नीट यूजी 2026 परीक्षा का पेपर लीक एक बार फिर पूरे देश में तहलका मचा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए बेहद कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा, “बड़े दुख की बात है कि इतने घटनाक्रम के बाद भी उन्होंने कोई सबक नहीं सीखा है”। यह टिप्पणी NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) की बार-बार की लापरवाही पर है।
25 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने NEET-UG 2026 पेपर लीक से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार, NTA और CBI से जवाब मांगा है। याचिकाओं में NTA को भंग करने, नई परीक्षा कराने और पूर्ण CBI जांच की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई क्या हुई?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि 2024 के पेपर लीक मामले में दिए गए आश्वासनों के बावजूद 2026 में फिर वही गड़बड़ी दोहराई गई। कोर्ट ने NTA से 2024 में गठित राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर अमल की रिपोर्ट भी मांगी है।
नीट यूजी 2026 पेपर लीक: क्या हुआ था?
- परीक्षा 3 मई 2026 को हुई।
- राजस्थान में एक “गेस पेपर” वायरल हुआ जिसमें 100+ सवाल असली पेपर से मैच कर गए।
- NTA ने 12 मई 2026 को परीक्षा रद्द कर दी।
- CBI ने कई गिरफ्तारियां की हैं, लेकिन छात्रों में गुस्सा और हताशा बढ़ गई है।
महाराष्ट्र के लातूर में एक 18 वर्षीय NEET aspirant मैथिली सोनवणे ने पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के तनाव में आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
डॉक्टर्स संगठनों की मांग
Federation of All India Medical Associations (FAIMA) और United Doctors Front (UDF) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। मुख्य मांगें:
- NTA को भंग कर नया Statutory Body बनाया जाए जो संसद के प्रति जवाबदेह हो।
- परीक्षा पूरी तरह डिजिटल (CBT) मोड में हो।
- कोर्ट की निगरानी में नई परीक्षा कराई जाए।
- NTA में कोचिंग माफिया और भ्रष्टाचार की जड़ें खोदी जाएं।
NTA की विश्वसनीयता पर सवाल
यह दूसरी बार है जब NEET UG में बड़े स्तर पर पेपर लीक का मामला सामने आया है। 2024 में भी इसी तरह विवाद हुआ था। छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि NTA अब परीक्षाओं का आयोजन करने लायक नहीं रहा। लाखों छात्र साल भर की मेहनत पर पानी फिरता देख रहे हैं।
विपक्ष का हमला
- कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
- सचिन पायलट ने इसे “युवाओं के भविष्य के साथ जघन्य अपराध” बताया।
NEET पेपर लीक के प्रभाव
- 22 लाख से ज्यादा छात्र प्रभावित।
- मेडिकल सीट्स की प्रक्रिया में देरी।
- छात्रों में मानसिक तनाव और अवसाद बढ़ा।
- शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा डिगा।
क्या होना चाहिए आगे?
शिक्षाविदों का सुझाव है कि:
- परीक्षा का पूरा सिस्टम डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाए।
- प्रश्न पत्र प्रिंटिंग और ट्रांसपोर्टेशन में AI और ब्लॉकचेन जैसी तकनीक का इस्तेमाल हो।
- NTA को स्वायत्त लेकिन जवाबदेह बनाया जाए या नया संस्थान बनाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अगली सुनवाई में बड़े फैसले की उम्मीद है।
NEET UG 2026 पेपर लीक न सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा है, बल्कि लाखों सपनों और पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता का सवाल है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी साफ संदेश देती है कि अब और ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
Read More : असम UCC बिल पेश हिमंत विश्वा शर्मा सरकार का बड़ा कदम, अनुसूचित जनजातियों को मिली राहत!