अरविंद केजरीवाल आबकारी नीति : दिल्ली की राजनीति और देशभर में चर्चित आबकारी नीति (Excise Policy) केस एक बार फिर सुर्खियों में है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने अब इस मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के बजाय जस्टिस मनोज की बेंच में पेश होने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे इस हाई-प्रोफाइल केस में अरविंद केजरीवाल ने पहले जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से खुद को अलग करने (Recusal) की मांग की थी। उन्होंने कोर्ट में कहा था कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई को लेकर गंभीर आशंका है।

अरविंद केजरीवाल आबकारी नीति क्या है पूरा मामला?
दिल्ली की नई आबकारी नीति को लेकर ED और CBI द्वारा जांच की जा रही है। आरोप है कि शराब नीति में कुछ कारोबारियों को फायदा पहुंचाया गया और इसमें करोड़ों रुपये के घोटाले हुए। इसी मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत कई नेताओं के नाम सामने आए थे।
हालांकि, आम आदमी पार्टी लगातार इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बता रही है। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।
क्यों बदली गई बेंच?
- अरविंद केजरीवाल ने अदालत में कई कारण बताते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की
- बेंच से मामले को हटाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें ऐसा लग रहा है
- कि अदालत पहले से ही उन्हें दोषी मान रही है।
- उन्होंने अपनी याचिका में यह भी कहा कि कुछ आदेशों और टिप्पणियों से निष्पक्ष सुनवाई
- को लेकर संदेह पैदा हुआ है। बाद में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया
- और अब केस दूसरी बेंच को ट्रांसफर कर दिया गया।
जस्टिस मनोज की बेंच में होगी सुनवाई
- अब इस केस की सुनवाई जस्टिस मनोज की बेंच में होगी। माना जा रहा है
- कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े कानूनी मोड़ देखने को मिल सकते हैं।
- दिल्ली की राजनीति में भी इसका असर दिखाई दे सकता है।
- कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी हाई-प्रोफाइल केस में निष्पक्ष सुनवाई सबसे जरूरी होती है।
- ऐसे में बेंच बदलने का फैसला न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीति में फिर गरमाया मुद्दा
- इस पूरे घटनाक्रम के बाद भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का
- दौर फिर तेज हो गया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है
- जबकि AAP इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है।
- सोशल मीडिया पर भी यह मामला ट्रेंड कर रहा है। समर्थक और
- विरोधी दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
क्या हो सकता है आगे?
- अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी हुई है। अदालत में आने वाले फैसले
- से न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है।
- दिल्ली की राजनीति में यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहने वाला है।
- विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केस आने वाले चुनावों में भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।
- वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र और एजेंसियों के दुरुपयोग से जोड़कर देख रहा है।
अरविंद केजरीवाल का जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की जगह जस्टिस मनोज की बेंच में पेश होने का फैसला इस हाई-प्रोफाइल केस में नया मोड़ माना जा रहा है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मामले को और अधिक चर्चित बना सकती हैं।