बांग्लादेश विदेश मंत्री News : नई दिल्ली। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने अपने पहले विदेश दौरे पर भारत पहुंचकर विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात की। बैठक में ढाका ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल के प्रत्यर्पण (extradition) की मांग दोहराई। हालांकि भारत की ओर से इस मांग पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। यह घटना भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई शुरुआत की कोशिश के बीच आई है।
बांग्लादेश विदेश मंत्री News भारत यात्रा: क्या हुई चर्चा?
9 अप्रैल 2026 को जारी खबर के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान तीन दिवसीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे। उनके साथ प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर भी थे। यह यात्रा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार सत्ता में आने के बाद नई सरकार के किसी वरिष्ठ सदस्य की पहली उच्च स्तरीय भारत यात्रा है।

बुधवार को खलीलुर रहमान ने एस जयशंकर, अजित डोभाल और तेल एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात की। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि रहमान ने जयशंकर से मुलाकात में शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल के प्रत्यर्पण का अनुरोध दोहराया।
भारत के विदेश मंत्रालय के बयान में शेख हसीना के मुद्दे का कोई जिक्र नहीं किया गया। जयशंकर ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पर लिखा – “हमने द्विपक्षीय संबंधों को विभिन्न पहलुओं पर मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया। नजदीकी संपर्क में रहने पर सहमति बनी।”
शेख हसीना प्रत्यर्पण की मांग: पृष्ठभूमि क्या है?
शेख हसीना पिछले साल छात्र आंदोलन के दौरान सत्ता से बेदखल होने के बाद भारत में शरण लिए हुए हैं। बांग्लादेश में उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल ने छात्र विद्रोह दमन के मामले में मौत की सजा सुनाई है। ढाका की नई सरकार (बीएनपी के नेतृत्व वाली) लगातार भारत से हसीना को प्रत्यर्पित करने की मांग कर रही है।
- बांग्लादेश का कहना है कि दोनों देशों के बीच मौजूद प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को
- यह जिम्मेदारी निभानी चाहिए। विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने इस मांग को फिर
- दोहराया, लेकिन भारत ने अभी तक कोई सकारात्मक या नकारात्मक जवाब नहीं दिया।
- सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि शेख हसीना का मुद्दा भारत-बांग्लादेश
- संबंधों में बाधा नहीं बनना चाहिए। दोनों देश तनाव भरे पिछले साल
- को पीछे छोड़कर नए सहयोग का रास्ता तलाश रहे हैं।
छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी हत्याकांड पर सहमति
- बैठक में एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया। बांग्लादेश ने छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की
- हत्या के आरोपियों को पकड़ने में भारत सरकार का आभार जताया। दोनों पक्ष सहमत हुए
- कि गिरफ्तार व्यक्तियों को प्रत्यर्पण संधि के अनुसार बांग्लादेश को सौंपा जाएगा।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई शुरुआत?
पिछले साल शेख हसीना सरकार के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में काफी तनाव आया था। अब बीएनपी सरकार ‘बांग्लादेश प्रथम’ के सिद्धांत पर चलते हुए पारस्परिक विश्वास, सम्मान और लाभ के आधार पर विदेश नीति चलाने की बात कर रही है।
- भारत ने बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि आने वाले हफ्तों में बांग्लादेशियों को वीजा
- (खासकर मेडिकल और बिजनेस वीजा) जारी करने की प्रक्रिया आसान बनाई जाएगी।
- दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने, व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और
- जल संसाधनों जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
क्या कहते हैं विश्लेषक?
- राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शेख हसीना का मुद्दा दोनों देशों के बीच संवेदनशील बना हुआ है।
- भारत ने पहले भी स्पष्ट किया है कि वह राजनीतिक शरणार्थियों को जबरन नहीं सौंपता।
- हालांकि, दोनों देशों ने इस मुद्दे को संबंधों के बाकी पहलुओं से अलग रखने की रणनीति अपनाई है।
- जयशंकर और रहमान की बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और आर्थिक सहयोग
- पर भी विस्तार से चर्चा हुई। भारत बांग्लादेश के साथ संबंध सुधारने को प्राथमिकता दे रहा है
- खासकर चीन और अन्य क्षेत्रीय प्रभावों के संदर्भ में।
आगे क्या?
बांग्लादेश की नई सरकार संबंध सुधारने के लिए सक्रिय है, लेकिन शेख हसीना का प्रत्यर्पण उसकी प्राथमिक मांग बनी हुई है। भारत की चुप्पी को कूटनीतिक रणनीति माना जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच और उच्च स्तरीय बैठकें हो सकती हैं, जिसमें वीजा आसानी, तीस्ता जल बंटवारा और व्यापार जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहेंगे।
बांग्लादेश विदेश मंत्री की भारत यात्रा संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई गई, लेकिन दोनों पक्षों ने साफ संकेत दिया कि यह मुद्दा द्विपक्षीय संबंधों की राह में बाधक नहीं बनेगा। भारत-बांग्लादेश के बीच नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है, जिसमें सहयोग और विश्वास पर जोर रहेगा।
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