भारत-चीन SCO द्विपक्षीय वार्ता : 18 अप्रैल 2026 को भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की नई मिसाल देखने को मिली। 2024 में पूर्वी लद्दाख विवाद सुलझने के बाद दोनों देशों ने SCO द्विपक्षीय वार्ता की पहली बैठक आयोजित की। 16-17 अप्रैल को नई दिल्ली में हुई इस बैठक को दोनों पक्षों के सुधरते कूटनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। भारत की ओर से SCO नेशनल कोऑर्डिनेटर राजदूत आलोक ए. डिमरी और चीन की ओर से उनके समकक्ष राजदूत यान वेनबिन ने नेतृत्व किया।

भारत-चीन SCO द्विपक्षीय वार्ता बैठक में क्या चर्चा हुई?
दोनों पक्षों ने SCO नेताओं द्वारा लिए गए फैसलों को लागू करने, संगठन की भविष्य की रूपरेखा और आपसी सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों सहित SCO ढांचे के तहत व्यापक समीक्षा की गई।
- भारत और चीन ने SCO मंच पर नियमित विचार-विमर्श और सहयोग जारी
- रखने पर सहमति जताई। यह बैठक लद्दाख गतिरोध सुलझने के बाद दोनों देशों के बीच
- पहली SCO-विशेष द्विपक्षीय वार्ता थी, जो संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक और सकारात्मक कदम है।
BRICS में बढ़ता भारत-चीन सहयोग!
बैठक में BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) पर भी चर्चा हुई। चीन ने भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता के लिए पूर्ण समर्थन जताया।
- चीनी विदेश मंत्री वांग यी मई 2026 में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए
- भारत का दौरा कर सकते हैं। इसके अलावा, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर 2026 में
- भारत आने और BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने की संभावना है।
- 2024 में लद्दाख विवाद सुलझने के बाद दोनों देश BRICS और SCO जैसे बहुपक्षीय
- मंचों पर सहयोग बढ़ा रहे हैं। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने चीन गए थे।
भारत का स्पष्ट रुख: आतंकवाद और संप्रभुता
भारत SCO को क्षेत्र में आतंकवाद, कट्टरपंथ और उग्रवाद के खिलाफ मजबूत मंच मानता है। भारत का रुख बिल्कुल साफ है कि SCO की कोई भी कनेक्टिविटी पहल सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करे।
- यह SCO चार्टर का मूल सिद्धांत भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल
- तियानजिन SCO शिखर सम्मेलन में कहा था कि जो कनेक्टिविटी संप्रभुता को दरकिनार करती है
- वह अंततः अपना भरोसा और अर्थ दोनों खो देती है। भारत इस मुद्दे पर अपनी स्थिति पर अडिग है।
लद्दाख ठंडे पड़ने का प्रभाव!
- 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंध तनावपूर्ण रहे थे। अक्टूबर 2024 में दोनों
- देशों के बीच डिसएंगेजमेंट और पेट्रोलिंग व्यवस्था पर समझौता हुआ
- जिससे लद्दाख में शेष फ्रिक्शन पॉइंट्स (डेमचोक और डेपसांग) पर तनाव कम हुआ।
- इस ठंडे पड़ने के बाद द्विपक्षीय संबंधों में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है।
- SCO और BRICS जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ना इसी सुधार का हिस्सा है।
- दोनों देश अब व्यापार, सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं।
आगे क्या संभावनाएं?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय दौरों की नींव रख सकती है। BRICS शिखर सम्मेलन 2026 में भारत की मेजबानी और 2027 में चीन की मेजबानी को लेकर दोनों पक्ष एक-दूसरे का समर्थन कर रहे हैं।
हालांकि सीमा मुद्दे पर पूर्ण समाधान अभी बाकी है, लेकिन SCO और BRICS जैसे मंचों पर सहयोग से विश्वास निर्माण (Confidence Building Measures) में मदद मिल रही है।
भारत और चीन के बीच SCO द्विपक्षीय वार्ता लद्दाख ठंडे पड़ने के बाद एक महत्वपूर्ण विकास है। दोनों देश बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाकर संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
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