हरिद्वार में एक्स मुस्लिम : उत्तराखंड की पावन नगरी हरिद्वार में हर की पौड़ी पर पहुंची एक्स मुस्लिम सद्भावना पदयात्रा (पूर्व मुस्लिम सद्भावना पदयात्रा) को लेकर तीखा विवाद खड़ा हो गया है। यात्रा में शामिल कुछ लोगों द्वारा इस्लामिक कैप (गोल टोपी) पहनकर हर की पौड़ी क्षेत्र में प्रवेश करने पर श्री गंगा सभा ने कड़ी नाराजगी जताई है। सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम और तीर्थ पुरोहित तीर्थ उज्जवल पंडित ने आरोप लगाया कि झूठी जानकारी देकर प्रशासन और सभा को भ्रमित किया गया। उन्होंने मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी दी है।
हरिद्वार में एक्स मुस्लिम यात्रा की पूरी कहानी
यह यात्रा 11 अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के गंगा बैराज से शुरू हुई थी। दो दिवसीय पदयात्रा 12 अप्रैल को हरिद्वार के ब्रह्मकुंड, हर की पौड़ी पर समाप्त हुई। यात्रा में शामिल पूर्व मुस्लिमों ने दावा किया कि उन्होंने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाया है। इनमें इमरोज आलम जैसे कई लोग शामिल थे, जो गंगा माता को नमन करने और सनातन परंपरा में शामिल होने के लिए हरिद्वार पहुंचे थे।

यात्रा का उद्देश्य स्पष्ट रूप से घर वापसी (Ghar Wapsi) बताया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि इस्लाम छोड़ने के बाद सनातन धर्म अपनाने वालों को सुरक्षा और सम्मान चाहिए। संत रामविशाल दास महाराज जैसे संतों और हिंदू संगठनों के सदस्य भी यात्रा में शामिल थे। यात्रा के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी क्योंकि यह संवेदनशील मुद्दा था।
श्री गंगा सभा का गुस्सा और आरोप
श्री गंगा सभा हर की पौड़ी क्षेत्र की व्यवस्था संभालती है। सभा के अनुसार, उन्हें पहले बताया गया था कि यात्रा में केवल वे लोग शामिल हैं जिन्होंने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म स्वीकार किया है। सभा ने इस फैसले का स्वागत भी किया, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर उन्हें झटका लगा।
- सभा अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा, “उन्हें बताया गया था कि यात्रा में केवल इस्लाम छोड़कर
- सनातन धर्म अपनाने वाले शामिल हैं। हमने इसका स्वागत किया, लेकिन वीडियो में हर की
- पौड़ी पर कई लोग मुस्लिम टोपी लगाए दिख रहे हैं। इससे हमें आघात लगा है।
- हर की पौड़ी क्षेत्र में बायलॉज के अनुसार मुस्लिम प्रवेश नहीं कर सकते।
- ऐसा करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”
तीर्थ पुरोहित उज्जवल पंडित ने आरोप लगाया कि एक संत ने झूठ बोलकर प्रशासन और श्री गंगा सभा को भ्रमित किया। उन्होंने कहा कि हर की पौड़ी पर पहुंचे कई लोग मुस्लिम टोपी पहने हुए थे। सभा का कहना है कि हर की पौड़ी के नियमों (बायलॉज) के मुताबिक गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है। ऐसे में मुस्लिम टोपी पहनकर आने वालों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
- सभा ने संत रामविशाल दास महाराज पर भी तीखे आरोप लगाए।
- कुछ लोगों ने उन्हें कांग्रेस नेता बताते हुए सनातन धर्म को कलंकित करने का आरोप लगाया।
विवाद की असली वजह क्या है?
हर की पौड़ी हरिद्वार का सबसे पवित्र स्थल है, जहां लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान करते हैं। क्षेत्र के नियमों में स्पष्ट रूप से कुछ प्रतिबंध हैं, जिनका उद्देश्य पवित्रता बनाए रखना है। यात्रा के वायरल वीडियो में मुस्लिम टोपी (इस्लामिक कैप) पहने लोगों को देखकर हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया।
- प्रतिभागियों का तर्क है कि वे अब पूर्व मुस्लिम हैं और सनातन धर्म अपनाने के बाद गंगा पूजा का अधिकार रखते हैं।
- वहीं, श्री गंगा सभा का मानना है कि नियमों का उल्लंघन हुआ है और झूठी अनुमति ली गई।
- यह विवाद धर्म परिवर्तन, घर वापसी और धार्मिक स्थलों की पवित्रता को लेकर बड़े सवाल उठा रहा है।
सोशल मीडिया पर बवाल
- यात्रा के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिससे दोनों पक्षों में बहस छिड़ गई।
- कुछ लोगों ने पूर्व मुस्लिमों के सनातन अपनाने का स्वागत किया
- तो कुछ ने हर की पौड़ी पर गैर-हिंदू प्रवेश पर सख्ती की मांग की।
- सुरक्षा कारणों से पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर रहा।
क्या कहते हैं नियम और पृष्ठभूमि?
- हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थलों पर धार्मिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर नियम बनाए गए हैं।
- श्री गंगा सभा का दावा है कि इन नियमों (बायलॉज) का पालन जरूरी है
- ताकि पवित्र क्षेत्र की गरिमा बनी रहे। इसी तरह गंगोत्री आदि अन्य स्थलों
- पर भी गैर-हिंदुओं पर प्रतिबंध को लेकर चर्चा होती रही है।
- यह मामला सिर्फ एक यात्रा का नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर धर्मांतरण, घर वापसी और सनातन
- संस्कृति की रक्षा से जुड़ा है। पूर्व मुस्लिमों का कहना है कि सनातन धर्म ही शांति और मानवता का एकमात्र रास्ता है।
आगे क्या?
- श्री गंगा सभा ने सख्त कार्रवाई और FIR की चेतावनी दी है। प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कर रहा है।
- यदि नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
यह घटना हरिद्वार की धार्मिक पवित्रता, नियमों के पालन और अंतरधार्मिक सद्भाव पर नई बहस छेड़ रही है। सनातन अनुयायी चाहते हैं कि पवित्र स्थलों की गरिमा किसी भी कीमत पर बनी रहे, जबकि पूर्व मुस्लिम समुदाय अपनी नई आस्था के साथ गंगा पूजा का अधिकार मांग रहा है।
हरिद्वार में एक्स मुस्लिम यात्रा विवाद दिखाता है कि धार्मिक स्थलों पर नियमों का सख्त पालन कितना जरूरी है। श्री गंगा सभा की चेतावनी और मुस्लिम टोपी वाले प्रवेश पर उठे सवाल इस मामले को और गंभीर बनाते हैं। उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही स्पष्ट स्थिति बनाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।
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