इजराइल ईरान युद्ध 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी 2026 में इजराइल यात्रा को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई सवाल उठे थे। विपक्षी दलों ने दावा किया कि क्या पीएम मोदी को इजराइल दौरे के दौरान ईरान पर होने वाले हमले की पहले से जानकारी थी? अब भारत सरकार ने संसद में इस पर साफ-साफ जवाब दे दिया है।
सरकार ने राज्यसभा में कहा कि पीएम मोदी की 25-26 फरवरी 2026 की इजराइल यात्रा के दौरान ईरान पर हमले से संबंधित कोई चर्चा नहीं हुई थी। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि इस मामले पर दोनों देशों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई।

पीएम मोदी की इजराइल यात्रा: क्या हुआ था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के निमंत्रण पर 25 और 26 फरवरी 2026 को इजराइल की राजकीय यात्रा की। यह यात्रा जनवरी 2026 में ही तय हो चुकी थी।
- दोनों नेताओं ने भारत-इजराइल साझेदारी के सभी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की।
- क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए:
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
- साइबर सुरक्षा
- कृषि और मत्स्य पालन
- शिक्षा
- वित्तीय सेवाएं और डिजिटल भुगतान
- श्रमिकों की आवाजाही
ये समझौते दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने वाले माने जा रहे हैं। भारत और इजराइल के बीच रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से मजबूत सहयोग रहा है।
ईरान पर हमला: कब और क्या हुआ?
- पीएम मोदी के इजराइल से लौटने के ठीक एक दिन बाद, यानी 28 फरवरी 2026 को इजराइल
- और अमेरिका ने ईरान पर बड़ा सैन्य हमला कर दिया। इस हमले में ईरान के कई शीर्ष नेता प्रभावित हुए
- और पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई।
इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी स्पष्ट किया कि पीएम मोदी की यात्रा के दौरान हमलों की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि हमले का फैसला यात्रा के बाद, अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने के बाद लिया गया। सार ने रायसीना डायलॉग में कहा कि भारत के साथ संबंध मजबूत करने का एजेंडा तैयार किया गया है और मोदी को हमलों की जानकारी नहीं थी।
इजराइल ईरान युद्ध 2026 सरकार का स्पष्ट जवाब
- केरल से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) सांसद अब्दुल वहाब ने राज्यसभा में सवाल पूछा था
- कि क्या सरकार को ईरान पर हमले की पहले से जानकारी थी और यात्रा के दौरान क्या चर्चा हुई?
- विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने जवाब दिया: “इस मामले से संबंधित कोई चर्चा नहीं हुई।”
- सरकार ने यह भी साफ किया कि यात्रा पूर्व-निर्धारित थी और इसका ईरान हमले से कोई संबंध नहीं है।
- भारत ने हमेशा पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की वकालत की है।
विपक्ष का आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया!
विपक्षी दलों जैसे कांग्रेस, AIMIM और वामपंथी दलों ने पीएम मोदी की यात्रा को “गलत समय” बताया। कुछ नेताओं ने दावा किया कि यह यात्रा इजराइल को समर्थन देने जैसी लग रही है। असदुद्दीन ओवैसी और राहुल गांधी जैसे नेताओं ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
हालांकि, सरकार और इजराइल दोनों ने इन अटकलों को खारिज कर दिया। भारत की विदेश नीति हमेशा संतुलित रही है। भारत ईरान के साथ भी अच्छे संबंध रखता है और चाबहार बंदरगाह जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है।
भारत की विदेश नीति और पश्चिम एशिया!
- #भारत पश्चिम एशिया में सभी पक्षों के साथ संतुलित संबंध रखता है।
- इस संघर्ष के बाद भारत ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
- विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इजराइल और ईरान दोनों के साथ बातचीत की।
भारत के लिए इस क्षेत्र की स्थिरता बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- तेल आयात मुख्य रूप से खाड़ी देशों से होता है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला तेल भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है।
- लाखों भारतीय नागरिक वहां काम करते हैं।
सरकार के स्पष्ट जवाब से साफ हो गया है कि पीएम मोदी की इजराइल यात्रा पूरी तरह द्विपक्षीय सहयोग पर केंद्रित थी और ईरान हमले से इसका कोई संबंध नहीं था। भारत की विदेश नीति राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देती है और क्षेत्रीय शांति के लिए प्रयासरत है।
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