जयशंकर UAE दौरा 2026 : मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान तनाव के बीच दो सप्ताह के संघर्ष विराम (Ceasefire) की घोषणा के तुरंत बाद भारत सरकार ने अपनी कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 11-12 अप्रैल 2026 को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की यात्रा पर जा रहे हैं, जबकि केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी 9-10 अप्रैल को कतर के दो दिवसीय दौरे पर पहुंच चुके हैं।
इन्हें मोदी सरकार के दो धुरंधर कहा जा रहा है, जो LPG और LNG संकट को दूर करने के लिए सक्रिय हो गए हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर बनी अस्थिरता के कारण भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई थी। अब संघर्ष विराम का फायदा उठाकर भारत एलएनजी और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है।

LPG संकट की वजह क्या बनी?
फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुए ईरान से जुड़े संघर्ष में ईरान ने कतर एनर्जी के ठिकानों पर हमले किए थे। इससे कतर का गैस उत्पादन प्रभावित हुआ। कतर भारत को 40% से ज्यादा LNG और महत्वपूर्ण मात्रा में LPG की आपूर्ति करता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की आशंका से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता आई और भारत में भी LPG की कीमतों पर दबाव पड़ा।
- हालांकि केंद्र सरकार ने बार-बार स्पष्ट किया कि घरेलू बाजार में ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी गई।
- भारतीय ध्वज वाला जहाज ग्रीन आशा 5 अप्रैल को होर्मुज पार करके 9 अप्रैल को मुंबई पहुंच गया
- जो आपूर्ति की निरंतरता का संकेत था।
- कतर के साथ भारत ने 2048 तक के बड़े LNG सौदे किए हैं।
- इन सौदों को मजबूत रखना और संघर्ष विराम के बाद खेपों को प्राथमिकता से
- सुनिश्चित करना हरदीप पुरी के दौरे का मुख्य उद्देश्य है।
हरदीप पुरी का कतर दौरा: ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस
- हरदीप सिंह पुरी 9 अप्रैल को दोहा पहुंच चुके हैं। दो दिवसीय दौरे में वे कतर के ऊर्जा
- अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। चर्चा का केंद्र बिंदु LNG और LPG की आपूर्ति
- को तेज करना और भारत को प्राथमिकता देने का आश्वासन लेना है।
- कतर भारत का सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता है। संघर्ष के दौरान उत्पादन प्रभावित
- होने से कुछ खेपें रुकी थीं। अब ceasefire के बाद उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
- पुरी के दौरे से भारत चाहता है कि कतर एनर्जी भारत को पहले प्राथमिकता दे।
यह दौरा सिर्फ आपूर्ति तक सीमित नहीं है। द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने, भविष्य की ऊर्जा साझेदारी पर भी बात होगी।
जयशंकर UAE दौरा 2026 रणनीतिक साझेदारी और सुरक्षा
- विदेश मंत्री एस. जयशंकर 11-12 अप्रैल को UAE जाएंगे। यह दौरा मॉरिशस के
- बाद दूसरा चरण है। UAE भारत का चौथा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता है।
दौरे के दौरान UAE नेतृत्व के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा होगी। एजेंडे में शामिल होंगे:
- ऊर्जा सुरक्षा
- क्षेत्रीय स्थिरता
- व्यापार और निवेश
- सुरक्षा सहयोग
मिडिल ईस्ट में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता है। संघर्ष विराम के बाद व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए UAE की भूमिका अहम होगी। जयशंकर क्षेत्रीय विकास पर भी चर्चा करेंगे।
मोदी सरकार की रणनीति: सक्रिय कूटनीति से संकट प्रबंधन
- मोदी 2.0 सरकार ने मिडिल ईस्ट तनाव शुरू होते ही सक्रिय कदम उठाए।
- ऊर्जा मंत्री और विदेश मंत्री को क्षेत्र में भेजकर भारत ने दिखाया
- कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सबसे ऊपर रखता है।
- सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद घरेलू स्तर पर LPG और अन्य
- ईंधनों की उपलब्धता बनी रही। साथ ही induction cooktops जैसी वैकल्पिक
- तकनीकों को बढ़ावा देने की भी तैयारी है ताकि भविष्य में LPG पर निर्भरता कम हो।
ये दौरे सिर्फ तात्कालिक संकट समाधान नहीं, बल्कि लंबे समय तक खाड़ी देशों के साथ मजबूत संबंध बनाने की रणनीति का हिस्सा हैं।
क्या होगा आगे?
संघर्ष विराम अभी दो सप्ताह का है और स्थिति नाजुक बनी हुई है। अगर स्थायी शांति बनी तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह खुल जाएगा और ऊर्जा आपूर्ति सामान्य हो जाएगी।
भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए खाड़ी देशों से अच्छे संबंध बेहद जरूरी हैं। जयशंकर और हरदीप पुरी के इन दौरों से उम्मीद है कि LPG और LNG की आपूर्ति जल्द सामान्य हो जाएगी और घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रहेंगी।
आम नागरिकों को सलाह है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरी कदम उठा रही है।
मोदी सरकार के दो अनुभवी मंत्रियों – जयशंकर और हरदीप पुरी – ने मिडिल ईस्ट ceasefire का तुरंत फायदा उठाते हुए कूटनीतिक मोर्चा संभाल लिया है। LPG संकट को जड़ से दूर करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की यह मुहिम भारत की विदेश नीति की परिपक्वता को दर्शाती है।
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