तमिलनाडु चुनाव में कांग्रेस : तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस और DMK के बीच गठबंधन में तनाव के संकेत दिखने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण भारत में लगातार रैलियां कर रहे हैं, जबकि राहुल गांधी अभी तक तमिलनाडु में सक्रिय रूप से प्रचार नहीं कर रहे। पुडुचेरी में दोनों नेताओं के अलग-अलग कार्यक्रम और राहुल का स्टालिन का नाम न लेना गठबंधन में दरार की अटकलों को और बढ़ा रहा है। क्या सीट बंटवारे पर विवाद गठबंधन को कमजोर कर रहा है?
कांग्रेस-DMK गठबंधन में बढ़ती दूरियां!
तमिलनाडु चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने जनवरी में तीन दिन का दौरा कर DMK के लिए प्रचार किया था। लेकिन इस बार स्थिति अलग नजर आ रही है। राहुल गांधी पुडुचेरी में प्रचार कर रहे हैं, लेकिन वहां भी वे DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन के साथ कोई संयुक्त रैली नहीं कर पाए।

DMK के संगठन सचिव आर.एस. भारती ने स्पष्ट किया कि रैलियां पहले से तय थीं, इसलिए आखिरी समय में बदलाव संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि दोनों नेता जल्द ही साथ प्रचार करेंगे। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि राहुल गांधी 10 अप्रैल के बाद तमिलनाडु आएंगे, जब असम, केरल और पुडुचेरी के पहले चरण के मतदान पूरे हो जाएंगे।
- लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे सीट बंटवारे पर चल रही बातचीत से जोड़ रहे हैं।
- पुडुचेरी में राहुल गांधी ने अपने भाषण में स्टालिन का नाम तक नहीं लिया
- जबकि स्टालिन ने भी राहुल का जिक्र नहीं किया। यह छोटी-सी बात गठबंधन की एकता पर सवाल उठा रही है।
मोदी की आक्रामक रणनीति बनाम राहुल की अनुपस्थिति
- दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में काफी सक्रिय हैं। पिछले दो महीनों में मोदी
- तीन बार तमिलनाडु का दौरा कर चुके हैं। 15 अप्रैल को नागरकोइल में वे NDA की बड़ी रैली
- को संबोधित करेंगे। मोदी दक्षिण के इस महत्वपूर्ण राज्य में BJP और
- उसके सहयोगियों को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि मोदी की हुंकार और राहुल गांधी की अनुपस्थिति के कारण INDIA ब्लॉक को नुकसान हो सकता है। DMK और कांग्रेस दोनों ही गठबंधन की मजबूती पर जोर दे रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव साफ दिख रहा है।
तमिलनाडु चुनाव में कांग्रेस सीट बंटवारे पर विवाद की अटकलें
कई सूत्रों का मानना है कि गठबंधन में दूरी का मुख्य कारण सीट बंटवारा और भविष्य की सत्ता साझेदारी है। कांग्रेस कुछ ज्यादा सीटें चाहती है, जबकि DMK अपनी मजबूत स्थिति को देखते हुए ज्यादा रियायत नहीं देना चाहता।
DMK के नेता बार-बार कह रहे हैं कि गठबंधन में कोई दरार नहीं है और स्टालिन राहुल गांधी को भाई मानते हैं। स्टालिन ने पहले भी कहा था कि “DMK-Congress गठबंधन में सामंजस्य है, जो लोग फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें निराशा होगी।”
- फिर भी, पुडुचेरी में अलग-अलग कार्यक्रम और नाम न लेने की घटना ने
- अटकलों को हवा दे दी है। कुछ कांग्रेस नेता भी दिल्ली
- और चेन्नई के बीच समन्वय पर असंतोष जता रहे हैं।
2021 vs 2026: प्रचार की रणनीति में अंतर
- 2021 के तमिलनाडु चुनाव में राहुल गांधी ने शुरुआती दौर में ही DMK के पक्ष में मोर्चा संभाला था।
- उस समय कांग्रेस-DMK गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया था। इस बार राहुल की देरी
- को कई लोग रणनीतिक मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे गठबंधन के अंदरूनी मुद्दों से जोड़ रहे हैं।
- DMK का कहना है कि राहुल गांधी जल्द तमिलनाडु आएंगे और पूरे जोर-शोर से प्रचार करेंगे।
- लेकिन फिलहाल मोदी की रैलियां ज्यादा सुर्खियां बटोर रही हैं।
क्या होगा आगे?
तमिलनाडु चुनाव में DMK-Congress गठबंधन की एकता बहुत महत्वपूर्ण है। अगर दोनों पार्टियां जल्दी से सीट बंटवारे और प्रचार रणनीति पर सहमति बना लेती हैं, तो NDA को चुनौती मिल सकती है। लेकिन अगर अटकलें सही साबित हुईं और दरार बढ़ी तो BJP फायदा उठा सकती है।
- कांग्रेस के सूत्र बता रहे हैं कि 10 अप्रैल के बाद राहुल गांधी का तमिलनाडु दौरा तय हो जाएगा।
- उस समय स्टालिन के साथ संयुक्त कार्यक्रम से गठबंधन की ताकत दिखाई जा सकती है।
तमिलनाडु चुनाव से पहले कांग्रेस-DMK गठबंधन में दरार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राहुल गांधी की अनुपस्थिति और मोदी की आक्रामक कैंपेनिंग ने सियासी गलियारों में बहस छेड़ दी है। दोनों पार्टियां हालांकि गठबंधन की मजबूती पर जोर दे रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही संकेत दे रही है।
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