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TMC कांग्रेस विवाद ममता बनर्जी को कांग्रेस छोड़ने की गलती स्वीकार करनी चाहिए? कांग्रेस नेता के बयान से सियासत गरम!

On: July 15, 2026 4:31 AM
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पTMC कांग्रेस विवाद श्चिम बंगाल की राजनीति में 21 जुलाई शहीद दिवस से पहले सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। इस बीच प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि ममता बनर्जी सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार कर लें कि लगभग तीन दशक पहले कांग्रेस छोड़ना उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक गलती थी, तो उन्हें कांग्रेस के शहीद दिवस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जा सकता है। यह बयान सामने आते ही बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।

TMC कांग्रेस विवाद पर ममता बनर्जी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी
TMC कांग्रेस विवाद कांग्रेस नेता के बयान के बाद TMC और कांग्रेस के बीच सियासी विवाद तेज हो गया है। 21 जुलाई शहीद दिवस से पहले यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

TMC कांग्रेस विवाद क्या है पूरा मामला?

पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने 21 जुलाई को आयोजित होने वाले अपने शहीद दिवस कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान कहा कि 1993 के आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत कांग्रेस की है। पार्टी का कहना है कि ममता बनर्जी यदि कांग्रेस छोड़ने के अपने फैसले को गलती मानती हैं, तभी उनकी वापसी या साझा मंच पर आने की बात सार्थक होगी।

  • कांग्रेस नेताओं का मानना है कि 1993 का आंदोलन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • के बैनर तले हुआ था और उस समय ममता बनर्जी कांग्रेस की युवा नेता थीं।
  • इसलिए इस आंदोलन के इतिहास को बदला नहीं जा सकता।

21 जुलाई शहीद दिवस क्यों है महत्वपूर्ण?

21 जुलाई 1993 को कोलकाता में फोटो वोटर आईडी कार्ड को अनिवार्य बनाने की मांग को लेकर एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया गया था। उस समय प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ, जिसके बाद पुलिस फायरिंग में 13 लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया।

बाद में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर 1998 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का गठन किया और तब से हर वर्ष 21 जुलाई को शहीद दिवस के रूप में बड़े पैमाने पर रैली आयोजित की जाती है।

कांग्रेस ने ऐसा बयान क्यों दिया?

  • राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस बयान के जरिए यह संदेश देना चाहती है
  • कि 21 जुलाई आंदोलन की मूल पहचान कांग्रेस से जुड़ी हुई है। पार्टी का दावा है
  • कि ममता बनर्जी ने कांग्रेस छोड़ने के बाद इस आंदोलन को अपनी पार्टी की पहचान बना लिया।
  • कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि ममता बनर्जी वास्तव में इस आंदोलन की भावना का सम्मान करती हैं
  • तो उन्हें पहले यह स्वीकार करना चाहिए कि कांग्रेस से अलग होना एक राजनीतिक भूल थी।

क्या ममता बनर्जी ने दी कोई प्रतिक्रिया?

  • समाचार लिखे जाने तक ममता बनर्जी की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक
  • प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस लगातार यह कहती रही है
  • कि 21 जुलाई शहीद दिवस पार्टी के संघर्ष और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक है।
  • राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है।

बंगाल की राजनीति पर क्या होगा असर?

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के संबंध लंबे समय से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। कभी दोनों दल साथ रहे, तो कभी एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे।

  • ऐसे समय में कांग्रेस का यह बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं
  • बल्कि बंगाल की बदलती राजनीति में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश के
  • रूप में भी देखा जा रहा है। दूसरी ओर, TMC अपने संगठन
  • और शहीद दिवस रैली को लेकर पूरी तैयारी में जुटी हुई है।

क्या दोनों दल फिर साथ आ सकते हैं?

  • राजनीतिक समीकरण समय के साथ बदलते रहते हैं। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों
  • में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच मतभेद स्पष्ट दिखाई देते हैं
  • लेकिन भविष्य की राजनीति में किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
  • फिलहाल कांग्रेस का रुख साफ है कि इतिहास को बदला नहीं जा सकता और 1993 के
  • आंदोलन की पहचान कांग्रेस से जुड़ी हुई है। वहीं TMC इसे अपने राजनीतिक संघर्ष का सबसे बड़ा प्रतीक मानती है।

21 जुलाई शहीद दिवस से पहले कांग्रेस द्वारा दिया गया यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस का कारण बन गया है। कांग्रेस चाहती है कि ममता बनर्जी सार्वजनिक रूप से कांग्रेस छोड़ने के फैसले को गलती मानें, जबकि TMC इस पूरे आंदोलन को अपने राजनीतिक इतिहास का अहम हिस्सा बताती है। आने वाले दिनों में दोनों दलों की प्रतिक्रियाएं इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला सकती हैं।

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