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21 जुलाई शहीद दिवस का इतिहास TMC क्यों मनाती है शहीद दिवस? जानिए 1993 की पूरी कहानी!

On: July 15, 2026 4:19 AM
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21 जुलाई शहीद दिवस हर वर्ष 21 जुलाई पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बेहद महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन तृणमूल कांग्रेस (TMC) ‘शहीद दिवस’ के रूप में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करती है। वर्ष 2026 में यह आयोजन इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पार्टी के भीतर विभाजन के बाद पहली बार इस दिवस को लेकर अलग-अलग गुटों के बीच राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है।

लेकिन आखिर 21 जुलाई शहीद दिवस की शुरुआत कैसे हुई? इस दिन ऐसा क्या हुआ था जिसने पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा बदल दी? आइए विस्तार से जानते हैं।

21 जुलाई शहीद दिवस पर TMC की शहीद दिवस रैली
21 जुलाई शहीद दिवस कोलकाता में हुए गोलीकांड में शहीद हुए लोगों की याद में TMC हर वर्ष 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाती है।

21 जुलाई 1993 को क्या हुआ था?

#21 जुलाई 1993 को उस समय की युवा कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने कोलकाता में एक बड़े विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि चुनावों में मतदाताओं की पहचान के लिए फोटो वोटर आईडी कार्ड को अनिवार्य बनाया जाए ताकि चुनाव में धांधली रोकी जा सके।

  • यह विरोध मार्च कोलकाता के राइटर्स बिल्डिंग की ओर बढ़ रहा था। प्रदर्शन के दौरान
  • पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, जिसके बाद पुलिस ने गोलीबारी की।
  • इस घटना में 13 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए।
  • यही घटना आगे चलकर पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक ऐतिहासिक मोड़ बन गई।

TMC क्यों मनाती है शहीद दिवस?

  • 1998 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थापना की।
  • इसके बाद उन्होंने 21 जुलाई को पुलिस फायरिंग में मारे गए 13 लोगों की याद में हर साल ‘शहीद दिवस’ मनाना शुरू किया।
  • आज यह दिन केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं बल्कि TMC के सबसे बड़े राजनीतिक
  • शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जाता है। कोलकाता में लाखों कार्यकर्ता
  • इस रैली में शामिल होते हैं और पार्टी की भविष्य की राजनीतिक रणनीति का संदेश भी इसी मंच से दिया जाता है।

21 जुलाई शहीद दिवस 2026 में क्यों बढ़ गई है चर्चा?

  • इस वर्ष 21 जुलाई का शहीद दिवस पहले की तुलना में अधिक चर्चा में है
  • क्योंकि TMC में आंतरिक विभाजन के बाद पार्टी के दोनों गुट इस कार्यक्रम को लेकर आमने-सामने हैं।
  • रिपोर्टों के अनुसार, बागी गुट ने भी इस आयोजन पर अपना दावा जताया है।
  • वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला मुख्य गुट इसे अपनी राजनीतिक विरासत का हिस्सा मानता है।
  • दोनों पक्षों द्वारा अलग-अलग कार्यक्रमों की तैयारी और प्रशासनिक अनुमति को लेकर विवाद भी सामने आया है।

राजनीतिक महत्व क्या है?

21 जुलाई का शहीद दिवस पश्चिम बंगाल की राजनीति में केवल एक स्मृति दिवस नहीं है। इसे कई राजनीतिक विश्लेषक राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन मानते हैं।

इस मंच से अक्सर पार्टी आगामी चुनावों की रणनीति, संगठनात्मक बदलाव और केंद्र सरकार सहित विभिन्न मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट करती है। इसलिए पूरे देश की राजनीतिक नजरें भी इस कार्यक्रम पर बनी रहती हैं।

इस दिन को लेकर विवाद भी रहे हैं!

  • जहां TMC इस दिन को लोकतांत्रिक आंदोलन के शहीदों की याद के रूप में देखती है
  • वहीं विपक्ष के कई दल इसे अलग नजरिए से देखते हैं। विपक्ष का कहना है
  • कि इस घटना की राजनीतिक व्याख्या अलग-अलग तरीके से की जाती रही है।
  • हाल के वर्षों में कार्यक्रम की अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था और आयोजन स्थल को लेकर
  • भी कई बार विवाद सामने आए हैं। वर्ष 2026 में भी प्रशासनिक अनुमति
  • और रैली के आयोजन को लेकर कानूनी व राजनीतिक बहस जारी है।

21 जुलाई का ऐतिहासिक संदेश

1993 की घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया। इसी घटना के बाद ममता बनर्जी की राजनीतिक पहचान मजबूत हुई और आगे चलकर उन्होंने राज्य की सत्ता तक का सफर तय किया।

  • आज भी 21 जुलाई को लाखों कार्यकर्ता उन लोगों को श्रद्धांजलि देते हैं
  • जिनकी मृत्यु उस आंदोलन के दौरान हुई थी। यह दिन लोकतांत्रिक अधिकारों
  • राजनीतिक संघर्ष और जन आंदोलनों की याद दिलाने वाला महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।

21 जुलाई शहीद दिवस केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना की याद है। 1993 की गोलीबारी ने राज्य की राजनीति की दिशा बदल दी और ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर में निर्णायक भूमिका निभाई। वर्ष 2026 में पार्टी के भीतर बदले राजनीतिक समीकरणों के कारण यह आयोजन फिर से राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है।

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