नारी शक्ति वंदन अधिनियम : (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। 2023 में संसद के विशेष सत्र में पास हुए इस संविधान संशोधन (106वां संशोधन) को अब 2026 में और मजबूत बनाने के लिए लोकसभा में चर्चा हो रही है। आज 16 अप्रैल 2026 से शुरू हुए तीन दिवसीय विशेष सत्र में इस अधिनियम के साथ परिसीमन बिल और संघ राज्य क्षेत्र कानून संशोधन बिल पर भी बहस होने वाली है।
यह बिल लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है। इसमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की आरक्षित सीटों में भी महिलाओं को एक-तिहाई हिस्सा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के आम चुनावों से पहले यह आरक्षण लागू हो सके।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम का इतिहास और महत्व
महिलाओं के राजनीतिक आरक्षण की मांग लंबे समय से चली आ रही थी। 1996 से कई बार यह बिल संसद में पेश हुआ, लेकिन पास नहीं हो सका। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सितंबर 2023 में नए संसद भवन में यह बिल पहली बार चर्चा के लिए लिया गया। लोकसभा में 454 मतों के पक्ष में और मात्र 2 के विरोध में पास हुआ, जबकि राज्यसभा में सर्वसम्मति से मंजूरी मिली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 28 सितंबर 2023 को इसे मंजूरी दी।
इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को नीति-निर्माण में समान भागीदारी देना है। देश की आधी आबादी महिलाएं हैं, लेकिन लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम रहा है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को सशक्त बनाकर लोकतंत्र को और मजबूत बनाएगा। इससे महिला नेतृत्व बढ़ेगा, जो विकास की योजनाओं को अधिक समावेशी बनाएगा।
2026 के विशेष सत्र में क्या हो रहा है?
16 से 18 अप्रैल 2026 तक चले इस विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर चर्चा हो रही है। सरकार लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव लाई है, जिसमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसी तरह राज्य विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जाएंगी।
- केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां संशोधन) बिल पेश किया
- जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने संघ राज्य क्षेत्र कानून संशोधन बिल पेश किया।
- परिसीमन बिल 2026 के तहत नई जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण होगा।
- वर्तमान में 1971 की जनगणना के आधार पर सीटें तय हैं, जो अब पुरानी पड़ चुकी हैं।
परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व या वर्तमान जज को चेयरपर्सन बनाया जाएगा। इसकी सिफारिशें गजट में प्रकाशित होने के बाद कानून का रूप ले लेंगी और अदालत में इनकी चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
विपक्ष की स्थिति और विवाद
- INDIA गठबंधन ने महिलाओं के आरक्षण का समर्थन किया है, लेकिन परिसीमन बिल पर आपत्ति जताई है।
- 15 अप्रैल को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर 19 विपक्षी दलों की बैठक हुई
- जिसमें तय हुआ कि आरक्षण तुरंत लागू हो, लेकिन परिसीमन पर सवाल उठाए जाएंगे।
- विपक्ष का आरोप है कि सरकार परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ लेना चाहती है।
- फिर भी, सरकार का कहना है कि यह बिल सभी वर्गों के लिए समान रूप से लागू होगा
- और महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री मोदी इस सत्र
- में लोकसभा को संबोधित कर सकते हैं और महिलाओं के सशक्तिकरण पर विस्तार से बात करेंगे।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रमुख प्रावधान
- लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में कुल सीटों का एक-तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित।
- SC/ST आरक्षित सीटों में भी महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण।
- आरक्षण का घुमाव (रोटेशन) होगा, यानी हर बार अलग-अलग सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
- दिल्ली विधानसभा पर भी यह लागू होगा।
- लागू होने के बाद 15 साल तक यह आरक्षण चलेगा (बाद में संसद बढ़ा सकती है)।
यह अधिनियम लागू होने पर भारत की राजनीति में महिला सांसदों और विधायिकाओं की संख्या में भारी वृद्धि होगी। इससे पंचायती राज में महिलाओं की सफलता की तरह संसद स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव आएगा।
महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में अन्य कदम
- मोदी सरकार ने महिलाओं के लिए कई योजनाएं चलाई हैं जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
- उज्ज्वला योजना, मुद्रा लोन, स्वयं सहायता समूह आदि। नारी शक्ति वंदन अधिनियम
- इन प्रयासों को राजनीतिक क्षेत्र तक ले जाता है। विशेष सत्र में इस बिल के पास होने
- से महिलाओं को राजनीति में मुख्यधारा में लाने का रास्ता और मजबूत होगा।
एक नया युग की शुरुआत
नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा की कार्यवाही में महिलाओं की आवाज को मजबूत करेगा। 16 अप्रैल 2026 से शुरू इस विशेष सत्र के नतीजे पूरे देश की महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण होंगे। अगर बिल पास होता है तो 2029 के चुनावों में महिलाएं अधिक संख्या में संसद और विधानसभाओं में पहुंचेंगी।
- यह न केवल लोकतंत्र को समावेशी बनाएगा, बल्कि विकास की प्रक्रिया को भी तेज करेगा।
- हर भारतीय नागरिक को इस ऐतिहासिक क्षण पर गर्व होना चाहिए। महिलाओं की भागीदारी
- बढ़ने से देश की नीतियां अधिक संतुलित और प्रभावी होंगी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत की नारी शक्ति को सलाम है। आइए, हम सब मिलकर इस बदलाव का स्वागत करें और महिलाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करें।