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इजराइल-अमेरिका संबंध ने ईरान पर किया संयुक्त हमला खामेनेई की मौत, पीएम मोदी को क्यों नहीं दी गई जानकारी गिदेओन सार का बड़ा खुलासा!

On: March 7, 2026 3:07 AM
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इजराइल-अमेरिका संबंध : मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और इज़राइल ने फरवरी 2026 के अंत में ईरान पर बड़े पैमाने पर संयुक्त सैन्य हमला किया, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इस हमले ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। खामेनेई की हत्या के बाद ईरान में सत्ता परिवर्तन की संभावना बढ़ गई है, जबकि क्षेत्रीय युद्ध का खतरा मंडरा रहा है।

इज़राइली विदेश मंत्री गिदेओन सार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस हमले की कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी। क्यों? क्योंकि अंतिम सैन्य निर्णय मोदी की इज़राइल यात्रा के बाद ही लिया गया।

इजराइल-अमेरिका संबंध
इजराइल और अमेरिका के बीच मजबूत राजनीतिक और सैन्य संबंध।

इजराइल-अमेरिका संबंध पीएम मोदी की इज़राइल यात्रा और हमले का समय

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25-26 फरवरी 2026 को इज़राइल का दो दिवसीय दौरा किया।
  • इस दौरान दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई, रक्षा सहयोग बढ़ाने और आर्थिक
  • साझेदारी पर जोर दिया गया। लेकिन ठीक दो दिन बाद, 28 फरवरी 2026 को इज़राइल
  • और अमेरिका ने ईरान पर हमला शुरू कर दिया।

तेहरान, इस्फहान समेत कई प्रमुख शहरों पर हवाई हमले किए गए। हमले का मुख्य लक्ष्य ईरान का परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलें और हिजबुल्लाह, हमास, हूती जैसे समूहों को मिलने वाला समर्थन था। गिदेओन सार ने कहा, “हम प्रधानमंत्री मोदी को इस बारे में सूचित नहीं कर सके क्योंकि सैन्य कार्रवाई का अंतिम निर्णय उनके जाने के बाद शनिवार तड़के लिया गया था।”

इज़राइली राजदूत रुवेन अजार ने भी इसे “ऑपरेशनल अवसर” बताया, जो मोदी के जाने के बाद खुफिया जानकारी के आधार पर सामने आया। इज़राइल बार-बार सफाई दे रहा है कि यह कोई पूर्व-नियोजित योजना नहीं थी, जिसमें भारत को शामिल किया गया हो।

खामेनेई की मौत और ईरान में उथल-पुथल

  • हमले में अली खामेनेई की मौत की पुष्टि कई स्रोतों से हुई है। ईरान ने जवाबी हमले शुरू कर दिए
  • इज़राइल, अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों पर मिसाइल-ड्रोन अटैक किए। ईरान में अंतरिम
  • नेतृत्व ने बदला लेने की कसम खाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब ईरान में सत्ता परिवर्तन हो सकता है
  • जैसा कि गिदेओन सार ने संकेत दिया – “संभवतः अब हमें ईरान में सत्ता परिवर्तन देखना होगा।”

यह घटना भारत-इज़राइल संबंधों पर भी सवाल उठा रही है। कुछ विपक्षी दलों ने पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल किए हैं, जबकि सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलीं कि मोदी का दौरा युद्ध को ‘पॉज’ करने के लिए था। इज़राइल ने इन अफवाहों का खंडन किया है।

भारत की स्थिति क्या है?

  • भारत ने हमेशा शांति और संवाद की वकालत की है। पीएम मोदी ने मध्य पूर्व संकट पर गहरी चिंता जताई
  • और बातचीत के जरिए समाधान की अपील की। भारत के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है
  • क्योंकि ईरान से तेल आयात और क्षेत्रीय स्थिरता महत्वपूर्ण है
  • वहीं इज़राइल भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार है।

आगे क्या होगा?

  • यह युद्ध कितने दिनों तक चलेगा, यह कहना मुश्किल है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा
  • कि यह “कुछ हफ्तों” का अभियान है, लेकिन ईरान के जवाबी हमलों से स्थिति और जटिल हो गई है।
  • दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

यह घटना दिखाती है कि भू-राजनीति कितनी तेजी से बदल सकती है। इज़राइल-अमेरिका का यह कदम ईरान के “अस्तित्वगत खतरे” को खत्म करने का प्रयास है, लेकिन इससे नया संघर्ष जन्म ले सकता है।

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