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अब्राहम समझौता क्या है? मुस्लिम देशों पर क्यों दबाव बना रहे Donald Trump पाकिस्तान ने इज़राइल को क्यों कहा ना

On: May 26, 2026 6:36 AM
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अब्राहम समझौता क्या है : मध्य पूर्व की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने कई मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौते (Abraham Accords) में शामिल होने की अपील की है। इस मुद्दे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, खासकर तब जब पाकिस्तान ने साफ तौर पर इज़राइल को मान्यता देने से इनकार कर दिया है।

ईरान-इज़राइल तनाव और पश्चिम एशिया की बदलती राजनीतिक स्थिति के बीच अब्राहम समझौता फिर से सुर्खियों में आ गया है। आइए जानते हैं आखिर यह समझौता क्या है, क्यों महत्वपूर्ण है और पाकिस्तान इसके खिलाफ क्यों खड़ा है।

अब्राहम समझौता क्या है और मुस्लिम देशों पर Donald Trump के दबाव की खबर
अब्राहम समझौता क्या है मुस्लिम देशों और इज़राइल के बीच बढ़ती कूटनीतिक चर्चा।

अब्राहम समझौता क्या है!

#अब्राहम समझौता (Abraham Accords) वर्ष 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में शुरू किया गया एक ऐतिहासिक समझौता था। इसका मुख्य उद्देश्य इज़राइल और मुस्लिम देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाना था। इस समझौते के तहत संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मोरक्को और सूडान जैसे देशों ने इज़राइल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए।

  • इस समझौते का नाम पैगंबर इब्राहिम (Abraham) के नाम पर रखा गया
  • जिन्हें यहूदी, ईसाई और मुस्लिम तीनों धर्मों में सम्मान दिया जाता है।
  • समझौते का उद्देश्य क्षेत्र में शांति, व्यापार और सुरक्षा सहयोग बढ़ाना था।

Donald Trump क्यों बना रहे दबाव?

हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार Donald Trump ने पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन जैसे देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील की है। उनका मानना है कि इससे मध्य पूर्व में स्थिरता आएगी और इज़राइल-ईरान तनाव को कम करने में मदद मिलेगी।

  • Trump ने यह भी कहा कि अगर ईरान के साथ शांति समझौता होता है
  • तो अधिक मुस्लिम देशों को इज़राइल के साथ संबंध सामान्य करने चाहिए।
  • अमेरिका इस पहल को एक बड़े क्षेत्रीय गठबंधन के रूप में देख रहा है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका चाहता है कि मुस्लिम देश इज़राइल के साथ मिलकर ईरान
  • के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करें। यही कारण है कि अब्राहम समझौते को केवल
  • राजनयिक पहल नहीं बल्कि रणनीतिक गठबंधन के रूप में भी देखा जा रहा है।

पाकिस्तान ने क्यों किया विरोध?

#पाकिस्तान लंबे समय से फिलिस्तीन का समर्थन करता रहा है और उसने अभी तक इज़राइल को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। पाकिस्तान का कहना है कि जब तक फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा नहीं मिलता, तब तक वह इज़राइल के साथ संबंध सामान्य नहीं करेगा।

पाकिस्तान के भीतर भी इस मुद्दे पर काफी संवेदनशील माहौल है। वहां की जनता का बड़ा वर्ग फिलिस्तीन के समर्थन में खड़ा है। ऐसे में सरकार पर घरेलू दबाव भी काफी ज्यादा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Trump के प्रस्ताव के बाद पाकिस्तान ने साफ संकेत दिए कि वह अब्राहम समझौते में शामिल होने के लिए तैयार नहीं है।

ईरान-इज़राइल तनाव का क्या है संबंध?

  • मध्य पूर्व में ईरान और इज़राइल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका और इज़राइल ईरान
  • को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानते हैं। इसी वजह से अमेरिका
  • मुस्लिम देशों को इज़राइल के साथ जोड़कर एक मजबूत गठबंधन बनाना चाहता है।
  • हाल के घटनाक्रमों में ईरान युद्ध और सीजफायर की चर्चाओं के बीच अब्राहम समझौते
  • का मुद्दा फिर सामने आया है। Trump का मानना है कि अगर अधिक मुस्लिम देश इज़राइल
  • के साथ जुड़ते हैं तो क्षेत्र में स्थिरता बढ़ सकती है।

सऊदी अरब और अन्य देशों का रुख

हालांकि UAE और बहरीन पहले ही इस समझौते का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन सऊदी अरब जैसे बड़े मुस्लिम देश अभी भी सावधानी बरत रहे हैं। सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान के बिना इज़राइल के साथ पूर्ण संबंध संभव नहीं हैं।

तुर्की और कतर जैसे देशों का रुख भी काफी संतुलित माना जा रहा है। वे क्षेत्रीय शांति चाहते हैं लेकिन फिलिस्तीन मुद्दे को नजरअंदाज नहीं करना चाहते।

क्या बदल सकता है मध्य पूर्व का समीकरण?

  • अगर भविष्य में और मुस्लिम देश अब्राहम समझौते में शामिल होते हैं
  • तो मध्य पूर्व की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
  • इससे व्यापार, सुरक्षा और कूटनीतिक संबंध मजबूत हो सकते हैं
  • लेकिन फिलिस्तीन मुद्दा अब भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना फिलिस्तीन समस्या के समाधान के यह समझौता पूरी तरह सफल नहीं हो पाएगा।

अब्राहम समझौता मध्य पूर्व की राजनीति का एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। Donald Trump इसे और विस्तारित करना चाहते हैं, लेकिन पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देश फिलिस्तीन मुद्दे को नजरअंदाज करने के पक्ष में नहीं हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या और देश इस समझौते का हिस्सा बनते हैं या फिर विरोध जारी रहता है।

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