होली 2026 : में होली का त्योहार बेहद खास और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। साल का पहला चंद्र ग्रहण (लूनर एक्लिप्स) 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा पर लगेगा, जो भारत में भी दिखाई देगा। यह खग्रास चंद्र ग्रहण (पार्शियल टोटल) है, जिसकी कुल अवधि लगभग 3 घंटे 25 मिनट है। ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा, अधिकतम प्रभाव 5:04 बजे रहेगा और शाम 6:47 बजे समाप्त होगा। भारत में यह 24 मिनट तक पार्शियल रूप में दिखेगा, क्योंकि चंद्रोदय शाम 6:14-6:22 बजे के आसपास होगा।
इस संयोग से होलिका दहन और धुलंडी (रंग वाली होली) की तिथि में कन्फ्यूजन है। ज्योतिषाचार्यों और पंचांग के अनुसार, ग्रहण के कारण सूतक काल 3 मार्च सुबह 6:20-6:23 बजे से शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा। सूतक में शुभ कार्य, पूजा और मांगलिक अनुष्ठान वर्जित माने जाते हैं।

होलिका दहन कब? 2 मार्च या 3 मार्च?
भद्रा काल और ग्रहण के प्रभाव से होलिका दहन की तिथि में बदलाव आया है:
- भद्रा काल: 2 मार्च शाम 5:55-5:58 बजे से शुरू होकर 3 मार्च सुबह 5:28-5:32 बजे तक रहेगा।
- सामान्य जन के लिए होलिका दहन2 मार्च 2026 (सोमवार) को प्रदोष काल में करना शुभ माना जा रहा है। प्रदोष काल शाम 6:22 बजे से 8:53 बजे तक है। कई ज्योतिषाचार्य जैसे बनवारी लाल गौड़ और अन्य इसे शास्त्र सम्मत बता रहे हैं, क्योंकि 3 मार्च को सूतक और ग्रहण का प्रभाव रहेगा।
- कुछ पुष्टिमार्ग मंदिरों (जैसे द्वारकाधीश) में होलिका दहन 3 मार्च सुबह 6:00 बजे किया जाएगा।
- धुलंडी (रंग खेलना) ज्यादातर जगहों पर 3 मार्च शाम या 4 मार्च को मनाई जाएगी, क्योंकि 3 मार्च को सूतक के कारण रंगों का त्योहार टाला जा सकता है।
बैंकेबिहारी मंदिर वृंदावन में समय में बदलाव
वृंदावन के प्रसिद्ध बांकेबिहारी मंदिर में चंद्र ग्रहण के कारण विशेष बदलाव किए गए हैं। आचार्य दिनेश गोस्वामी ने बताया:
- होलिका दहन 2 मार्च को।
- धुलंडी 3 मार्च शाम को।
- 3 मार्च को मंदिर का समय: दर्शन सुबह 6:15 बजे से शुरू, सेवायत 5:15 बजे प्रवेश
- श्रृंगार आरती 6:25 बजे, राजभोग 6:30 से 8:30 बजे तक, मंदिर 9:00 बजे बंद।
- शाम 7:00 बजे से 10:00 बजे तक दर्शन।
- सामान्य दर्शन 4 मार्च से फिर शुरू। मंदिर परिसर फूलों से सजाया जाएगा, और ठाकुर जी जगमोहन में विराजमान होंगे।
ग्रहण का ज्योतिषीय महत्व और सावधानियां!
यह चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा पर होने से विशेष महत्व रखता है। सूतक में:
- ग्रहण देखना वर्जित (सीधे आंखों से न देखें)।
- भोजन, पूजा, दान टालें।
- गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग विशेष सावधानी बरतें।
- घर में तुलसी, पीपल आदि पूजनीय वृक्षों के पास न रहें। ग्रहण के बाद स्नान और दान से शुभ फल मिलता है।
होली का महत्व और उत्सव
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, प्रह्लाद और होलिका की कथा से जुड़ा। इस साल ग्रहण के कारण त्योहार थोड़ा अलग होगा, लेकिन उत्साह कम नहीं होगा। लोग 2 मार्च को होलिका जलाकर बुराई का अंत करेंगे और 4 मार्च को रंगों से होली मनाएंगे।
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