अमेरिका ईरान युद्ध : हिंद महासागर में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी नौसेना ने श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास ईरानी फ्रिगेट आईआरआईएस देना (IRIS Dena) को टॉरपीडो से हमला करके डुबो दिया। यह घटना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका द्वारा किसी दुश्मन युद्धपोत को पनडुब्बी से डुबोने की पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इसे “शांत मौत” (Quiet Death) करार दिया। इस हमले में 87 से अधिक ईरानी नाविक मारे गए, जबकि श्रीलंकाई नौसेना ने 32 घायल नाविकों को बचा लिया।
घटना का पूरा विवरण
4 मार्च 2026 को हिंद महासागर में श्रीलंका के गाले शहर से लगभग 19-20 समुद्री मील दूर यह हमला हुआ। आईआरआईएस देना ईरान की आधुनिक माउज क्लास फ्रिगेट थी, जो हाल ही में भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास MILAN 2026 में भाग लेकर ईरान वापस लौट रही थी। जहाज पर करीब 130-180 नाविक सवार थे। अमेरिकी लॉस एंजिल्स क्लास पनडुब्बी ने मार्क-48 टॉरपीडो से जहाज के स्टर्न (पीछे के हिस्से) पर हमला किया, जिससे जहाज में भयंकर विस्फोट हुआ और वह जल्दी ही डूब गया।

पेंटागन ने हमले का पेरिस्कोप वीडियो जारी किया, जिसमें जहाज के डूबने के दृश्य साफ दिख रहे हैं। श्रीलंकाई नौसेना और वायुसेना ने डिस्ट्रेस कॉल मिलने पर तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। उन्होंने तेल की परतें, खाली लाइफ राफ्ट और दर्जनों शव पानी में तैरते पाए। बचाए गए 32 नाविकों को श्रीलंका के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
ट्रंप प्रशासन का दबाव और श्रीलंका पर असर
- हमले के बाद अमेरिका ने श्रीलंका पर कूटनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। एक अन्य ईरानी जहाज
- आईआरआईएस बुशहर के 208 चालक दल सदस्यों को श्रीलंका ने उतार लिया है और उन्हें
- नौसेना शिविर में रखा गया है। अमेरिकी विदेश विभाग की आंतरिक रिपोर्ट्स के अनुसार
- अमेरिकी दूतावास श्रीलंका सरकार से कह रहा है कि इन नाविकों को ईरान वापस न भेजा जाए
- ताकि तेहरान इसका प्रोपेगैंडा न कर सके। कुछ रिपोर्ट्स में पाला बदलवाने (defection) की कोशिशों का भी जिक्र है।
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा है कि यह उनकी मानवीय जिम्मेदारी है कि वे इन लोगों की मदद करें। ईरान ने मारे गए नाविकों के शव वापस मांगे हैं, लेकिन अभी कोई समयसीमा तय नहीं हुई है।
ईरान की तीखी प्रतिक्रिया!
- ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इसे “समुद्र में क्रूरता” बताया और चेतावनी दी
- कि अमेरिका इसकी “भारी कीमत” चुकाएगा। उन्होंने कहा, “यह जहाज भारत की नौसेना का मेहमान था
- इसे बिना चेतावनी के डुबोया गया।” ईरान ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय जल में हमला करने का आरोप लगाया
- और कहा कि यह पूर्वाग्रह की शुरुआत है।
वैश्विक प्रभाव और भारत का कनेक्शन
- यह घटना अमेरिका-ईरान युद्ध के विस्तार को दिखाती है, जो अब मिडिल ईस्ट से हिंद महासागर तक फैल गया है।
- ट्रंप प्रशासन ने ईरान की नौसेना को पूरी तरह खत्म करने को युद्ध का प्रमुख लक्ष्य बताया है।
- भारत के संदर्भ में सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका ने भारत से मिली जानकारी का इस्तेमाल किया
- क्योंकि जहाज भारत से लौट रहा था। हालांकि, भारत ने अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
यह हमला वैश्विक समुद्री सुरक्षा, तेल व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहरा असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे हिंद महासागर में नई समुद्री जंग शुरू हो सकती है।