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अमेरिकी प्रतिबंध रूस तेल भारत अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह नहीं करेगा रूस से खरीदेगा कच्चा तेल!

On: April 18, 2026 2:25 AM
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अमेरिकी प्रतिबंध रूस तेल : 18 अप्रैल 2026 को भारत सरकार ने साफ संदेश दिया है कि अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीद पर लगाए गए प्रतिबंधों या छूट की मियाद खत्म होने से उसकी नीति नहीं बदलेगी। रूस से कच्चा तेल आयात जारी रहेगा क्योंकि भारत की प्राथमिकता अपनी ऊर्जा सुरक्षा और 1.4 अरब जनता के हितों को सुनिश्चित करना है।

अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीद संबंधी छूट की मियाद 19 अप्रैल 2026 को खत्म हो रही है। इसके बावजूद भारत सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि यह छूट भारत के लिए बाध्यकारी नहीं है। भारत पहले भी अमेरिका को स्पष्ट कर चुका है कि तेल खरीद बाजार की स्थितियों, कीमतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर की जाएगी।

अमेरिकी प्रतिबंध रूस तेल
अमेरिकी प्रतिबंध रूस तेल रूस के तेल पर अमेरिकी प्रतिबंध और इसका वैश्विक असर

रूस से तेल आयात के आंकड़े

पिछले साल भारत रूस से औसतन प्रतिदिन 26 लाख बैरल कच्चा तेल खरीद रहा था। फरवरी 2026 में यह मात्रा घटकर 10 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई, मार्च में 15 लाख और अप्रैल में बढ़कर 20 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई। वर्तमान में भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 38 प्रतिशत रूस से पूरा कर रहा है, जबकि चीन 51 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है।

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 64 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं
  • जबकि रूस से तेल 60 डॉलर प्रति बैरल पर उपलब्ध था। हालांकि परिवहन लागत
  • अधिक होने से कुल खर्च लगभग बराबर पड़ता था। फिर भी सस्ता और
  • उपलब्ध तेल भारत की रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।

अमेरिकी प्रतिबंध और भारत की रणनीति!

  • अमेरिका ने रूस से तेल खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया था
  • लेकिन भारत ने खरीद जारी रखी। हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए
  • इस टैरिफ को खत्म कर दिया, जो भारत समेत कई देशों के लिए राहत की बात है।

सरकार के सूत्रों ने बताया कि प्रतिबंध किसी देश पर नहीं बल्कि विशिष्ट कंपनियों पर लगते हैं। इसलिए भारत प्रतिबंधित कंपनियों से खरीद नहीं करेगा और नए विकल्प तलाश रहा है। भारत ने हमेशा अपनी रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दिया है। विदेश मंत्रालय का रुख रहा है कि तीसरे देश हमें अपनी नीति थोप नहीं सकते।

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में निर्बाध नौवहन और वैश्विक व्यापार बहाल करने की मांग की है। राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने इस मुद्दे पर जोर दिया।

अमेरिकी प्रतिबंध रूस तेल ऊर्जा सुरक्षा क्यों जरूरी?

  • भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। सस्ते रूसी तेल ने पिछले वर्षों में भारत को
  • बड़ी बचत दी और महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद की। रूस के साथ व्यापार बढ़ने से
  • भारत की ऊर्जा जरूरतें विविध स्रोतों से पूरी हो रही हैं। वर्तमान
  • में भारत 41 देशों से कच्चा तेल और 16 देशों से एलपीजी आयात कर रहा है।

सरकार का मानना है कि तेल खरीद कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि आर्थिक और व्यावहारिक जरूरत है। 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा मांग को देखते हुए भारत किसी भी एक देश या गुट पर निर्भर नहीं रह सकता।

आगे क्या होगा?

  • अमेरिकी छूट खत्म होने के बाद भी भारतीय रिफाइनरियां गैर-प्रतिबंधित इकाइयों और नए
  • चैनलों से रूसी तेल खरीद जारी रखने की तैयारी में हैं। विशेषज्ञों का कहना है
  • कि वैश्विक बाजार की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिरता भारत की खरीद को प्रभावित करेगी।
  • भारत रूस के साथ अपने मजबूत संबंधों को बनाए रखते हुए पश्चिमी देशों के साथ
  • भी संतुलित नीति अपनाए हुए है। यह रुख भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को दर्शाता है।

भारत अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह किए बिना रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा। ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए भारत अपनी नीति पर अडिग है। उम्मीद है कि वैश्विक तेल बाजार स्थिर रहेगा और भारत अपनी जरूरतें बिना किसी बाधा के पूरी कर सकेगा।

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