लठमार होली 2026 : ब्रज की होली दुनिया भर में प्रसिद्ध है, और इसमें लठमार होली सबसे अनोखी और रोमांचक परंपरा है। जहां रंगों के साथ लाठियां भी बरसती हैं! 2026 में यह त्योहार फाल्गुन मास की शुक्ल नवमी पर मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार नवमी तिथि 25 फरवरी 2026 (मंगलवार) के सूर्योदय से शुरू होकर 26 फरवरी 2026 (बुधवार) की सुबह 2:40 बजे तक रहेगी। इसलिए बरसाना में लठमार होली 25 फरवरी को और नंदगांव में 26 फरवरी को खेली जाएगी। यह परंपरा भगवान कृष्ण और राधा की प्रेम-लीला से जुड़ी है, जहां महिलाएं पुरुषों को प्रेमपूर्वक लाठियों से पीटती हैं और पुरुष ढाल बनाकर बचाव करते हैं।
लठमार होली का महत्व और पौराणिक कथा
लठमार होली ब्रज क्षेत्र की सबसे प्रसिद्ध होली है, जो राधा-कृष्ण की बाल लीला का प्रतीक है। कथा के अनुसार, जब कृष्ण नंदगांव से बरसाना आते थे तो राधा और उनकी सखियां उन पर रंग डालतीं और मजाक करतीं। कृष्ण भी जवाब में रंग लगाते। इसी मजाक को याद करते हुए महिलाएं लाठियां (लठ) लेकर पुरुषों पर प्रहार करती हैं, लेकिन यह पूरी तरह प्रेमपूर्ण और नाटकीय होता है। पुरुष ढाल लेकर बचते हैं और गीत गाते हैं। यह उत्सव भक्ति, प्रेम और हास्य का अनोखा मिश्रण है। महिलाएं घूंघट निकालकर भागती हैं, पुरुष पीछे पड़ते हैं—सारा माहौल भक्ति भजनों और ढोल-नगाड़ों से गूंजता है।

2026 में बरसाना और नंदगांव का शेड्यूल
- 24 फरवरी 2026 (मंगलवार): बरसाना में लड्डू मार होली – श्रीजी मंदिर में लड्डू बरसाए जाते हैं, भक्त उन्हें पकड़ते हैं।
- 25 फरवरी 2026 (बुधवार): बरसाना में लठमार होली – मुख्य उत्सव रंगिली गली और राधा रानी मंदिर के आसपास। महिलाएं लाठियां लेकर पुरुषों (खासकर नंदगांव के) पर प्रहार करती हैं। शाम 4-5 बजे से शुरू होता है।
- 26 फरवरी 2026 (गुरुवार): नंदगांव में लठमार होली – यहां नंद भवन में उत्सव। बरसाना की महिलाएं नंदगांव आती हैं, और अब नंदगांव की महिलाएं पुरुषों को लाठियां मारती हैं। यह बदला जैसा मजाक होता है।
- 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार): रंगभरनी एकादशी और फूलों वाली होली वृंदावन में शुरू।
- यह उत्सव ब्रज में बसंत पंचमी से शुरू होकर होली तक लगभग 40 दिनों तक चलता है।
- लठमार होली ब्रज की होली का मुख्य आकर्षण है।
कैसे मनाई जाती है लठमार होली?
- स्थान: बरसाना (राधा रानी मंदिर, रंगिली गली) और नंदगांव (नंद भवन)।
- परंपरा: महिलाएं लाल-पीले वस्त्र पहनकर, घूंघट निकालकर लाठियां लेकर पुरुषों पर प्रहार करती हैं।
- पुरुष ढाल लेकर बचते हैं और “राधे-राधे” के नारे लगाते हैं।
- सुरक्षा: लाठियां हल्की और प्रतीकात्मक होती हैं, कोई चोट नहीं पहुंचती। पुलिस और प्रशासन भारी सुरक्षा व्यवस्था करता है।
- आकर्षण: लाखों पर्यटक और भक्त देश-विदेश से आते हैं। भजन, कीर्तन, रंग और गुड़िया का माहौल।
पर्यटकों के लिए टिप्स
- पहले से होटल बुक करें (मथुरा, वृंदावन या बरसाना में)।
- भीड़भाड़ के कारण सुबह जल्दी पहुंचें।
- महिलाओं का सम्मान रखें, फोटोग्राफी की अनुमति लें।
- उत्तर प्रदेश सरकार ने 2026 में विशेष व्यवस्था की है—23 प्रवेश द्वार, 12 सेल्फी पॉइंट और लाइटिंग।
लठमार होली ब्रज की संस्कृति, भक्ति और प्रेम का जीवंत प्रमाण है। यदि आप होली का असली रंग देखना चाहते हैं, तो बरसाना-नंदगांव जरूर जाएं। जय श्री राधे!
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