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नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण लटक सकता है! ECtHR रूल 39 का पैंतरा, भगोड़े डायमंड कारोबारी ने यूरोपीय कोर्ट में लगाई रोक की अर्जी!

On: April 16, 2026 3:19 AM
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नीरव मोदी : (Nirav Modi) के भारत प्रत्यर्पण (Extradition) में नई अड़चन आ गई है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े डायमंड कारोबारी ने ब्रिटेन के सभी कानूनी रास्ते बंद होने के बाद यूरोपीय मानवाधिकार अदालत (ECtHR) में रूल 39 के तहत अंतरिम राहत की अर्जी दाखिल कर दी है। इस अर्जी के कारण उनका प्रत्यर्पण फिलहाल लटक गया है।

16 अप्रैल 2026 को लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, 25 मार्च को लंदन हाई कोर्ट ने नीरव मोदी की अपील दोबारा खोलने की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 55 वर्षीय नीरव मोदी ने स्ट्रासबर्ग स्थित ECtHR में रूल 39 के तहत अर्जी दायर की, जिसमें प्रत्यर्पण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

नीरव मोदी की तस्वीर
नीरव मोदी घोटाले के आरोपी नीरव मोदी की फाइल फोटो

नीरव मोदी क्या है ECtHR रूल 39?

रूल 39 यूरोपीय मानवाधिकार अदालत का एक विशेष प्रावधान है, जो अंतरिम उपाय (Interim Measure) के रूप में इस्तेमाल होता है। इसका मकसद यह है कि कोई व्यक्ति प्रत्यर्पण या निर्वासन के दौरान अपूरणीय नुकसान (irreparable harm) से बच सके।

इस रूल के तहत:

  • कोई अदालती सुनवाई नहीं होती, पूरी प्रक्रिया लिखित रूप में होती है।
  • एक जज आमतौर पर 48 घंटे के अंदर फैसला सुनाता है (हालांकि जरूरत पड़ने पर समय बढ़ाया जा सकता है)।
  • अगर अर्जी मंजूर हो जाती है तो प्रत्यर्पण तुरंत रोक दिया जाता है।
  • इसके बाद मुख्य मुकदमे की सुनवाई होती है, जो 3 से 5 साल तक चल सकती है।

2025 में ECtHR को 2701 ऐसी अर्जियां मिलीं, जिनमें से सिर्फ 222 मंजूर हुईं। यानी सफलता की संभावना बहुत कम है।

PNB घोटाला: नीरव मोदी पर क्या आरोप?

  • नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक में 8000 करोड़ रुपये से ज्यादा (लगभग 1 बिलियन डॉलर)
  • के घोटाले का आरोप है। 2018 में सामने आए इस मामले में उन्होंने बैंकों से धोखाधड़ी कर विदेश भाग गए थे।
  • भारत सरकार ने 2019 से ही उनका प्रत्यर्पण मांगा है।
  • CBI और ED ने लंबे समय से उनके प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन सरकार से समन्वय किया।
  • लंदन की अदालतों ने पहले भी उनकी कई याचिकाएं खारिज कीं। मार्च 2026 में लंदन हाई कोर्ट
  • ने उनकी अंतिम अपील खारिज कर दी, जिसके बाद CBI को 28 दिनों के अंदर प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी करने का मौका मिला था।

ECtHR में क्या होगा आगे?

  • क्राउन प्रॉसीक्यूशन सर्विस (CPS) के प्रवक्ता ने कहा, “नीरव मोदी का प्रत्यर्पण तय था
  • लेकिन उन्होंने ECtHR में रूल 39 के तहत अर्जी देकर प्रक्रिया रोक दी है। हम इस मामले में शामिल नहीं हैं।”
  • वकील बेन कीथ के अनुसार, अगर ECtHR रूल 39 मंजूर कर लेता है
  • तो प्रत्यर्पण रुक जाएगा और मुख्य सुनवाई शुरू हो जाएगी, जिसमें मानवाधिकार उल्लंघन
  • के मुद्दे उठाए जाएंगे। हाल ही में ECtHR ने नीरव मोदी को अनामिता (Anonymity)
  • भी दे दी है, यानी केस की कार्यवाही सार्वजनिक नहीं होगी।

भारतीय अधिकारियों का मानना है कि रूल 39 मंजूर होने की संभावना कम है, लेकिन इससे समय जरूर बर्बाद होगा।

भारत सरकार और CBI की स्थिति

  • CBI ने लंदन में अपनी टीम भेजकर नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज की थी।
  • ब्रिटेन की अदालतों ने भारत सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों को स्वीकार किया था
  • कि नीरव मोदी को भारत में उचित न्याय मिलेगा और कोई यातना नहीं दी जाएगी।
  • फिर भी नीरव मोदी मानवाधिकारों के हनन का हवाला देकर लड़ाई जारी रखे हुए हैं।

प्रत्यर्पण में और देरी?

  • नीरव मोदी का ECtHR रूल 39 वाला पैंतरा उनके प्रत्यर्पण को लंबा खींच सकता है।
  • अगर अर्जी खारिज हो गई तो भारत सरकार उन्हें जल्द भारत ला सकती है।
  • लेकिन अगर मंजूर हो गई तो केस कई सालों तक लंबित रह सकता है।

यह मामला दिखाता है कि बड़े आर्थिक अपराधियों को सजा दिलाने में अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रियाएं कितनी जटिल और समय लेने वाली होती हैं। PNB घोटाले के अन्य आरोपियों की तरह नीरव मोदी को भी भारत लाकर न्याय की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिशें जारी हैं।

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