ममता बनर्जी : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में घमासान मचा हुआ है। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने लोकसभा में काकोली घोष दस्तीदार की जगह कल्याण बनर्जी को मुख्य सचेतक (Chief Whip) बनाकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। कई महिला सांसदों ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया है। पार्टी में टूट का खतरा मंडराने लगा है।
क्या है पूरा मामला?
15 मई 2026 को ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर TMC सांसदों की अंदरूनी बैठक हुई। इसी बैठक में कल्याण बनर्जी की नियुक्ति की घोषणा की गई। लोकसभा में TMC के 28 सांसद हैं, जिनमें 11 महिलाएं हैं। इनमें से कई महिला सांसद इस फैसले से नाराज बताई जा रही हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कल्याण बनर्जी पर महिला सांसदों के साथ बदसलूकी के आरोप लगते रहे हैं। यही वजह है कि पार्टी में बगावत की आंच तेज हो गई है।
ममता बनर्जी पुराना विवाद क्यों ताजा हो गया?
पिछले साल लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा के साथ कल्याण बनर्जी की सार्वजनिक बहस हो गई थी। महुआ मोइत्रा ने कल्याण बनर्जी की पिनाकी मिश्रा (उनके पति) की शादी पर की गई विवादित टिप्पणियों पर तीखा हमला बोला था। महुआ ने कहा था –
“आप सूअर से कुश्ती नहीं लड़ते। क्योंकि सूअर को इसमें मजा आता है और आप गंदे हो जाते हैं। भारत में ऐसे पुरुष हैं जो गहरे तौर पर स्त्री-द्वेषी, यौन रूप से कुंठित और पतित हैं…”
- इस विवाद के बाद कल्याण बनर्जी ने चीफ व्हिप पद से इस्तीफा दे दिया था।
- अब उन्हें दोबारा उसी पद पर लाकर ममता बनर्जी ने पुरानी जख्मों को हरा दिया है।
TMC में क्यों मचा बवाल?
- महिला सांसदों का गुस्सा: 11 महिला सांसदों में से कई इस फैसले के खिलाफ हैं।
- पार्टी की हालत: विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC पहले से कमजोर है। ऐसे में आंतरिक कलह पार्टी को और नुकसान पहुंचा सकती है।
- भाजपा का फायदा: विपक्षी भाजपा इस विवाद को TMC की कमजोरी के रूप में पेश कर रही है।
कल्याण बनर्जी TMC के मुखर चेहरों में से एक हैं। वे वकील भी हैं और हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट में ममता बनर्जी के साथ पोस्ट-पोल वायलेंस मामले में सक्रिय रहे। ममता ने उन्हें “लॉयल और आक्रामक” नेता बताया है, लेकिन पार्टी के अंदर यह फैसला पसंद नहीं किया जा रहा।
TMC की वर्तमान स्थिति
- लोकसभा में TMC के 28 सांसद
- राज्यसभा में भी अपनी ताकत बनाए रखने की कोशिश
- अभिषेक बनर्जी लोकसभा में पार्टी लीडर बने हुए हैं
- शताब्दी रॉय डिप्टी लीडर हैं
ममता बनर्जी इस री-शफल को पार्टी को नई दिशा देने की कोशिश बता रही हैं, लेकिन अंदरूनी असंतोष साफ दिख रहा है।
क्या हो सकता है आगे?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर ममता बनर्जी इस मुद्दे को जल्दी सुलझाती नहीं हैं तो कई सांसद बागी रुख अपना सकते हैं। कुछ सांसद पार्टी छोड़ने या निर्दलीय होने की भी बात कर रहे हैं। TMC में यह पहला बड़ा टूट का संकेत माना जा रहा है।
महिला नेतृत्व वाली पार्टी में महिला सांसदों की नाराजगी ममता के लिए बड़ी चुनौती है।
Pros और Cons (TMC के नजरिए से)
Pros:
- कल्याण बनर्जी आक्रामक और वफादार नेता
- संसद में मजबूत पैरवी करने की क्षमता
- ममता की पसंदीदा टीम में शामिल
Cons:
- पुराने विवाद फिर से उभर आए
- महिला सांसदों में असंतोष
- पार्टी टूटने का खतरा
- चुनाव हार के बाद और कमजोरी
ममता बनर्जी की TMC में कल्याण बनर्जी की वापसी पार्टी के लिए दोधारी तलवार साबित हो सकती है। एक तरफ आक्रामक नेतृत्व, दूसरी तरफ आंतरिक कलह। पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC की सत्ता 15 साल बाद चली गई है। अब संसद में भी अगर पार्टी टूटी तो ममता के लिए मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
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