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राजस्थान हाईकोर्ट विवाद के कार्यवाहक चीफ जस्टिस पर शिकायत CJI सूर्यकांत ने मांगा जवाब जानें पूरा मामला!

On: August 27, 2026 3:34 AM
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राजस्थान हाईकोर्ट विवाद राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता द्वारा की गई शिकायत के बाद न्यायपालिका में मामला चर्चा में है। जस्टिस मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को पत्र लिखकर जस्टिस शर्मा को राजस्थान से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की थी। अब CJI सूर्यकांत ने इस मामले में जस्टिस शर्मा से जवाब मांगा है।

राजस्थान हाईकोर्ट विवाद
राजस्थान हाईकोर्ट विवाद हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस पर शिकायत का मामला।

जस्टिस संदीप मेहता ने क्या शिकायत की?

रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने अगस्त महीने में CJI सूर्यकांत को तीन पत्र लिखे। ये पत्र 2 अगस्त, 10 अगस्त और 17 अगस्त को भेजे गए थे। इनमें राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को हटाकर किसी दूसरे हाईकोर्ट से नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की मांग की गई।

  • जस्टिस मेहता ने अपनी शिकायतों में राजस्थान हाईकोर्ट के प्रशासन और न्यायिक कामकाज
  • को लेकर गंभीर चिंताएं जताईं। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने केसों की लिस्टिंग
  • में कथित हस्तक्षेप, प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग और पक्षपात जैसे आरोप लगाए हैं।
  • यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये शिकायत में लगाए गए आरोप हैं
  • और इन्हें अभी साबित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।

तीन पत्रों के बाद क्यों बढ़ा मामला?

#जस्टिस मेहता ने लगातार तीन पत्रों के माध्यम से अपनी चिंताएं CJI के सामने रखीं। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट में नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति की जरूरत पर भी जोर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस शर्मा करीब 10 महीने से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पद पर हैं और सितंबर 2026 में उनके सेवानिवृत्त होने की बात सामने आई है।

जस्टिस मेहता ने कथित तौर पर यह भी सवाल उठाया कि उनकी बार-बार की गई शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है।

जस्टिस शर्मा पर लगाए गए आरोप क्या हैं?

  • रिपोर्टों में जस्टिस मेहता की शिकायत के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने
  • जस्टिस शर्मा के नेतृत्व और हाईकोर्ट के प्रशासनिक कामकाज को लेकर सवाल उठाए हैं।
  • इनमें कथित कुप्रबंधन, केस लिस्टिंग में हस्तक्षेप, प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग और पक्षपात जैसे आरोप शामिल हैं।
  • कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि शिकायत में प्रभावशाली पक्षकारों के पक्ष
  • में केसों की लिस्टिंग को प्रभावित करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
  • हालांकि इन सभी आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष तभी निकाला जा सकता है जब संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो।

राजस्थान हाईकोर्ट विवाद CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?

  • इस विवाद के बीच CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि किसी जज के खिलाफ लगाए गए
  • आरोपों पर फैसला सार्वजनिक मंच या मीडिया में नहीं किया जा सकता। उन्होंने
  • कहा कि संबंधित जज को आरोपों पर अपना पक्ष रखने का पूरा और उचित अवसर दिया जाना चाहिए।

CJI के अनुसार केवल किसी जज पर आरोप लगाए जाने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आरोप सही साबित हो गए हैं। मामले में शिकायत से संबंधित सामग्री और जस्टिस शर्मा के जवाब को उचित संस्थागत प्रक्रिया के तहत देखा जाएगा।

शिकायत पर आगे क्या हो सकता है?

ऐसे मामलों में न्यायपालिका की अपनी स्थापित संस्थागत प्रक्रिया होती है। शिकायत मिलने के बाद संबंधित न्यायाधीश से जवाब मांगा जा सकता है। यदि जवाब और उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामला गंभीर पाया जाता है, तो आगे की प्रक्रिया के तहत उचित स्तर पर जांच या प्रशासनिक निर्णय लिया जा सकता है।

CJI सूर्यकांत ने भी इसी प्रक्रिया पर जोर दिया है। उनका कहना है कि जजों से संबंधित शिकायतों का फैसला मीडिया में सामने आने वाले अलग-अलग दावों के आधार पर नहीं किया जा सकता।

राजस्थान हाईकोर्ट में नियमित चीफ जस्टिस की मांग

  • जस्टिस मेहता की शिकायत में राजस्थान हाईकोर्ट के लिए नियमित मुख्य न्यायाधीश
  • नियुक्त करने की मांग भी शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने किसी अन्य
  • हाईकोर्ट से चीफ जस्टिस को राजस्थान हाईकोर्ट भेजने का अनुरोध किया है।
  • CJI सूर्यकांत ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम विभिन्न हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों
  • की नियुक्ति को लेकर काम कर रहा है। ऐसे में राजस्थान हाईकोर्ट में नियमित
  • चीफ जस्टिस की नियुक्ति का मुद्दा भी व्यापक न्यायिक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

जस्टिस शर्मा को जवाब देने का मौका क्यों जरूरी?

किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आरोप लगने के बाद निष्पक्ष प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। CJI सूर्यकांत का जोर इसी बात पर है कि शिकायतकर्ता की बात सुनने के साथ-साथ जिस जज के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं, उसका पक्ष भी सुना जाना चाहिए।

इससे किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले दोनों पक्षों की जानकारी और उपलब्ध सामग्री का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सकेगा।

राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता की शिकायत के बाद मामला अब CJI सूर्यकांत के स्तर तक पहुंच गया है। जस्टिस मेहता ने जस्टिस शर्मा के तबादले और राजस्थान हाईकोर्ट में नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति की मांग की है।

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