ट्रंप की सख्त चेतावनी : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ होने वाली इस्लामाबाद टॉक्स 2026 से ठीक पहले साफ कर दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हर हाल में खुलवाया जाएगा। चाहे डील बने या न बने, यह महत्वपूर्ण जलमार्ग खुला रहेगा। ट्रंप ने यहां तक कहा कि इसके लिए सैन्य कार्रवाई भी की जा सकती है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर चल रहा है, लेकिन दोनों पक्ष आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।

#ट्रंप की सख्त चेतावनी रुख – “होर्मुज खुलना तय है!
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ईरान के पास अब “कोई कार्ड नहीं बचा” सिवाय अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का इस्तेमाल करके दुनिया से “छोटी अवधि की वसूली” के। उन्होंने कहा, “ईरानी नहीं समझ रहे कि उनके पास लड़ने के अलावा और कोई दांव नहीं है। उनकी नौसेना चली गई, वायुसेना चली गई, बड़े नेता चले गए, अब उनके पास बचा ही क्या है?”
- #ट्रंप का कहना है कि होर्मुज “ऑटोमैटिकली” खुल जाएगा क्योंकि ईरान को इससे पैसे कमाने हैं।
- अगर नहीं खुला तो अमेरिका इसे “खोल देगा”। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका खुद इस
- जलमार्ग का इस्तेमाल नहीं करता, दूसरे देश करते हैं, इसलिए अन्य देश भी इसमें मदद करेंगे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों इतना महत्वपूर्ण?
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है। यहां से दुनिया
- का करीब 20 प्रतिशत तेल व्यापार गुजरता है। अगर यह बंद रहता है
- तो वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
युद्ध के दौरान ईरान ने इस रास्ते पर नियंत्रण रखा, जिससे तेल सप्लाई प्रभावित हुई। अब ट्रंप इसे पूरी तरह खुलवाने पर अड़े हुए हैं।
इस्लामाबाद टॉक्स 2026 की तैयारी
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार को अमेरिका-ईरान वार्ता शुरू होने वाली है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी डेलिगेशन पहुंच चुका है।
ईरान की तरफ से प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं:
- संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ (बकर कलीबाफ)
- विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची
- रक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदियान
- केंद्रीय बैंक गवर्नर अब्दुलनासिर हेम्माती
- गालिबाफ ने पहले ही शर्त रखी है कि लेबनान में इजराइल के हमले बंद होने के बाद ही बातचीत शुरू होगी।
- जे.डी. वेंस ने कहा कि अगर ईरान “सद्भावना” (good faith) से बातचीत करेगा
- तो अमेरिका मदद का हाथ बढ़ाएगा। लेकिन अगर “बेवकूफ बनाने” की कोशिश की तो अमेरिका बर्दाश्त नहीं करेगा।
ईरान-अमेरिका युद्ध का संदर्भ
- फरवरी 2026 में शुरू हुए छह हफ्ते के युद्ध में ईरान को भारी नुकसान हुआ।
- अमेरिका-इजराइल के हमलों में कई टॉप नेता और सैन्य ठिकाने तबाह हो गए।
- उसके बाद दो हफ्ते का सीजफायर घोषित हुआ, लेकिन अब दोनों पक्ष उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं।
- ट्रंप का फोकस मुख्य रूप से ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम और होर्मुज को खुलवाने पर है।
आगे क्या होगा?
वार्ता में मुख्य मुद्दे हैं:
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलना
- ईरान की फ्रोजन एसेट्स रिलीज करना
- लेबनान में सीजफायर
- ईरान का मिसाइल और न्यूक्लियर कार्यक्रम
ट्रंप की सख्ती और ईरान की आंतरिक कलह (IRGC vs राजनीतिक नेता) के कारण वार्ता मुश्किल लग रही है। अगर सफल हुई तो मिडिल ईस्ट में तनाव कम हो सकता है, वरना तेल की कीमतें बढ़ने और नई जंग की आशंका बनी रहेगी।
भारत समेत कई देश इस वार्ता के नतीजे पर नजर रखे हुए हैं क्योंकि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
ट्रंप ने साफ संदेश दिया है – डील हो या ना हो, होर्मुज खुलकर रहेगा। अब देखना है कि इस्लामाबाद में क्या फैसला होता है। क्या ईरान अमेरिकी दबाव में कुछ समझौता करेगा या फिर तनाव और बढ़ेगा?
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