बिहार MLC चुनाव 2026 : बिहार की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। बिहार विधान परिषद (MLC) की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इनमें 9 सीटों पर नियमित चुनाव और 1 सीट पर उपचुनाव होना है। इस चुनाव को लेकर एनडीए (NDA) और महागठबंधन (MGB) के बीच राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों को लेकर रणनीति बनाने में जुट गए हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि बिहार MLC चुनाव 2026 में वोटिंग और मतगणना की प्रक्रिया कैसे होती है और किस गठबंधन को कितना फायदा मिल सकता है।

बिहार MLC चुनाव क्यों है खास?
#बिहार विधान परिषद की जिन 10 सीटों पर चुनाव होने जा रहा है, उनमें से 9 सीटें छह साल के कार्यकाल वाली हैं जबकि एक सीट पर उपचुनाव होगा। यह उपचुनाव पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर कराया जा रहा है, जिसका कार्यकाल अभी चार साल बाकी है। इस कारण राजनीतिक हलकों में इस सीट को लेकर भी काफी चर्चा है।
इन सीटों पर चुनाव विधानसभा कोटे से होता है, यानी बिहार विधानसभा के विधायक ही वोट डालकर MLC चुनते हैं। इसलिए विधानसभा में किसी गठबंधन की संख्या ही चुनाव परिणाम तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है।
NDA और महागठबंधन का समीकरण
- वर्तमान राजनीतिक स्थिति में एनडीए के पास विधानसभा में मजबूत बहुमत है।
- भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), हम और अन्य सहयोगी दलों को मिलाकर एनडीए के
- पास लगभग 202 विधायक हैं। दूसरी ओर महागठबंधन में राजद, कांग्रेस
- वाम दलों सहित कुल 41 विधायक हैं। AIMIM और बसपा भी विपक्षी खेमे में माने जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा संख्या बल के आधार पर एनडीए आसानी से 8 सीटें जीत सकता है, जबकि महागठबंधन के खाते में 1 सीट जाना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि यदि अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतारे जाते हैं या क्रॉस वोटिंग होती है तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
MLC चुनाव में वोटिंग की प्रक्रिया क्या है?
- बिहार विधान परिषद चुनाव सामान्य चुनावों से अलग होता है। इसमें विधायक सीधे किसी
- एक उम्मीदवार को वोट नहीं देते बल्कि वरीयता क्रम (Preference Vote) के आधार पर मतदान करते हैं।
- मतदाता विधायक अपने बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों के सामने पहली, दूसरी, तीसरी
- और अन्य वरीयताएं दर्ज करते हैं। इस प्रणाली को “सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम” कहा जाता है।
- यही प्रणाली राज्यसभा चुनावों में भी अपनाई जाती है।
जीत का कोटा कैसे तय होता है?
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में यदि सभी विधायक मतदान करते हैं तो जीत का कोटा एक विशेष गणना के आधार पर तय किया जाता है।
- 9 सीटों के चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए लगभग 25 विधायकों का समर्थन चाहिए।
- पहली वरीयता के वोटों के आधार पर उम्मीदवारों को जीत का कोटा हासिल करना होता है। य
- दि कोई उम्मीदवार निर्धारित कोटा प्राप्त कर लेता है तो उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है।
- यही कारण है कि विधानसभा में संख्या बल रखने वाले दलों को शुरुआती बढ़त मिलती है।
दूसरी वरीयता के वोट क्यों होते हैं महत्वपूर्ण?
यदि पहली वरीयता के वोटों से सभी सीटों का फैसला नहीं हो पाता है, तब दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती शुरू होती है।
पहले चरण में जीत चुके उम्मीदवारों के अतिरिक्त वोट दूसरे उम्मीदवारों को ट्रांसफर किए जाते हैं। इसके बाद दूसरी वरीयता के वोटों का मूल्य निर्धारित कर उन्हें जोड़ा जाता है। कई बार यही दूसरी वरीयता के वोट किसी उम्मीदवार की जीत या हार तय कर देते हैं।
राजनीतिक दल इसी वजह से अपने विधायकों को पहली और दूसरी वरीयता के वोट देने के लिए विशेष निर्देश जारी करते हैं।
बिहार MLC चुनाव 2026 क्या फिर हो सकता है ‘खेला’?
- बिहार की राजनीति में “खेला” शब्द अक्सर अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाओं के
- लिए इस्तेमाल किया जाता है। पिछले राज्यसभा चुनावों में भी क्रॉस वोटिंग
- और कुछ विधायकों के मतदान नहीं करने से परिणाम प्रभावित हुए थे।
- यदि इस बार भी कुछ विधायक मतदान से दूर रहते हैं या वरीयता क्रम में बदलाव होता है
- तो अंतिम परिणाम में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।
- हालांकि मौजूदा संख्या बल को देखते हुए एनडीए की 8 सीटों पर स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
AIMIM और छोटे दलों की भूमिका
AIMIM और बसपा जैसे छोटे दलों के पास भले ही सीमित विधायक हों, लेकिन करीबी मुकाबले की स्थिति में उनके वोट महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। विपक्षी खेमे की रणनीति में इन दलों की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बिहार MLC चुनाव 2026 केवल विधान परिषद की सीटों का चुनाव नहीं है, बल्कि यह बिहार की आगामी राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है। एनडीए जहां अपने बहुमत के दम पर बढ़त बनाए हुए है, वहीं महागठबंधन भी एक सीट सुनिश्चित करने और राजनीतिक संदेश देने की कोशिश में है। वोटिंग की जटिल प्रक्रिया, वरीयता मत और संभावित क्रॉस वोटिंग इस चुनाव को बेहद दिलचस्प बना रहे हैं। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा और राजनीतिक रणनीतियां इस मुकाबले को और रोमांचक बना सकती हैं।