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दिल्ली दंगे केस सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज की, 5 सह-आरोपियों को मिली राहत

On: January 5, 2026 8:29 AM
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दिल्ली दंगे केस : सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। 5 जनवरी 2026 को जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी खारिज कर दी, जबकि पांच अन्य आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी। यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट के सितंबर 2025 के आदेश के खिलाफ अपील पर आया है। आइए जानते हैं दिल्ली दंगे केस लेटेस्ट अपडेट और कोर्ट के मुख्य तर्क।

दिल्ली दंगे 2020: मामला क्या है?

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए। दिल्ली पुलिस ने इसे सुनियोजित साजिश बताया, जिसमें UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया। पुलिस का दावा है कि यह प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश की एकता और आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डालने वाली साजिश थी। 753 FIR दर्ज हुईं, जिसमें उमर खालिद और शरजील इमाम को ‘मास्टरमाइंड’ बताया गया।

दिल्ली दंगे केस
दिल्ली दंगे केस

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: उमर खालिद और शरजील इमाम को क्यों नहीं मिली जमानत?

  • कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम अन्य आरोपियों से “गुणात्मक रूप से अलग” हैं।
  • उनकी भूमिका साजिश में केंद्रीय और प्रमुख थी।
  • UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत के लिए ऊंचा थ्रेशोल्ड है। प्रथम दृष्टया (प्राइमा फेसी) सबूतों से इन पर गंभीर आरोप साबित होते हैं।
  • जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा: “उमर खालिद और शरजील इमाम अभियोजन की कहानी और सबूतों में अन्य आरोपियों से अलग स्तर पर हैं। यह संरचनात्मक अंतर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”
  • कोर्ट ने लंबी हिरासत को आधार बनाकर जमानत देने से इनकार किया, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बड़े मुद्दे हैं।

उमर खालिद सितंबर 2020 से और शरजील इमाम जनवरी 2020 से जेल में हैं – करीब 6 साल हो चुके हैं।

इन 5 आरोपियों को क्यों मिली जमानत?

सुप्रीम कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को सशर्त बेल दी। कारण:

  • इनके खिलाफ आरोप सीमित और सहायक प्रकृति के हैं।
  • भूमिका केंद्रीय नहीं, बल्कि परिधीय थी।
  • कोर्ट ने कहा कि सभी आरोपियों को एक समान नहीं देखा जा सकता; हर केस अलग से जांचा जाना चाहिए।

कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

  • विरोध का अधिकार संवैधानिक है, लेकिन हिंसा और साजिश में बदलना बर्दाश्त नहीं।
  • UAPA के तहत जमानत में न्यायिक संयम जरूरी है, यह न्यायिक कर्तव्य का त्याग नहीं।
  • ट्रायल जल्द शुरू हो, इसलिए दिल्ली पुलिस को एक साल में गवाहों के बयान दर्ज करने का निर्देश।

आगे क्या? दिल्ली दंगे केस का भविष्य

यह फैसला UAPA मामलों में जमानत के सख्त प्रावधानों को मजबूत करता है। उमर खालिद और शरजील इमाम अब ट्रायल का इंतजार करेंगे। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आईं – BJP ने इसे ‘तुकड़े-तुकड़े गैंग’ पर झटका बताया, जबकि विपक्षी दल लंबी हिरासत पर सवाल उठा रहे हैं।

  • उमर खालिद शरजील इमाम जमानत न्यूज से जुड़े इस फैसले ने एक बार
  • फिर दिल्ली दंगों की चर्चा छेड़ दी है। ट्रायल कब शुरू होगा, यह देखना बाकी है।

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