप ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य अपने आप खुल जाएगा, लेकिन ईरान अब भी शर्तों पर अड़ा हुआ है।
- वार्ता शनिवार (11 अप्रैल 2026) को शुरू होने वाली है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अविश्वास साफ दिख रहा है।
ईरान-अमेरिका तनाव का पूरा संदर्भ
फरवरी 2026 में शुरू हुए छह हफ्ते के युद्ध के बाद दो हफ्ते का सीजफायर हुआ। ईरान लेबनान (हिजबुल्लाह) में इजराइल के हमलों को सीजफायर का हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका-इजराइल इसे अलग मुद्दा बताते हैं।
ईरान की मुख्य मांगें:
- लेबनान में इजराइल के हमले तुरंत बंद हों
- ईरान की ब्लॉक संपत्तियां रिलीज हों
- ट्रंप की टीम “सद्भावना” (good faith) से बातचीत की बात कर रही है
- लेकिन चेतावनी भी दी है कि अगर ईरान “गेम” खेला तो सख्ती बरती जाएगी।
सुरक्षा चिंताएं और मिडिल ईस्ट का भविष्य
इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पाकिस्तान ने शहर में छुट्टी घोषित कर दी और बैरिकेडिंग कर दी। ईरान के डिकॉय प्लेन का इस्तेमाल पिछले अमेरिकी राष्ट्रपतियों (जैसे क्लिंटन) द्वारा अपनाई गई रणनीति की याद दिलाता है।
वार्ता सफल हुई तो मिडिल ईस्ट में तनाव कम हो सकता है और तेल की सप्लाई (होर्मुज) सामान्य रहेगी। असफलता से नई जंग की आशंका बनी रहेगी। भारत समेत कई देश इस वार्ता के नतीजे पर नजर रखे हुए हैं क्योंकि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
ईरान द्वारा कई नकली विमान भेजकर डेलिगेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने का कदम दिखाता है कि इस्लामाबाद टॉक्स में भरोसे की कमी कितनी गहरी है। पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, लेकिन ईरान और इजराइल दोनों को उस पर संदेह है।
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