दिल्ली साकेत बिल्डिंग हादसा : दिल्ली के साकेत इलाके में हुआ भीषण बिल्डिंग हादसा पूरे देश को झकझोर कर रख देने वाला है। इस दर्दनाक दुर्घटना में कई लोगों की जान चली गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद सामने आई कहानियां लोगों की आंखें नम कर रही हैं। इनमें पूर्वी चंपारण की एमबीबीएस छात्रा सायिका खान की कहानी सबसे ज्यादा चर्चा में है, जो इस हादसे में बाल-बाल बच गईं।

कैसे हुआ साकेत बिल्डिंग हादसा?
शनिवार शाम दिल्ली के सैदुलाजाब इलाके में स्थित एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। बताया जा रहा है कि इमारत के ऊपरी हिस्से का बड़ा भाग पास की लाइब्रेरी और कैंटीन पर आ गिरा। उस समय वहां बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई कर रहे थे। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और धूल का गुबार छा गया।
छात्रा सायिका ने सुनाई मौत को मात देने की कहानी
- पूर्वी चंपारण की रहने वाली सायिका खान रूस से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं
- और इन दिनों दिल्ली में एमसीआई परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। हादसे के समय वह लाइब्रेरी में पढ़ रही थीं।
- सायिका के अनुसार, वह शाम को नाश्ता करने के लिए लाइब्रेरी से बाहर निकल रही थीं
- तभी जोरदार धमाका हुआ और इमारत का हिस्सा अचानक नीचे गिर पड़ा।
- हादसे में कई छात्र मलबे के नीचे दब गए। सायिका के पैर में हल्की चोट आई, लेकिन वह किसी
- तरह सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहीं। उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया
- जहां प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। हालांकि, हादसे का खौफ अब भी उनके मन से नहीं निकला है।
- उन्होंने बताया कि अपने सामने साथियों को मलबे में दबते देखना उनके जीवन का सबसे भयावह अनुभव था।
दिल्ली साकेत बिल्डिंग हादसा छह लोगों की मौत, कई घायल
- इस हादसे में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मृतकों में मेडिकल और
- इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे छात्र भी शामिल हैं। कई घायल छात्रों का इलाज दिल्ली के
- विभिन्न अस्पतालों में किया गया, जिनमें से कुछ को छुट्टी मिल चुकी है जबकि कुछ का इलाज जारी है।
बिहार के दो इंजीनियरों की दर्दनाक मौत
हादसे में बिहार के दो युवा इंजीनियरों की भी मौत हो गई। इनमें नवादा जिले के नलिन राय और मुजफ्फरपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व छात्र कपिल शामिल थे। नलिन दिल्ली में इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज (IES) की तैयारी कर रहे थे।
- जानकारी के अनुसार, नलिन अपने दोस्त के साथ कैंटीन में खाना खाने गए थे।
- उसी दौरान पास की इमारत अचानक गिर गई और दोनों उसकी चपेट में आ गए।
- परिवार और दोस्तों के लिए यह खबर किसी सदमे से कम नहीं थी।
बचाव अभियान कई घंटों तक चला
हादसे के बाद एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त रूप से राहत और बचाव अभियान चलाया। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारी मशीनों, स्निफर डॉग्स और विशेष उपकरणों का उपयोग किया गया।
करीब 20 घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन कुछ लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। बचाव दल ने लगातार मलबा हटाकर फंसे लोगों को खोजने का प्रयास किया।
जांच के आदेश और अधिकारियों पर कार्रवाई
- दिल्ली सरकार ने इस पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।
- शुरुआती जांच में निर्माण संबंधी लापरवाही और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की आशंका जताई जा रही है।
- नगर निगम ने दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है और पुलिस
- ने संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
निर्माण सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
दिल्ली जैसे महानगर में लगातार सामने आ रहे भवन हादसे निर्माण गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध निर्माण, कमजोर संरचना और सुरक्षा नियमों की अनदेखी ऐसे हादसों की बड़ी वजह बन रही है।
दिल्ली साकेत बिल्डिंग हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों के सपनों के टूटने की कहानी है। जिन छात्रों ने अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए दिल्ली का रुख किया था, उनमें से कुछ हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़ गए। यह हादसा प्रशासन, बिल्डरों और संबंधित एजेंसियों के लिए एक चेतावनी है कि भवन सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में और भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
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