पाकिस्तान में बातचीत फेल : अमेरिका और ईरान के बीच शांति की उम्मीद एक बार फिर टूट गई है। पाकिस्तान में हुई 21 घंटे लंबी मैराथन वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त कदम उठाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) में नौसेना ब्लॉकेड की घोषणा कर दी है। दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है, ऐसे में यह फैसला वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है।
13 अप्रैल 2026 की सुबह यह खबर सामने आई कि पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत विफल हो गई। वार्ता में परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलमार्ग खोलने और युद्धविराम जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने “गोलपोस्ट बदल दिए” और “अत्यधिक मांगें” रखीं, जबकि दोनों पक्ष “समझौते के काफी करीब” थे।

ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा, “ईरान ने वादा किया था कि वे होर्मुज खोलेंगे, लेकिन ऐसा नहीं किया। उनकी मनमानी से पूरी दुनिया को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं युद्ध समाप्त न होने का मुख्य कारण हैं।
पाकिस्तान वार्ता क्यों फेल हुई?
पाकिस्तान में हुई यह ऐतिहासिक फेस-टू-फेस वार्ता 1979 के बाद दोनों देशों के बीच सबसे लंबी डायरेक्ट बातचीत थी। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका की शर्तें स्वीकार नहीं कीं। मुख्य अड़चनें थीं:
- ईरान का परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन का अधिकार
- होर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह खोलना
- ईरान की फ्रोजन एसेट्स (लगभग 27 बिलियन डॉलर) को रिलीज करना
- क्षेत्रीय युद्धविराम (लेबनान सहित)
ईरान का कहना है कि अमेरिका ने “अनुचित और अत्यधिक” मांगें रखीं, जबकि ट्रंप का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
पाकिस्तान में बातचीत फेल ट्रंप का होर्मुज प्लान – ब्लॉकेड शुरू
वार्ता फेल होते ही ट्रंप ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले हर जहाज को रोका जाए। खासकर उन पोतों को जो ईरान को कोई शुल्क (टोल) चुकाते हैं।
- ट्रंप ने कहा, “अमेरिकी नौसेना दुनिया की सबसे बेहतरीन है।
- हम तुरंत होर्मुज में ब्लॉकेड शुरू कर रहे हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान की नौसेना
- पहले ही तबाह हो चुकी है और बारूदी सुरंगों का दावा सिर्फ धमकी है।
- अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि सोमवार से ईरानी बंदरगाहों की
- नाकाबंदी शुरू हो जाएगी। हालांकि, गैर-ईरानी जहाजों को सामान्य रूप से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।
होर्मुज का महत्व और संभावित प्रभाव!
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है। यहां से रोजाना लाखों बैरल तेल गुजरता है। अगर ब्लॉकेड लंबा चला तो:
- वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं
- भारत, चीन, जापान और यूरोप जैसे बड़े आयातक देश प्रभावित होंगे
- शिपिंग रूट्स बाधित होंगे
- मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने चेतावनी दी है कि कोई भी गलत कदम उठाने वाला “होर्मुज के घातक भंवर” में फंस जाएगा। ईरान का दावा है कि जलमार्ग उनके पूर्ण नियंत्रण में है।
ट्रंप क्या प्लानिंग कर रहे हैं?
- ट्रंप का यह कदम “मैक्सिमम प्रेशर” की नीति को दिखाता है। वे चाहते हैं
- कि ईरान परमाणु कार्यक्रम छोड़ दे और होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह खोल दे।
- ट्रंप ने कहा, “उचित समय पर हम ईरान के खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर देंगे
- लेकिन फिलहाल उनकी मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी।”
- खाड़ी देश अमेरिका के साथ खड़े हैं, जबकि पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
आगे क्या होगा?
- वर्तमान में दो हफ्ते का अस्थायी युद्धविराम चल रहा है, लेकिन ब्लॉकेड से स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है।
- ईरान ने कहा है कि वह किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेगा।
- दुनिया भर के नेता इस स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। भारत जैसे देशों के लिए तेल
- की कीमतों में उछाल और आपूर्ति प्रभावित होना बड़ी चिंता का विषय है।
ट्रंप की यह रणनीति या तो ईरान को बातचीत की मेज पर वापस लाएगी या फिर मध्य पूर्व में नया संघर्ष खड़ा कर देगी। फिलहाल स्थिति अनिश्चित है और अगले कुछ दिनों में बड़े विकास की उम्मीद है।