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बागेर गालिबाफ कौन हैं? ईरान के सख्त नेता ने अमेरिका के सामने रखी सीजफायर की बड़ी शर्त लेबनान में हमले रुकें नहीं तो बातचीत बेकार!

On: April 11, 2026 3:30 AM
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बागेर गालिबाफ कौन हैं : मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच एक नया मोड़ आया है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने अमेरिका के साथ सीजफायर और बातचीत के लिए एक बड़ी शर्त रख दी है। उन्होंने साफ कहा कि इजराइल के लेबनान पर हमले तुरंत बंद न हुए तो कोई बातचीत या सीजफायर व्यर्थ है। साथ ही ईरान के फ्रोजन एसेट्स (ब्लॉक संपत्तियां) रिलीज करने की भी मांग की गई है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ‘Islamabad Talks 2026’ की तैयारी चल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच छह हफ्ते चली जंग के बाद दो हफ्ते का सीजफायर घोषित किया गया था, लेकिन अब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं।

बागेर गालिबाफ कौन हैं और उनका परिचय
बागेर गालिबाफ के जीवन और राजनीतिक करियर की झलक

बागेर गालिबाफ कौन हैं उनका सफर और बैकग्राउंड

मोहम्मद बागेर गालिबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) ईरान के कट्टरपंथी और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। उनका जन्म 1961 में मशहद के पास हुआ। वे ईरान-इराक युद्ध (1980-1988) के वेटरन सैनिक हैं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े रहे। IRGC ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य और वैचारिक संस्था है, जो गालिबाफ की मुख्य ताकत है।

2005 से 2017 तक वे तेहरान के मेयर रहे। इस दौरान उन्होंने शहर की इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह बदल दिया – मेट्रो लाइनें बनवाईं, सड़कें चौड़ी कीं और आधुनिकीकरण किया। समर्थक उन्हें “सैनिक-प्रशासक” कहते हैं। वे ईरान की क्रांतिकारी विचारधारा के प्रति सख्त हैं, लेकिन व्यावहारिक तरीके से काम करने के लिए भी जाने जाते हैं।

2020 से वे ईरान की संसद (मजलिस) के स्पीकर हैं। हाल ही में इजराइल ने उन्हें अपनी हिट लिस्ट से हटा लिया, जिससे लगता है कि अमेरिका उन्हें बातचीत के लिए credible negotiator मान रहा है। ईरान में अमेरिका का “पसंदीदा” कहलाना एक तरह का अपमान माना जाता है, क्योंकि अमेरिका को वहां “ग्रेट सैटन” कहा जाता है।

गालिबाफ की बड़ी शर्त – लेबनान सीजफायर और फ्रोजन एसेट्स

इस्लामाबाद टॉक्स से पहले गालिबाफ ने X (ट्विटर) पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा, “ईरान सिर्फ शब्दों से नहीं पिघलेगा”। उनकी मुख्य शर्तें ये हैं:

  1. इजराइल को लेबनान पर हमले तुरंत बंद करने होंगे।
  2. ईरान की ब्लॉक की गई अंतरराष्ट्रीय संपत्तियां (frozen assets) रिलीज की जाएं।
  3. अगर ये नहीं हुआ तो सीजफायर और बातचीत दोनों “बेकार” और “अव्यवहारिक” हैं।

ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजराइल ने उसके 10-पॉइंट प्रपोजल के तीन महत्वपूर्ण क्लॉज का उल्लंघन किया है – लेबनान में जारी हमले, ईरानी हवाई क्षेत्र में ड्रोन घुसपैठ और यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को नकारना। गालिबाफ ने इसे “ऐतिहासिक अविश्वास” का पैटर्न बताय!

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने सख्त जवाब दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान “गेम खेल रहा है” तो अमेरिका सख्ती से पेश आएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्ट्रेट ऑफ हरमुज को लेकर दबाव बनाया है।

ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच तनाव का पूरा संदर्भ

  • फरवरी 2026 में शुरू हुई छह हफ्ते की जंग ने ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया।
  • कई टॉप लीडर्स मारे गए, सैन्य ठिकाने तबाह हुए और अर्थव्यवस्था चरमरा गई।
  • ट्रंप ने दो हफ्ते का सीजफायर घोषित किया, जिसमें ईरान के 10-पॉइंट प्रपोजल को “workable basis” माना गया।
  • लेकिन अब दोनों पक्ष आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। ईरान कह रहा है कि लेबनान
  • (जहां हिजबुल्लाह ईरान समर्थित है) में इजराइल के हमले जारी हैं
  • जबकि अमेरिका-इजराइल का दावा है कि सीजफायर में लेबनान शामिल नहीं था।
  • इस्लामाबाद अब “रेड जोन” बन गया है। पाकिस्तान ने डेलिगेट्स और पत्रकारों के लिए
  • वीजा ऑन अराइवल की सुविधा दी है। ईरानी डेलिगेशन में गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची शामिल हैं।

गालिबाफ की चुनौती और भविष्य

गालिबाफ के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं:

  • आर्थिक राहत (सैंक्शंस हटवाना) दिलाना
  • ईरान के अंदरूनी हार्डलाइनर्स को संभालना, जो अमेरिका से किसी भी समझौते को कमजोरी मानते हैं।
  • अगर वे सफल रहे तो ईरान में उनकी ताकत और बढ़ सकती है। लेकिन असफलता
  • से न सिर्फ उनका करियर बल्कि पूरे क्षेत्र में बड़ा संघर्ष भड़क सकता है।
  • यह स्थिति 2015 के JCPOA न्यूक्लियर डील की याद दिलाती है
  • जिसे अमेरिका ने 2018 में छोड़ दिया था। अब फिर से बातचीत की कोशिश हो रही है, लेकिन अविश्वास गहरा है।

क्या होगा आगे? मिडिल ईस्ट का भविष्य

  • इस्लामाबाद टॉक्स से दुनिया की नजरें जुड़ी हुई हैं। अगर लेबनान में शांति स्थापित हुई
  • और ईरान को कुछ राहत मिली तो तनाव कम हो सकता है। वरना स्ट्रेट ऑफ हरमुज
  • (तेल सप्लाई का महत्वपूर्ण रास्ता) में नई उथल-पुथल हो सकती है।
  • भारत समेत पूरी दुनिया इस बातचीत के नतीजे पर नजर रखे हुए है
  • क्योंकि इससे तेल की कीमतें, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।

बागेर गालिबाफ ईरान की सख्त लेकिन व्यावहारिक आवाज बनकर उभरे हैं। उनकी शर्तें साबित करती हैं कि ईरान सिर्फ शब्दों से नहीं, ठोस कार्रवाई से समझौता चाहता है। क्या इस्लामाबाद में कोई बड़ा ब्रेकथ्रू होगा या तनाव और बढ़ेगा? समय बताएगा।

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