हिमंत बिस्वा सरमा बयान : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार के दौरान एक जोरदार बयान दिया है। 16 अप्रैल 2026 को कूचबिहार में जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “जितने बांग्लादेशी मुसलमान हैं, लात मार-मारकर भगाऊंगा, किसी से डरते नहीं।”
सरमा ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य की सीमाओं को बांग्लादेश के साथ पूरी तरह खुला छोड़ रखा है, जिससे रोजाना बांग्लादेशी मुसलमान घुसपैठ कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार नहीं बनी तो एक दिन ये घुसपैठिए पूरे राज्य को हथिया लेंगे। यह बयान पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की आक्रामक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

हिमंत सरमा का पूरा बयान
जनसभा में हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “ममता बनर्जी ने बंगाल की सीमाओं को बांग्लादेश के साथ खोलकर रखा है। हर दिन बांग्लादेशी मुसलमान लोग बंगाल की सीमा से आते हैं। मैं असम से लात मारकर भगाता हूं, लेकिन वे फिर आ जाते हैं। इसलिए अगर भारत को बांग्लादेशी मुसलमानों से मुक्त करना है तो पश्चिम बंगाल में भी भाजपा सरकार चाहिए।”
- उन्होंने आगे कहा, “हमें ममता बनर्जी को बंगाल के मुख्यमंत्री पद से हटाना होगा
- अन्यथा एक दिन बांग्लादेशी मुसलमान हमसे यह राज्य छीन लेंगे। जैसे ही बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी
- हम इस क्षेत्र से सभी बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर कर देंगे।”
- सरमा ने उत्तर बंगाल में विकास न होने का भी आरोप लगाया और कहा कि भाजपा
- सत्ता में आने पर गोरखालैंड मुद्दे का संवैधानिक समाधान तलाशेगी और गोरखाओं के लिए न्याय सुनिश्चित करेगी।
हिमंत बिस्वा सरमा बयान असम में हिमंत की सख्त नीति
- असम के मुख्यमंत्री के रूप में हिमंत बिस्वा सरमा घुसपैठ के खिलाफ अपनी सख्त कार्रवाइयों
- के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि असम में वे बांग्लादेशी घुसपैठियों को लगातार
- बाहर निकाल रहे हैं, लेकिन समस्या की जड़ पश्चिम बंगाल की खुली सीमाओं में है।
- उनका कहना है कि बंगाल से घुसपैठ रुकने तक असम की लड़ाई अधूरी रहेगी।
- सरमा ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई बांग्लादेशी मुसलमानों से है
- न कि भारतीय मुसलमानों या असमिया मुसलमानों से।
तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया!
इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने 18 अप्रैल 2026 को निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज कराई। TMC ने आरोप लगाया कि हिमंत सरमा के बयान ध्रुवीकरण करने वाले, भड़काऊ और आपराधिक रूप से धमकी भरे हैं।
शिकायत में कहा गया कि ये बयान चुनाव आचार संहिता (MCC), भारतीय न्याय संहिता और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 का उल्लंघन करते हैं। TMC का दावा है कि ऐसे बयान सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकते हैं और शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करेंगे।
पृष्ठभूमि: बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा
- भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ लंबे समय से विवाद का विषय रही है।
- असम में NRC (National Register of Citizens) और CAA (Citizenship Amendment Act)
- जैसे कदम इसी समस्या से निपटने के लिए उठाए गए थे। हिमंत सरमा ने असम
- में घुसपैठ रोकने के लिए कई अभियान चलाए हैं, जिसमें अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार पर भाजपा लगातार यही आरोप लगाती रही है कि TMC बांग्लादेशी वोट बैंक के लिए सीमा सुरक्षा को कमजोर रख रही है। 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा प्रमुख चुनावी मुद्दा बनता दिख रहा है।
राजनीतिक प्रभाव और आगे क्या?
- हिमंत बिस्वा सरमा का यह आक्रामक बयान भाजपा की “घुसपैठ मुक्त भारत” की छवि
- को मजबूत करने की कोशिश है। उत्तर बंगाल में गोरखा समुदाय और
- हिंदू वोटरों को साधने की रणनीति भी साफ दिख रही है।
- दूसरी ओर, TMC इसे सांप्रदायिक राजनीति बता रही है और निर्वाचन आयोग से कार्रवाई की मांग कर रही है।
- अगर निर्वाचन आयोग कोई नोटिस जारी करता है तो यह विवाद और बढ़ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा न सिर्फ असम और बंगाल, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा और जनसांख्यिकीय बदलाव से जुड़ा है। केंद्र सरकार पहले ही सीमा पर फेंसिंग और सुरक्षा बढ़ाने के कदम उठा चुकी है, लेकिन राज्य स्तर पर राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी बताई जा रही है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का “लात मारकर भगाऊंगा” वाला बयान पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 को और गर्मा गया है। उन्होंने साफ कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों से लड़ाई में वे किसी से नहीं डरते और भाजपा सरकार बनने पर पूरे क्षेत्र को इनसे मुक्त कर देंगे।
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