ईरान में बड़ी कलह : अमेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद टॉक्स 2026 शुरू होने से ठीक पहले ईरान के अंदर गहरी आंतरिक फूट सामने आ गई है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ शुक्रवार रात पाकिस्तान पहुंच गए, लेकिन IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) उनके साथ टकराव पर अड़ा हुआ है। IRGC कमांडर अहमद वाहिदी वार्ता दल में दबाव बना रहे हैं और मिसाइल कार्यक्रम पर कोई समझौता न करने की सख्ती दिखा रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। क्या इस बार बातचीत सफल होगी?
ईरान में आंतरिक विवाद क्यों बढ़ गए?
ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद दो हफ्ते का सीजफायर घोषित हुआ था, लेकिन अब दोनों पक्ष उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। ईरान की वार्ता टीम में भारी कलह है:

- IRGC कमांडर-इन-चीफ अहमद वाहिदी गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची के प्रभाव को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं।
- वाहिदी ने मांग की है कि वार्ता दल में मोहम्मद बघेर जोलकद्र को शामिल किया जाए, जिन्हें IRGC के दबाव से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का सचिव बनाया गया था।
- गालिबाफ और अरागची जोलकद्र का विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनके पास कूटनीतिक अनुभव कम है।
- IRGC किसी भी हाल में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर बातचीत नहीं करने पर अड़ा है।
IRGC ईरान की सबसे ताकतवर संस्था है। युद्ध के बाद इसकी अर्थव्यवस्था और समाज पर पकड़ और मजबूत हो गई है। अब यह राजनीतिक फैसलों में भी भारी दखल दे रही है।
ईरान में बड़ी कलह गालिबाफ की शर्तें और लेबनान मुद्दा
गालिबाफ ने इस्लामाबाद पहुंचकर दो मुख्य शर्तें दोहराईं:
- लेबनान में इजराइल के हमले तुरंत बंद हों।
- ईरान की ब्लॉक की गई संपत्तियां (फ्रोजन एसेट्स) रिलीज की जाएं।
उन्होंने दावा किया कि सीजफायर में लेबनान भी शामिल था, लेकिन अमेरिका और इजराइल ने इसे खारिज कर दिया। गालिबाफ ने कहा कि बिना ठोस कार्रवाई के बातचीत बेकार है।
ट्रंप और JD वेंस की चेतावनी
- ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा: “ईरान बहुत ही खराब और अपमानजनक काम कर रहा है।
- हमने ऐसा कोई समझौता नहीं किया था!” उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत
- खोलने की मांग की और चेतावनी दी कि अगर ईरान नहीं माना तो अमेरिका सख्त कदम उठाएगा।
- उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस पाकिस्तान रवाना हो गए। उन्होंने कहा, “अगर ईरानी ईमानदारी
- से बातचीत करेंगे तो हम मदद का हाथ बढ़ाएंगे, लेकिन अगर गेम खेल रहे हैं तो अमेरिका सख्ती दिखाएगा।”
इस्लामाबाद टॉक्स 2026 का संदर्भ
- फरवरी 2026 में शुरू हुए छह हफ्ते के युद्ध में ईरान को भारी नुकसान हुआ।
- बुधवार को सीजफायर घोषित हुआ, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
- पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
- अमेरिका चाहता है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला रहे और ईरान न्यूक्लियर व मिसाइल कार्यक्रम पर समझौता करे।
ईरान की टीम “फ्रैगमेंटेड” (बंटी हुई) दिख रही है। IRGC हार्डलाइनर रुख अपनाए हुए है, जबकि गालिबाफ कुछ व्यावहारिक रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या होगा?
- अगर IRGC और राजनीतिक नेताओं के बीच कलह नहीं सुलझी तो वार्ता मुश्किल हो सकती है।
- सफलता से मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद बनेगी, लेकिन असफलता से
- तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और नया संघर्ष शुरू हो सकता है।
भारत समेत कई देश इस वार्ता के नतीजे पर नजर रखे हुए हैं क्योंकि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
ईरान में IRGC बनाम गालिबाफ की कलह अमेरिका-ईरान वार्ता को जटिल बना रही है। ट्रंप की चेतावनी साफ है – ईमानदार बातचीत या फिर सख्त कार्रवाई। इस्लामाबाद टॉक्स से क्या निकलता है, यह देखना दिलचस्प होगा।