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पश्चिम बंगाल वोटर लिस्ट से 27 लाख नाम हटाए गए मुस्लिम और मटुआ क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर, जानिए पूरी डिटेल!

On: April 10, 2026 3:58 AM
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पश्चिम बंगाल वोटर लिस्ट : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत न्यायिक समीक्षा के बाद 27 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए हैं। कुल मिलाकर राज्य में 91 लाख से अधिक नाम हटाए जा चुके हैं, जो मतदाताओं की कुल संख्या को काफी प्रभावित कर रहा है।

इस प्रक्रिया में मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल जिलों और नदिया, नॉर्थ 24 परगना जैसे मटुआ समुदाय वाले क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नाम कटे हैं। विपक्षी पार्टियां इसे निशाना बनाने की साजिश बता रही हैं, जबकि चुनाव आयोग इसे स्वच्छ मतदाता सूची बनाने का कदम बता रहा है।

पश्चिम बंगाल वोटर लिस्ट 2026 ऑनलाइन नाम चेक करने की प्रक्रिया
पश्चिम बंगाल वोटर लिस्ट में अपना नाम आसानी से ऑनलाइन चेक करें

SIR प्रक्रिया क्या है और क्यों हटाए गए नाम?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) नवंबर 2025 से शुरू हुई एक विशेष अभियान था, जिसमें घर-घर जाकर मतदाताओं की जांच की गई। इसमें डुप्लिकेट नाम, मृतक व्यक्ति, स्थानांतरित मतदाता और बिना दस्तावेजों वाले संदिग्ध एंट्री को चिन्हित किया गया।

पहले चरण में 58 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए। फरवरी 2026 तक और नाम कटे। अब अंतिम चरण में 60 लाख नामों को अंडर एडजुडिकेशन (न्यायिक जांच) के लिए रखा गया था। इनमें से 27,16,393 नाम (लगभग 45%) अयोग्य पाए गए और हटा दिए गए।

चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि हटाए गए मतदाता अपीलेट ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं, लेकिन आगामी चुनाव में वे वोट नहीं डाल पाएंगे क्योंकि वोटर लिस्ट फ्रीज हो चुकी है।

राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या पहले 7.66 करोड़ के आसपास थी, जो अब घटकर करीब 6.7-7 करोड़ रह गई है।

पश्चिम बंगाल वोटर लिस्ट कौन से क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नाम हटे?

आंकड़ों के अनुसार:

  • मुर्शिदाबाद जिले में सबसे ज्यादा 4.55 लाख नाम हटाए गए। यहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है।
  • मालदा, साउथ 24 परगना, बीरभूम आदि मुस्लिम बहुल इलाकों में भी बड़ी संख्या में डिलीशन हुए।
  • नदिया और नॉर्थ 24 परगना में मटुआ समुदाय वाले क्षेत्रों में भी काफी नाम कटे। नदिया में प्रतिशत के हिसाब से डिलीशन सबसे ज्यादा (77.86%) रहा।
  • नंदीग्राम जैसे क्षेत्र में हटाए गए नामों में 95.5% मुस्लिम थे, जबकि वहां आबादी में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ 25% है।
  • सबर इंस्टीट्यूट जैसे थिंक टैंक के विश्लेषण में कहा गया कि मुस्लिम बहुल जिलों
  • में डिलीशन की दर ज्यादा थी। वहीं मटुआ क्षेत्रों में भी प्रभाव पड़ा, जहां दस्तावेजों की कमी ज्यादा बताई जा रही है।
  • कुल 90 लाख हटाए गए नामों में अनुमानित रूप से 34% मुस्लिम और 63% हिंदू हैं
  • लेकिन आबादी के अनुपात (मुस्लिम 27%) को देखते हुए कुछ क्षेत्रों में असंतुलन दिख रहा है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं!

  • ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे साजिश बताया है।
  • मुख्यमंत्री ने नदिया में रैली में कहा कि मतुआ और अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है।
  • TMC ने वादा किया है कि प्रभावित लोगों की मदद की जाएगी।
  • बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि यह सफाई अभियान है
  • जिसमें बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटाए गए हैं। कई इलाकों में फर्जी
  • वोटर एंट्री होने का आरोप लगाया जा रहा है।
  • चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रक्रिया निष्पक्ष है और कोई भेदभाव नहीं किया गया।
  • हटाए गए लोग अपील कर सकते हैं।

चुनाव 2026 पर क्या असर पड़ेगा?

  • पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने हैं। पहला चरण 6 अप्रैल को फ्रीज हो चुका है
  • दूसरा चरण 29 अप्रैल को। 27 लाख नाम हटने से खासकर मुस्लिम और मटुआ वोट बैंक प्रभावित हो सकते हैं।
  • TMC को अल्पसंख्यक और मटुआ वोटों पर भरोसा है, जबकि बीजेपी मटुआ समुदाय में मजबूत है।
  • ऐसे में यह डिलीशन दोनों पक्षों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन विपक्ष इसे अपना नुकसान बता रहा है।
  • सुप्रीम कोर्ट में बंगाल सरकार की याचिका पर 13 अप्रैल को सुनवाई होनी है
  • जिसमें इस मुद्दे पर आगे फैसला आ सकता है।

स्वच्छ चुनाव vs राजनीतिक आरोप!

वोटर लिस्ट की सफाई लोकतंत्र के लिए जरूरी है। डुप्लिकेट, मृतक और बिना आधार वाले नाम हटाने से चुनाव निष्पक्ष बनते हैं। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में डिलीशन और खास इलाकों में ज्यादा असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

चुनाव आयोग का दावा है कि प्रक्रिया पारदर्शी है और 700 से ज्यादा न्यायिक अधिकारियों ने जांच की। प्रभावित मतदाताओं को अपील का अधिकार है।

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