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ANEEL फ्यूल भारत की थोरियम न्यूक्लियर एनर्जी क्रांति का नया रास्ता!

On: January 5, 2026 6:12 AM
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ANEEL फ्यूल : भारत की न्यूक्लियर एनर्जी में बड़ा ब्रेकथ्रू! अमेरिकी कंपनी क्लीन कोर थोरियम एनर्जी (CCTE) द्वारा विकसित ANEEL फ्यूल भारत के थोरियम पाथवे को पूरी तरह बदल सकता है। यह फ्यूल मौजूदा प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर्स (PHWR) में इस्तेमाल हो सकता है, जिससे थोरियम का उपयोग तुरंत शुरू हो जाएगा। NTPC ने CCTE में माइनॉरिटी स्टेक लेने का फैसला किया है, जो SHANTI एक्ट 2025 के तहत प्राइवेट सेक्टर की एंट्री को सपोर्ट करता है।

ANEEL फ्यूल क्या है?

ANEEL का फुल फॉर्म Advanced Nuclear Energy for Enriched Life है। यह थोरियम और हाई-एस्से लो-एनरिच्ड यूरेनियम (HALEU) का मिश्रण है। CCTE के फाउंडर मेहुल शाह ने इसे डेवलप किया है। यह फ्यूल भारत के मौजूदा PHWR और CANDU रिएक्टर्स के लिए ऑप्टिमाइज्ड है।

परंपरागत थोरियम फ्यूल से अलग, ANEEL में थोरियम को एनरिच्ड यूरेनियम के साथ मिलाया जाता है, जिससे इरेडिएशन के दौरान थोरियम यूरेनियम-233 में बदलता है और पावर जेनरेशन जारी रहता है। इससे यूरेनियम पर निर्भरता कम होती है।

ANEEL फ्यूल
ANEEL फ्यूल

ANEEL फ्यूल के फायदे

  • हाई बर्न-अप: 45-50 GW दिनों प्रति टन से ज्यादा, जो नेचुरल यूरेनियम से कई गुना बेहतर। 220 MWe PHWR में रोज 8 बंडल रिप्लेसमेंट की जगह सिर्फ 1, और 700 MWe में 22-24 की जगह 2.6।
  • कचरा कम: स्पेंट फ्यूल वॉल्यूम 85% से ज्यादा कम।
  • सुरक्षा: बेहतर एक्सीडेंट टॉलरेंस और सेफ्टी मार्जिन।
  • प्रोलिफरेशन रेसिस्टेंस: न्यूक्लियर हथियार बनाने की संभावना कम।
  • कॉस्ट सेविंग: ऑपरेटिंग और वेस्ट मैनेजमेंट कॉस्ट कम, बिजली उत्पादन सस्ता (20-30% तक)।
  • एनर्जी सिक्योरिटी: भारत के विशाल थोरियम रिजर्व का उपयोग, यूरेनियम इंपोर्ट कम।

भारत के थोरियम प्रोग्राम में भूमिका

भारत का थ्री-स्टेज न्यूक्लियर प्रोग्राम:

  1. PHWR (यूरेनियम)
  2. फास्ट ब्रीडर रिएक्टर्स
  3. थोरियम-बेस्ड रिएक्टर्स

ANEEL फ्यूल पहली स्टेज में ही थोरियम इस्तेमाल करने की सुविधा देता है, बिना नए रिएक्टर्स बनाए। इससे थर्ड स्टेज का U-233 ब्रिज जल्दी बन जाता है। भारत का लक्ष्य 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर कैपेसिटी – ANEEL इसमें मदद करेगा। हर GW के लिए 175 टन इंपोर्टेड यूरेनियम की जरूरत बच सकती है।

डेवलपमेंट और पार्टनरशिप

  • अमेरिका के Idaho National Laboratory (INL) में हाई बर्न-अप टेस्टिंग सफल।
  • NTPC और CCTE का स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, लोकल मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन डेवलपमेंट।
  • अनिल काकोड़कर जैसे भारतीय वैज्ञानिकों का सपोर्ट।
  • SHANTI एक्ट से प्राइवेट और फॉरेन कोलैबोरेशन आसान।

मेहुल शाह कहते हैं, “ANEEL फ्यूल मौजूदा PHWR में थोरियम उपयोग को प्रैक्टिकल बनाता है।”

#ANEEL फ्यूल भारत को क्लीन, सस्टेनेबल और स्वावलंबी न्यूक्लियर एनर्जी की ओर ले जा रहा है। थोरियम के विशाल भंडार का उपयोग करके हम नेट जीरो टारगेट और एनर्जी सिक्योरिटी हासिल कर सकते हैं। भविष्य में और टेस्टिंग व डिप्लॉयमेंट की उम्मीद!

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