महिला आरक्षण विधेयक : नई दिल्ली। कांग्रेस ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। पार्टी ने मांग की कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों पर ही महिलाओं को 33% आरक्षण तुरंत लागू किया जाए। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार परिसीमन की आड़ में महिलाओं के हक को रोके हुए है।
सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर “घड़ियाली आंसू” बहाने का आरोप लगाया और कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम पहले ही पास हो चुका है, अब सिर्फ शर्त हटाने की देरी है।

महिला आरक्षण विधेयक कांग्रेस की मुख्य मांग
कांग्रेस का साफ कहना है कि महिला आरक्षण विधेयक 21 सितंबर 2023 को संसद में सर्वसम्मति से पास हो चुका है और यह संविधान का हिस्सा बन गया है। अब इसे परिसीमन (delimitation) से जोड़ने की शर्त हटा दी जाए।
- सुप्रिया श्रीनेत ने एक कार्टून दिखाते हुए कहा, “प्रधानमंत्री के पास 543 आमों की टोकरी है
- लेकिन वे महिलाओं को एक तिहाई हिस्सा देने से इनकार कर रहे हैं। वे कह रहे हैं
- कि पहले आम बढ़ाकर 850 करो, फिर आरक्षण देंगे।”
- पार्टी ने मांग की कि वर्तमान लोकसभा में ही 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं।
- बाद में जनगणना और परिसीमन के बाद इसे बढ़ाया जा सकता है।
वर्तमान स्थिति में महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व!
कांग्रेस ने आंकड़े देकर सरकार को घेरा:
- लोकसभा में कुल 543 सीटों पर सिर्फ 31 महिला सांसद (लगभग 12%)।
- पूरे देश में 1,654 विधायकों में मात्र 164 महिलाएं (10% से भी कम)।
- भाजपा शासित 21 राज्यों में केवल एक महिला मुख्यमंत्री।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि महिलाओं का इतना कम प्रतिनिधित्व लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है।
17 अप्रैल का विवाद क्या था?
- 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में परिसीमन संबंधी विधेयक पास नहीं हो सका।
- कांग्रेस का दावा है कि यह महिला आरक्षण विधेयक नहीं, बल्कि परिसीमन विधेयक था।
- सरकार इसे परिसीमन से जोड़कर आरक्षण को 2029 या उसके बाद तक टाल रही है।
- सरकार का पक्ष है कि आरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए लोकसभा सीटों को
- बढ़ाकर 816 तक करने की जरूरत है, लेकिन कांग्रेस इसे बहाना बता रही है।
कांग्रेस का इतिहास और पुराना विरोध
- कांग्रेस ने याद दिलाया कि महिला आरक्षण का विचार सबसे पहले 1989 में दिवंगत राजीव गांधी
- ने दिया था। उस समय भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी, एलके आडवाणी
- जसवंत सिंह और राम जेठमलानी ने इसका विरोध किया था।
- सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “मोदी जी महिलाओं से माफी मांग रहे हैं तो सही मांग रहे हैं।
- मणिपुर, हाथरस, उन्नाव और बिलकीस बानो जैसे मामलों में महिलाओं के साथ जो हुआ
- उसके लिए माफी मांगनी चाहिए। महिलाएं अपमान नहीं भूलतीं।”
राजनीतिक प्रभाव!
कांग्रेस ने भाजपा मुख्यालय की ओर मार्च भी निकाला और तुरंत आरक्षण लागू करने की मांग की। यह मुद्दा 2026 के राजनीतिक माहौल में महिलाओं के वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर सरकार परिसीमन की शर्त हटाकर वर्तमान सदन में आरक्षण लागू करती है तो महिलाओं के सशक्तिकरण में बड़ा कदम होगा। लेकिन फिलहाल दोनों पक्ष अपनी बात पर अड़े हुए हैं।
कांग्रेस की मांग स्पष्ट है – लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों पर तुरंत 33% महिला आरक्षण लागू किया जाए। पार्टी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम पहले से पास है, अब सरकार की इच्छाशक्ति की कमी बाधा बन रही है।
महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाना लोकतंत्र को मजबूत करेगा। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या फैसला लेती है और महिलाओं को उनका हक कब मिलेगा।
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