इस्लामाबाद टॉक्स ब्रेकडाउन : मध्य पूर्व के तनाव के बीच पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि डील बस होने ही वाली थी, लेकिन अमेरिका की अतिरिक्त मांगों और शर्तों में बदलाव के कारण बातचीत फेल हो गई।
यह वार्ता इस्लामाबाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई। ईरानी डेलिगेशन की अगुवाई संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर घालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने की, जबकि अमेरिकी टीम की कमान उपराष्ट्रपति जेडी वांस के हाथ में थी। कुल 21 घंटे से ज्यादा चली इस मैराथन बैठक में सीधे बातचीत करीब ढाई घंटे तक चली।

अब्बास अरागची का सख्त बयान
अब्बास अरागची ने कहा, “47 सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर हुई गंभीर बातचीत में ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए पूरी ईमानदारी दिखाई। लेकिन जब हम ‘इस्लामाबाद समझौते’ के बहुत करीब पहुंच गए थे, तब अमेरिका ने बड़ी-बड़ी मांगें रखीं, शर्तें बदल दीं और रास्ते रोक दिए। कोई सबक नहीं सीखा गया।”
उन्होंने आगे कहा, “अच्छाई के बदले अच्छाई मिलती है और दुश्मनी के बदले दुश्मनी।” ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने मैक्सिमलिज्म (अधिकतम मांगें) अपनाई और समझौते को जानबूझकर रोका।
इस्लामाबाद टॉक्स ब्रेकडाउन अमेरिकी पक्ष का जवाब
- अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने कहा, “21 घंटे से ज्यादा की कोशिशों के बावजूद
- हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। कई सार्थक चर्चाएं हुईं, लेकिन ईरान
- ने हमारी शर्तों को स्वीकार नहीं किया। हमने अपनी सीमाएं स्पष्ट कर दी थीं।”
- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया, “बैठक अच्छी रही, ज्यादातर मुद्दों पर सहमति बन गई
- लेकिन सबसे महत्वपूर्ण परमाणु मुद्दा था, जिस पर कोई सहमति नहीं बनी।” ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए
- अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान को टोल देने वाले सभी जहाजों को रोका जाए।
बातचीत कहां और क्यों फेल हुई?
- स्थान: इस्लामाबाद, पाकिस्तान
- समय: 21 घंटे से अधिक
- मुख्य अड़चन: ईरान का परमाणु कार्यक्रम
ईरान का कहना है कि अमेरिका ने अचानक अतिरिक्त शर्तें थोप दीं। वहीं अमेरिका का दावा है कि ईरान परमाणु मुद्दे पर अपनी लाल लाइन से पीछे नहीं हटा। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
- पाकिस्तान ने दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि वार्ता आगे भी जारी रखने की कोशिश की जाएगी।
क्षेत्रीय प्रभाव क्या होगा?
- इस्लामाबाद टॉक्स के फेल होने से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका है।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है। अगर यहां नाकेबंदी हुई
- तो वैश्विक तेल कीमतों पर असर पड़ेगा और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
ईरान युद्ध का “समाप्ति” चाहता है, न कि अस्थायी ceasefire। अमेरिका अपनी सुरक्षा और परमाणु प्रसार रोकने पर अड़ा हुआ दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में Oman, China या Turkey जैसी अन्य देश मध्यस्थता की कोशिश कर सकते हैं।
भारत के लिए मायने!
- भारत के लिए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। ईरान भारत का प्रमुख ऊर्जा साझेदार है
- और चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट चल रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने से भारत की तेल
- आयात पर असर पड़ सकता है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से क्षेत्रीय समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं।
- भारत को इस स्थिति में संतुलित कूटनीति अपनानी होगी।
- पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान की उच्च स्तरीय बातचीत बिना नतीजे के खत्म हो गई।
- ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिका की “बड़ी मांगों” को जिम्मेदार ठहराया
- जबकि अमेरिका परमाणु मुद्दे पर अड़ा रहा। ट्रंप प्रशासन अब सख्त कदम उठाने की तैयारी दिखा रहा है।
दुनिया इस बात को लेकर चिंतित है कि क्या दोनों देश फिर से बातचीत की मेज पर लौटेंगे या तनाव और बढ़ेगा। फिलहाल पाकिस्तान की कोशिशें जारी हैं, लेकिन सफलता की राह चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है।