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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज! राज्‍यसभा अध्यक्ष और लोकसभा स्पीकर ने ठुकराया, विपक्ष के 193 सांसदों का प्रस्ताव!

On: April 7, 2026 3:52 AM
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश : संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को राज्‍यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने खारिज कर दिया है। यह पहला मौका है जब किसी मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। प्रस्ताव 12 मार्च 2026 को पेश किया गया था और 6 अप्रैल 2026 को दोनों सदनों के अध्यक्षों ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

यह फैसला Judges (Inquiry) Act, 1968 की धारा 3 के तहत लिया गया। दोनों सदनों के सचिवालयों ने अलग-अलग नोटिस जारी कर बताया कि प्रस्ताव की विस्तृत समीक्षा के बाद इसे अस्वीकार कर दिया गया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश आधिकारिक प्रोफाइल और चुनाव आयोग
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश की भूमिका और चुनाव आयोग से जुड़ी जानकारी।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश महाभियोग प्रस्ताव में क्या था?

विपक्षी दलों (मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में) ने ज्ञानेश कुमार पर 7 गंभीर आरोप लगाए थे। इनमें शामिल थे:

  • एक विशेष राजनीतिक दल के प्रति पक्षपातपूर्ण व्यवहार
  • हाल के विधानसभा चुनावों में आचार संहिता उल्लंघन
  • Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया में भेदभाव
  • मतदाता अधिकारों से वंचित करने जैसे आरोप

प्रस्ताव पर कुल 193 सांसदों के हस्ताक्षर थे – 130 लोकसभा से और 63 राज्यसभा से। महाभियोग के लिए जरूरी संख्या (लोकसभा में 100 और राज्यसभा में 50) पूरी होने के बावजूद दोनों अध्यक्षों ने इसे खारिज कर दिया।

क्यों खारिज किया गया प्रस्ताव?

  • राज्‍यसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रस्ताव की “सावधानीपूर्वक और निष्पक्ष समीक्षा” के बाद
  • सभी पहलुओं को देखते हुए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
  • लोकसभा स्पीकर ने भी इसी आधार पर अलग नोटिस को ठुकरा दिया।

संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत होती है। लेकिन अध्यक्षों को यह अधिकार है कि वे प्रस्ताव की प्रारंभिक जांच के बाद उसे स्वीकार या अस्वीकार कर सकें। इस बार दोनों ने इसे अस्वीकार कर दिया, इसलिए आगे कोई जांच या वोटिंग नहीं होगी।

विपक्ष की प्रतिक्रिया!

विपक्ष ने इस फैसले को “संसद का मजाक उड़ाना” बताया है। कई विपक्षी सांसदों का कहना है कि बिना कोई ठोस कारण बताए प्रस्ताव खारिज करना लोकतंत्र के लिए खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन सरकार ने इसे दबा दिया।

सत्ता पक्ष का पक्ष

सत्ता पक्ष ने इस घटना पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन सूत्रों का कहना है कि महाभियोग प्रस्ताव बिना ठोस सबूत के लाया गया था, इसलिए इसे खारिज करना उचित था। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है और हाल के चुनावों में पारदर्शिता बरती गई।

ज्ञानेश कुमार कौन हैं?

ज्ञानेश कुमार 2024 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने थे। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी रहे हैं और चुनाव आयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उनके कार्यकाल में कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें विपक्ष ने आचार संहिता और मतदाता सूची संशोधन (SIR) को लेकर सवाल उठाए थे।

  • यह पहला मौका है जब किसी मौजूदा CEC के खिलाफ महाभियोग की कोशिश हुई।
  • इससे पहले चुनाव आयुक्तों के खिलाफ ऐसे प्रस्ताव बहुत कम आए हैं।

क्या कहता है कानून?

  • मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जजों जैसी है।
  • महाभियोग के लिए दोनों सदनों में बहुमत की जरूरत होती है, लेकिन शुरुआती स्टेज में सदन
  • के अध्यक्ष/स्पीकर प्रस्ताव को एडमिट करने या न करने का फैसला करते हैं।
  • इस मामले में दोनों ने इसे एडमिट नहीं किया।

इसका क्या मतलब है?

  • ज्ञानेश कुमार अपना कार्यकाल जारी रखेंगे।
  • विपक्ष को अब अदालत जाने या अन्य रास्ते अपनाने का विकल्प है।
  • यह घटना चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है।

राज्‍यसभा अध्यक्ष और लोकसभा स्पीकर द्वारा महाभियोग प्रस्ताव खारिज करने से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तत्काल कोई कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि विपक्ष ने इसे “एकतरफा फैसला” बताते हुए विरोध जताया है। यह घटना लोकतंत्र में संस्थाओं की स्वतंत्रता और संसदीय प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े करती है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बहस होने की संभावना है।

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