राज्यसभा चुनाव 2026 में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 37 सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में भाजपा ने विपक्षी दलों के गठबंधन को बिगाड़ने की रणनीति अपनाई है। खासकर ओडिशा और हरियाणा में निर्दलीय उम्मीदवारों के जरिए सेंधमारी की जा रही है, जिससे कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगने की आशंका है। बिहार में भी एनडीए मजबूत स्थिति में है, जबकि ओडिशा में चौथी सीट पर कड़ा मुकाबला है।
राज्यसभा चुनाव की मुख्य सीटें और स्थिति
इस बार कुल 37 राज्यसभा सीटों में से केवल तीन राज्यों—बिहार (5 सीटें), ओडिशा (4 सीटें) और हरियाणा (2 सीटें)—में मतदान होगा। बाकी राज्यों में उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर होने से निर्विरोध चुनाव लगभग तय है।

ओडिशा में बड़ा खेल: यहां भाजपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है, जबकि बीजद को एक सीट मिलने की संभावना है। लेकिन चौथी सीट पर भाजपा समर्थित निर्दलीय दिलीप राय और बीजद के दत्तेश्वर होता के बीच सीधा मुकाबला है। जीत के लिए 30 वोट जरूरी हैं।
- भाजपा के पास 79 विधायक + 3 निर्दलीय = कुल 82 समर्थन।
- तीसरे प्रत्याशी के लिए 22 वोट बचे, दिलीप राय को 8 और वोट चाहिए।
- बीजद के 48 विधायक हैं, उसे दूसरी सीट के लिए 12 वोट चाहिए। कांग्रेस के 14 और माकपा के 1 विधायक का समर्थन ही बीजद को बचा सकता है। भाजपा की यह रणनीति विपक्ष के समीकरण को पूरी तरह बिगाड़ सकती है।
हरियाणा में कांग्रेस को खतरा:
- यहां दो सीटों पर भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध मुख्य उम्मीदवार हैं।
- लेकिन निर्दलीय सतीश नांदल ने नामांकन कर दिया है। नांदल पहले भाजपा से भूपेंद्र हुड्डा
- के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं। भाजपा उन्हें उतारकर कांग्रेस में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है।
- कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, उम्मीदवार को 31 वोट चाहिए।
- लेकिन क्रॉस वोटिंग का खतरा बना हुआ है, जैसा 2016 और 2022 में हुआ था। यह कांग्रेस के लिए लगातार तीसरा बड़ा झटका साबित हो सकता है।
बिहार में एनडीए मजबूत:
- यहां पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद राज्यसभा जा रहे हैं
- जिससे एनडीए में हलचल है। एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जीत के लिए 41 वोट चाहिए।
- भाजपा और जद(यू) के दो-दो उम्मीदवार आसानी से जीत जाएंगे।
- एनडीए के उपेंद्र कुशवाहा और राजद के अमरेंद्र धारी सिंह के बीच मुकाबला है।
- राजद को 6 और वोट चाहिए, जबकि बसपा का 1 और एआईएमआईएम के 5 विधायकों का वोट निर्णायक हो सकता है।
विपक्ष पर असर और भाजपा की रणनीति
- भाजपा ने ओडिशा में बीजद-कांग्रेस गठजोड़ को तोड़ने और हरियाणा में कांग्रेस को कमजोर करने की कोशिश की है।
- निर्दलीय उम्मीदवारों के जरिए क्रॉस वोटिंग को बढ़ावा देकर विपक्ष का मनोबल तोड़ा जा रहा है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव के बाद राज्यसभा में एनडीए की स्थिति और मजबूत हो सकती है
- जबकि इंडिया गठबंधन को 4-5 सीटों का नुकसान हो सकता है।
- कांग्रेस पहले से ही कई राज्यों में कमजोर है। हरियाणा में क्रॉस वोटिंग और ओडिशा में बीजद की
- हार से पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लग सकता है। यह चुनाव न सिर्फ सीटें तय करेगा
- बल्कि आने वाले समय में राज्यसभा का समीकरण भी बदल देगा।
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि भाजपा की यह मास्टर स्ट्रोक विपक्ष के लिए बड़ा सबक है। क्या कांग्रेस इस बार क्रॉस वोटिंग रोक पाएगी? या फिर फिर से झटका खाएगी? 16 मार्च को नतीजे सब कुछ साफ कर देंगे।