नील कात्याल भारतीय मूल : अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक टैरिफ नीति को असंवैधानिक करार देते हुए बड़ी झटका दिया है। इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे मुख्य भूमिका निभाने वाले वकील हैं नील कात्याल (Neal Katyal), जो भारतीय मूल के एक प्रमुख अमेरिकी वकील हैं। 21 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति अकेले टैरिफ नहीं लगा सकते, यह अधिकार केवल कांग्रेस के पास है। नील कात्याल ने छोटे व्यवसायों की ओर से यह केस लड़ा और ट्रंप प्रशासन की नीति को चुनौती दी।
नील कात्याल का परिचय और भारतीय मूल
#नील कुमार कात्याल का जन्म 12 मार्च 1970 को शिकागो, इलिनोइस में हुआ था। उनके माता-पिता भारतीय प्रवासी थे—मां प्रतिभा एक बाल रोग विशेषज्ञ (पेडियाट्रिशियन) थीं और पिता सुरेंद्र एक इंजीनियर। भारतीय जड़ों से जुड़े नील ने हमेशा खुद को “इमिग्रेंट्स के बेटे” कहकर गर्व महसूस किया है। उन्होंने अपनी भारतीय विरासत को बनाए रखा और एक पंजाबी ‘कड़ा’ पहनकर कोर्ट में भी अपनी जड़ों से जुड़ाव दिखाया।

शिक्षा के क्षेत्र में नील ने डार्टमाउथ कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और फिर प्रतिष्ठित येल लॉ स्कूल से जेडी (Juris Doctor) की डिग्री हासिल की। उन्होंने जस्टिस स्टीफन ब्रेयर के साथ क्लर्कशिप भी की, जो उनके कानूनी करियर की मजबूत नींव बनी।
करियर की प्रमुख उपलब्धियां!
- नील कात्याल अमेरिका के सबसे सफल सुप्रीम कोर्ट वकीलों में से एक हैं।
- उन्होंने अब तक 54 से अधिक केस सुप्रीम कोर्ट में लड़े हैं, जो किसी भी रेसियल माइनॉरिटी
- वकील द्वारा सबसे ज्यादा है (थर्गूड मार्शल के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए)।
- ओबामा प्रशासन में भूमिका: 2010 में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया।
- इस पद पर वे सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण केस लड़े,
- जैसे वोटिंग राइट्स एक्ट 1965 की रक्षा, ग्लोबल वार्मिंग से जुड़े केस और अन्य।
- संवैधानिक विशेषज्ञ: वे संवैधानिक कानून, अपीलेट लिटिगेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के विशेषज्ञ हैं।
- वर्तमान में वे मिलबैंक LLP के पार्टनर हैं और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी लॉ सेंटर में पॉल एंड पैट्रिशिया सॉन्डर्स प्रोफेसर ऑफ नेशनल सिक्योरिटी लॉ हैं।
- पुरस्कार और सम्मान: डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस का सिविल राइट्स अवॉर्ड प्राप्त किया
- और फोर्ब्स की टॉप 200 वकीलों की लिस्ट में शामिल रहे।
ट्रंप के खिलाफ प्रमुख केस
नील कात्याल ने ट्रंप प्रशासन की कई नीतियों को चुनौती दी है:
- 2017 में ट्रंप के ट्रैवल बैन को असंवैधानिक बताते हुए केस लड़ा।
- हालिया टैरिफ केस में उन्होंने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उनका तर्क था कि राष्ट्रपति आपातकाल के नाम पर टैक्स (टैरिफ) नहीं लगा सकते, यह कांग्रेस का विशेषाधिकार है।
- सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि टैरिफ लगाना राष्ट्रपति का एकतरफा अधिकार नहीं है। नील ने कहा, “आज सुप्रीम कोर्ट ने दिखाया कि अमेरिका में कानून का राज अभी भी कायम है। राष्ट्रपति शक्तिशाली हो सकते हैं, लेकिन संविधान उनसे ज्यादा शक्तिशाली है। अमेरिकी लोगों पर टैक्स केवल कांग्रेस लगा सकती है।”
- ट्रंप ने फैसले के बाद भी 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने की कोशिश की, लेकिन यह फैसला उनकी
- आर्थिक नीतियों को बड़ा झटका है। नील कात्याल ने इसे “रूल ऑफ लॉ की जीत” बताया
- और कहा कि यह किसी खास राष्ट्रपति के खिलाफ नहीं, बल्कि पावर के डिवीजन के सिद्धांत की रक्षा है।
प्रेरणा का स्रोत
- शिकागो के एक भारतीय परिवार से निकलकर अमेरिका के टॉप लीगल माइंड बनना नील
- कात्याल की मेहनत, बुद्धिमत्ता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रमाण है।
- भारतीय प्रवासियों के बच्चे के रूप में उन्होंने दिखाया कि अमेरिकी सपना सच हो सकता है।
- उनका सफर हर युवा के लिए मिसाल है कि शिक्षा और लगन से
- कोई भी चुनौतीपूर्ण लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
यह केस न केवल ट्रंप प्रशासन के लिए बल्कि वैश्विक व्यापार और संवैधानिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय मूल के नील कात्याल ने एक बार फिर दुनिया को दिखाया कि भारत की बौद्धिक विरासत कितनी मजबूत है।
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