राघव चड्ढा : आम आदमी पार्टी (AAP) में एक समय अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद सहयोगी माने जाने वाले राघव चड्ढा अब पार्टी के निशाने पर हैं। 37 वर्षीय युवा राज्यसभा सांसद को हाल ही में AAP ने राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटा दिया है। साथ ही संसद में उनकी बोलने की शक्ति पर भी रोक लगा दी गई है। यह फैसला पार्टी के अंदरूनी कलह को खुलकर सामने लाया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या राघव चड्ढा अब भाजपा (BJP) में शामिल हो सकते हैं?
समोसा की कीमत जैसे मुद्दों पर उनकी टिप्पणियों को लेकर पार्टी नेताओं ने तीखा हमला बोला है, लेकिन विवाद सिर्फ ‘समोसा’ तक सीमित नहीं है। यह पुरानी नाराजगी, पावर शेयरिंग और रणनीतिक मतभेदों का नतीजा है। आइए जानते हैं इस पूरे मामले की इनसाइड स्टोरी।

राघव चड्ढा का AAP में सफर: चरम से अलगाव तक
#राघव चड्ढा AAP में युवा चेहरा के रूप में उभरे। 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी की बड़ी जीत के बाद उन्हें ‘सुपर मुख्यमंत्री’ कहा जाने लगा। यह उपमा पंजाब के स्थानीय नेताओं में असंतोष का कारण बनी। चड्ढा की बढ़ती लोकप्रियता और पंजाब पर उनका प्रभाव पार्टी के भीतर असंतुलन पैदा करने लगा।
2024 में जब अरविंद केजरीवाल आबकारी घोटाले में गिरफ्तार हुए, तब राघव चड्ढा अपनी आंखों के ऑपरेशन के लिए लंदन में थे। पार्टी नेताओं ने इस पर सवाल उठाए। दिल्ली की मंत्री आतिशी ने कहा था, “हम सड़कों पर लाठियां खा रहे थे और आप लंदन में छिपे हुए थे। क्या आप जेल जाने से डर रहे थे?” इस घटना ने चड्ढा और पार्टी लीडरशिप के बीच दरार को और चौड़ा कर दिया।
- 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP की हार के बाद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया
- ने पंजाब पर अपना नियंत्रण मजबूत किया। इससे राघव चड्ढा की भूमिका सीमित हो गई।
- मार्च 2026 में जब कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया को आबकारी मामले में बरी कर दिया
- तब भी चड्ढा की चुप्पी और जंतर-मंतर रैली से उनकी अनुपस्थिति ने पार्टी में नाराजगी बढ़ाई।
समोसा विवाद: ट्रिगर लेकिन असली वजह नहीं
हाल ही में राघव चड्ढा ने संसद या सार्वजनिक मंच पर हवाई अड्डों पर समोसे की कीमत और फलों के जूस जैसे मुद्दों को उठाया। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने इस पर तंज कसते हुए कहा, “देश बड़े मुद्दों से जूझ रहा है, लेकिन राघव चड्ढा हवाई अड्डों पर समोसे की कीमत और जूस के डिब्बे जैसे सतही मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं।” उन्होंने कहा कि पार्टी के पास संसद में सीमित समय होता है, ऐसे में ‘सॉफ्ट पीआर’ की बजाय केंद्र सरकार और पीएम मोदी के खिलाफ बड़े मुद्दे उठाने चाहिए।
- 3 अप्रैल 2026 को विपक्षी दलों (INDIA गठबंधन) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार
- के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया। आतिशी और अन्य नेताओं ने दावा किया
- कि पूरा विपक्ष लोकतंत्र बचाने के लिए एकजुट था, लेकिन राघव चड्ढा ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
- आतिशी ने वीडियो जारी कर पूछा, “आप भाजपा और पीएम मोदी से इतना क्यों डर रहे हैं
- जब एलपीजी गैस की किल्लत पर चर्चा हो रही थी, तब आप चुप क्यों थे?”
राघव चड्ढा ने इसके जवाब में वीडियो जारी कर कहा, “संसद में जनता के मुद्दे उठाना क्या अपराध है? मेरी चुप्पी को मेरी हार न समझें।” उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी उन्हें बोलने से रोक रही है।
AAP का फैसला और नेताओं के हमले!
AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता पद से हटाकर उनकी जगह पंजाब के उद्योगपति अशोक मित्तल को नियुक्त कर दिया। संसद में पार्टी कोटा से उनकी बोलने की अनुमति भी रोक दी गई। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चड्ढा को ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ बताया।
- आतिशी, सौरभ भारद्वाज, संजय सिंह और अनुराग ढंडा जैसे नेताओं ने खुद को
- अरविंद केजरीवाल के सिपाही” बताते हुए चड्ढा पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया
- कि चड्ढा केंद्र सरकार के खिलाफ बोलने से कतराते हैं और सतही मुद्दों पर फोकस करते हैं।
- दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि राघव चड्ढा को अपना भविष्य खुद तय करना है।
- उन्होंने केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि AAP केजरीवाल लोगो का इस्तेमाल करते हैं और फिर फेंक देते हैं।
BJP जॉइनिंग की अफवाहें: क्या है सच्चाई?
इस विवाद के बाद राजनीतिक हलकों में तेज चर्चा है कि क्या राघव चड्ढा भाजपा में शामिल हो सकते हैं। पंजाब में भाजपा अकाली दल से अलग होकर अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। चड्ढा की पंजाब से राज्यसभा सदस्यता और उनकी लोकप्रियता को देखते हुए ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अभी तक चड्ढा की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है और भाजपा ने भी स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा है।
- विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद AAP की आंतरिक पावर डायनामिक्स को दर्शाता है।
- दिल्ली चुनाव हार के बाद पार्टी में पद और प्रभाव के लिए संघर्ष बढ़ा है।
- राघव चड्ढा जैसे युवा और शिक्षित चेहरे का अलगाव पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
AAP के लिए चुनौती का वक्त!
राघव चड्ढा और AAP के बीच का यह झगड़ा सिर्फ व्यक्तिगत मतभेद नहीं बल्कि पार्टी की रणनीति, नेतृत्व और भविष्य को लेकर गहरे सवाल उठाता है। समोसा जैसी छोटी घटनाएं ट्रिगर बन सकती हैं, लेकिन असली समस्या पुरानी नाराजगी और पावर शेयरिंग में है।