वेणुगोपाल बनेंगे कांग्रेस अध्यक्ष कांग्रेस पार्टी में एक बार फिर हलचल मची हुई है। कर्नाटक में सत्ता संभाल रहे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं। क्या केसी वेणुगोपाल कांग्रेस के नए अध्यक्ष बनेंगे? क्या मल्लिकार्जुन खरगे कर्नाटक के मुख्यमंत्री बन सकते हैं? सिद्धारमैया का प्लान क्या है? आइए इस पूरी राजनीतिक कवायद को विस्तार से समझते हैं।
2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच एक अनकही समझौता किया था। सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने और यह माना गया कि आधे कार्यकाल के बाद नेतृत्व शिवकुमार को सौंप दिया जाएगा। अब 2026 में पार्टी हाईकमान इस वादे को पूरा करने का दबाव महसूस कर रहा है।

सिद्धारमैया-शिवकुमार विवाद: 2023 का वादा फिर जिंदा
हाल ही में दिल्ली में लंबी बैठकें हुईं, जिनमें मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला, सिद्धारमैया और शिवकुमार शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया को राज्यसभा सीट और राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा पद देने का प्रस्ताव दिया गया है।
वेणुगोपाल को अध्यक्ष बनाने की रणनीति
कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की चर्चा जोरों पर है। अगर सिद्धारमैया राष्ट्रीय भूमिका में जाते हैं तो केसी वेणुगोपाल को पार्टी अध्यक्ष बनाने का रास्ता साफ हो सकता है। वेणुगोपाल दक्षिण भारत से हैं, संगठन में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है और वे राहुल गांधी के करीबी भी हैं।
यह बदलाव कांग्रेस को नई ऊर्जा और युवा चेहरा देने की कोशिश का हिस्सा लगता है, खासकर 2029 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए।
वेणुगोपाल बनेंगे कांग्रेस अध्यक्ष खरगे कर्नाटक CM बन सकते हैं?
एक और दिलचस्प कयास यह है कि अगर सिद्धारमैया हटते हैं तो मल्लिकार्जुन खरगे को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। खरगे कर्नाटक के मूल निवासी हैं और दलित चेहरे के रूप में उनका कद काफी बड़ा है। यह विकल्प शिवकुमार बनाम सिद्धारमैया गुट के बीच समझौते के रूप में देखा जा रहा है।
खरगे के मुख्यमंत्री बनने से:
- पार्टी में वरिष्ठता का सम्मान बना रहेगा
- ओबीसी और दलित वोट बैंक को मजबूती मिलेगी
- शिवकुमार को बाद में नेतृत्व सौंपने का विकल्प खुला रहेगा
सिद्धारमैया का प्लान क्या है?
- सिद्धारमैया 77 वर्षीय अनुभवी नेता हैं। उन्होंने अपने वफादार मंत्रियों और विधायकों
- से बेंगलुरु में बैठक की है। वे पूरी तरह से हटने के पक्ष में नहीं दिख रहे
- लेकिन हाईकमान के दबाव को नजरअंदाज भी नहीं कर सकते।
संभावित प्लान:
- राज्यसभा जाना और राष्ट्रीय संगठन में भूमिका
- कर्नाटक में अपनी छवि AHINDA (अल्पसंख्यक, हिंदू पिछड़े और दलित) के संरक्षक के रूप में बनाए रखना
- अगर खरगे CM बनते हैं तो उनका समर्थन करना
कर्नाटक कांग्रेस पर क्या असर पड़ेगा?
कर्नाटक कांग्रेस में यह बदलाव काफी संवेदनशील है। सिद्धारमैया की लोकप्रियता AHINDA समुदायों में बहुत ज्यादा है। अगर उनका अपमान हुआ तो पार्टी को नुकसान हो सकता है। वहीं शिवकुमार लिंगायत और वokkaliga समुदायों में मजबूत हैं।
पार्टी को संतुलन बनाना होगा ताकि 2028 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों में कोई नुकसान न हो।
कांग्रेस की राष्ट्रीय रणनीति
यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ कर्नाटक तक सीमित नहीं है। कांग्रेस 2024 के चुनावों के बाद संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी के नेतृत्व में युवा नेताओं को आगे लाने और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिशें जारी हैं।
केसी वेणुगोपाल को अध्यक्ष बनाना दक्षिण भारत पर फोकस बढ़ाने का संकेत है।
अभी सब कुछ अटकलों पर आधारित है। सिद्धारमैया आज या कल कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं। कांग्रेस हाईकमान इस मुद्दे को बहुत संभलकर संभाल रहा है क्योंकि कर्नाटक उसका एकमात्र बड़ा राज्य है जहां वह सत्ता में है।