यूपी नया वेज बोर्ड : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मजदूरों और कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। वर्ष 2014 के बाद पहली बार प्रदेश में नया वेज बोर्ड (मजदूरी बोर्ड) गठित करने का ऐलान किया गया है। यह फैसला मई 2026 में लागू होगा। नोएडा में हाल के श्रमिक विरोध प्रदर्शनों के बाद हाईपावर कमेटी की सिफारिश पर यह कदम उठाया गया है।
न्यूनतम मजदूरी में अंतरिम बढ़ोतरी पहले ही कर दी गई है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी है। अब वेज बोर्ड के गठन से मजदूरों को और बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

क्यों गठित हो रहा है नया वेज बोर्ड?
उत्तर प्रदेश में पिछले 12 साल से वेज बोर्ड नहीं बना था। 28 जनवरी 2014 को अंतिम बार न्यूनतम मजदूरी की मूल दरें अधिसूचित की गई थीं। उसके बाद केवल महंगाई भत्ता बढ़ता रहा, लेकिन मूल वेतन में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
हर पांच साल में वेज बोर्ड का गठन होना चाहिए, लेकिन विभिन्न कारणों से यह प्रक्रिया रुक गई। अब योगी सरकार ने नए लेबर कोड और केंद्र सरकार के फ्लोर वेज को ध्यान में रखते हुए मई 2026 में बोर्ड गठन का फैसला किया है।
श्रम और सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता श्रमिकों के हित सुरक्षित रखते हुए औद्योगिक विकास है। नोएडा के बवाल को साजिश बताया गया और मजदूरों से अपील की गई कि वे किसी की कठपुतली न बनें।
न्यूनतम मजदूरी में कितनी बढ़ोतरी हुई?
नोएडा-गाजियाबाद समेत पूरे प्रदेश में अंतरिम बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। यह बढ़ोतरी लगभग 21% तक है। नई दरें इस प्रकार हैं:
नोएडा-गाजियाबाद क्षेत्र के लिए (1 अप्रैल 2026 से):
- अकुशल मजदूर: 13,690 रुपये प्रति माह (पहले 11,313 रुपये)
- अर्द्धकुशल मजदूर: 15,059 रुपये प्रति माह (पहले 12,445 रुपये)
- कुशल मजदूर: 16,868 रुपये प्रति माह (पहले 13,940 रुपये)
अन्य नगर निगम क्षेत्रों के लिए:
- अकुशल: 13,006 रुपये
- अर्द्धकुशल: 14,306 रुपये
- कुशल: 16,025 रुपये
अन्य जनपदों के लिए:
- अकुशल: 12,356 रुपये
- अर्द्धकुशल: 13,591 रुपये
- कुशल: 15,224 रुपये
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर 20,000 रुपये न्यूनतम मजदूरी की अफवाह पूरी तरह गलत है। यह केवल अंतरिम राहत है। स्थायी दरें वेज बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर तय होंगी।
यूपी नया वेज बोर्ड के फायदे क्या हैं?
- वैज्ञानिक तरीके से वेतन निर्धारण: बोर्ड श्रमिकों, नियोक्ताओं और विशेषज्ञों की
- राय लेकर न्यूनतम मजदूरी तय करेगा। इससे विवाद कम होंगे।
- महंगाई के अनुरूप बढ़ोतरी: केवल DA नहीं, मूल वेतन भी समय-समय पर रिव्यू होगा।
- श्रमिकों की बेहतर स्थिति: स्वास्थ्य, पेंशन, बच्चों की शिक्षा और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
- औद्योगिक शांति: नोएडा जैसे क्षेत्रों में भविष्य में विरोध प्रदर्शन कम होने की संभावना।
- नए लेबर कोड के अनुरूप: केंद्र के फ्लोर वेज के साथ यूपी की मजदूरी दरें संतुलित होंगी।
योगी सरकार का दावा है कि पिछले नौ सालों में श्रमिक हितों का पूरा ध्यान रखा गया। कहीं कोई बड़ा आंदोलन नहीं हुआ, लेकिन कुछ तत्व शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं।
नोएडा बवाल और सरकार की प्रतिक्रिया!
- नोएडा में फैक्टरियों में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार ने तुरंत हाईपावर कमेटी गठित की।
- कमेटी की सिफारिश पर अंतरिम बढ़ोतरी को मंजूरी मिली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- ने नियोक्ताओं से अपील की कि वे नियमों के अनुसार वेतन, ओवरटाइम, साप्ताहिक अवकाश और बोनस दें।
- सरकार ने मजदूरों से भी अपील की कि वे कानपुर जैसे उदाहरण से सबक लें
- जहां आंदोलनों ने उद्योगों को नुकसान पहुंचाया।
आगे क्या होगा?
मई 2026 में वेज बोर्ड गठित होने के बाद उसकी सिफारिशें आएंगी। उसके आधार पर नई मूल दरें तय होंगी। सरकार अंतरिम वेतन वृद्धि को तब तक जारी रखेगी, जब तक बोर्ड अपनी अंतिम रिपोर्ट न दे दे।
यह फैसला यूपी के लाखों मजदूरों, विशेषकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए राहत भरा है। इससे उनकी आय बढ़ेगी और जीवन स्तर सुधरेगा।
योगी सरकार का यह कदम श्रमिक कल्याण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन बनाने की दिशा में सकारात्मक है। वेज बोर्ड के गठन से न्यूनतम मजदूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनेगी। मजदूर भाइयों को सलाह है कि आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें।
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