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सौरभ भारद्वाज पर FIR जनकपुरी रेप केस में जिस पीड़िता की बात करते थे, उसी की पहचान उजागर करने का आरोप

On: June 2, 2026 5:51 AM
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सौरभ भारद्वाज पर FIR : दिल्ली राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज के खिलाफ जनकपुरी थाने में FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि उन्होंने एक नाबालिग रेप पीड़िता की पहचान सोशल मीडिया पर उजागर कर दी। दिलचस्प बात यह है कि सौरभ भारद्वाज खुद इसी जनकपुरी रेप केस को जोर-शोर से उठा रहे थे।

क्या है पूरा मामला?

2 जून 2026 की खबर के अनुसार, एक वकील प्रवीण नारायण की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने सौरभ भारद्वाज के खिलाफ एक्शन लिया है। शिकायत में कहा गया है कि 11 मई 2026 को सौरभ भारद्वाज ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट किया, जिसमें नाबालिग बच्ची के नाम और अन्य पहचान संबंधी जानकारी सार्वजनिक कर दी गई।

सौरभ भारद्वाज पर FIR दर्ज होने से जुड़ी खबर
सौरभ भारद्वाज पर FIR दर्ज होने के मामले ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

पुलिस ने इस मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 23(4), किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 और भारतीय न्याय संहिता (BNSS) की धारा 72 के तहत FIR दर्ज की है।

सौरभ भारद्वाज पर FIR क्यों दर्ज हुई?

भारतीय कानून के अनुसार, नाबालिग बलात्कार पीड़िता की पहचान किसी भी माध्यम से उजागर करना गंभीर अपराध माना जाता है। इससे बच्ची और उसके परिवार की मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है और उनकी निजता का उल्लंघन होता है।

शिकायतकर्ता वकील ने आरोप लगाया कि सौरभ भारद्वाज का पोस्ट न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे पीड़िता की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। पुलिस ने पोस्ट के स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच शुरू कर दी है।

सौरभ भारद्वाज का पक्ष

  • अभी तक सौरभ भारद्वाज की तरफ से इस FIR पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
  • वे पिछले दिनों जनकपुरी रेप केस को लगातार उठा रहे थे और आरोप लगा रहे थे
  • कि पुलिस मामले में सही तरीके से कार्रवाई नहीं कर रही है।

ऐसे मामलों में कानून क्या कहता है?

  • पॉक्सो एक्ट 2012 की धारा 23(4): मीडिया या किसी भी व्यक्ति द्वारा नाबालिग पीड़िता
  • की पहचान उजागर करने पर सजा का प्रावधान।
  • किशोर न्याय अधिनियम: बच्चों की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य।
  • BNSS धारा 72: गोपनीयता भंग करने संबंधी प्रावधान।

ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 1 से 3 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और विवाद

  • यह घटना AAP के लिए मुश्किल समय में आई है। सौरभ भारद्वाज दिल्ली सरकार में महत्वपूर्ण
  • भूमिका निभा चुके हैं और पार्टी के चेहरे माने जाते हैं। विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को लेकर हमलावर हो सकती हैं।
  • कई सोशल मीडिया यूजर्स भी इस बात पर सवाल उठा रहे हैं
  • कि जो नेता खुद पीड़िता के पक्ष में खड़ा दिख रहा था, वही गलती कैसे कर बैठा?

जनकपुरी रेप केस क्या था?

  • जनकपुरी में एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। सौरभ भारद्वाज
  • ने इस मामले को लगातार उठाया और मांग की थी कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
  • लेकिन अब उन्हीं पर पीड़िता की पहचान उजागर करने का आरोप लगने से पूरा मामला नया मोड़ ले चुका है।

क्या कहते हैं कानूनी विशेषज्ञ?

कानूनी जानकारों का कहना है कि चाहे कोई कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो, नाबालिग की पहचान उजागर करने पर कोई छूट नहीं दी जा सकती। सोशल मीडिया के दौर में जिम्मेदारी से पोस्ट करने की जरूरत है।

सौरभ भारद्वाज पर दर्ज FIR एक बार फिर याद दिलाती है कि कानून सबके लिए समान है। चाहे आप कोई भी हों, नाबालिग पीड़ितों की गोपनीयता का सम्मान करना जरूरी है। पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है। आगे क्या होता है, इस पर सबकी नजर है।

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