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पीएम मोदी इजराइल यात्रा के दौरान ईरान पर हमले की पहले से जानकारी थी भारत सरकार का साफ स्पष्टीकरण कोई चर्चा नहीं हुई!

On: April 3, 2026 3:31 AM
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पीएम मोदी इजराइल यात्रा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी 2026 में इजराइल यात्रा को लेकर विपक्ष और कुछ मीडिया में सवाल उठाए जा रहे थे कि क्या भारत को ईरान पर होने वाले अमेरिका-इजराइल हमले की पहले से जानकारी थी। राज्यसभा में पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में विदेश राज्य मंत्री किर्ति वर्धन सिंह ने सरकार की ओर से साफ कर दिया कि पीएम मोदी की यात्रा के दौरान ईरान पर किसी भी सैन्य कार्रवाई की कोई चर्चा नहीं हुई और भारत को पहले से कोई जानकारी नहीं थी।

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया है और वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा हुआ है। भारत सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि पीएम मोदी और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई व्यापक चर्चाओं में द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर बात हुई, लेकिन ईरान पर हमले का जिक्र तक नहीं किया गया।

पीएम मोदी इजराइल यात्रा और द्विपक्षीय संबंध
पीएम मोदी इजराइल यात्रा से मजबूत हुए भारत-इजराइल संबंध

पीएम मोदी की इजराइल यात्रा: कब और क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी 2025 के अंत (25-26 फरवरी) में इजराइल की यात्रा पर गए थे। यह यात्रा इजराइल के साथ भारत के मजबूत रणनीतिक संबंधों को और गहरा बनाने के उद्देश्य से की गई थी। दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

  • यात्रा के ठीक दो दिन बाद इजराइल और अमेरिका की ओर से ईरान पर सैन्य हमलों की खबरें आने लगीं।
  • इससे कई सवाल उठे कि क्या पीएम मोदी को यात्रा के दौरान इसकी जानकारी दी गई थी
  • या भारत ने किसी तरह की पूर्व सूचना रखी थी।

राज्यसभा में इस मुद्दे पर सवाल उठने के बाद विदेश मंत्रालय ने साफ किया:

  • “इस मामले से संबंधित कोई चर्चा नहीं हुई।”
  • पीएम मोदी को ईरान पर किसी भी योजनाबद्ध सैन्य हमले की पहले से कोई जानकारी नहीं थी।
  • इजराइल की ओर से भी बाद में स्पष्ट किया गया कि हमले
  • का अंतिम फैसला मोदी की यात्रा के बाद ही लिया गया।

भारत की विदेश नीति: संतुलित और राष्ट्रीय हित पर आधारित

भारत लंबे समय से मध्य पूर्व में संतुलित विदेश नीति अपनाए हुए है। इजराइल के साथ भारत के मजबूत रक्षा और सुरक्षा संबंध हैं, वहीं ईरान के साथ भी ऊर्जा आयात, चाबहार बंदरगाह और सांस्कृतिक संबंध महत्वपूर्ण हैं।

  • सरकार का यह स्पष्टीकरण भारत की बहुपक्षीय कूटनीति को दर्शाता है।
  • भारत न तो किसी एक पक्ष को पूरी तरह समर्थन देता है और न ही किसी के खिलाफ खड़ा होता है।
  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पीएम मोदी बार-बार कह चुके हैं कि भारत का स्टैंड राष्ट्रीय हित और शांति पर आधारित है।
  • ईरान पर हमले के बाद भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है
  • और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया है। भारत के लाखों नागरिक मध्य पूर्व में काम कर रहे हैं
  • और तेल आयात के लिए यह क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए भारत किसी भी बड़े संघर्ष से दूर रहते हुए
  • सभी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है।

विपक्ष के सवाल और सरकार का जवाब

  • कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि पीएम मोदी की इजराइल यात्रा का समय संदिग्ध है
  • और शायद भारत को पहले से हमले की जानकारी थी। सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

विदेश राज्य मंत्री किर्ति वर्धन सिंह ने लिखित जवाब में कहा:

“प्रधानमंत्री की इजराइल यात्रा के दौरान ईरान संबंधी कोई चर्चा नहीं हुई। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक बातचीत हुई, लेकिन सैन्य कार्रवाई का कोई जिक्र नहीं था।”

यह जवाब भारत की पारदर्शिता और कूटनीतिक परिपक्वता को दिखाता है।

भारत-इजराइल संबंधों की मजबूती

पीएम मोदी की इजराइल यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौतों पर चर्चा की। इजराइल भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार है। दोनों देश आई2यू2 (India-Israel-UAE-USA) जैसे गठबंधनों में भी साथ काम कर रहे हैं।

  • यात्रा के बावजूद भारत ने ईरान के साथ अपने संबंधों को बनाए रखा है।
  • चाबहार बंदरगाह परियोजना भारत की इंस्टेसी (INSTC) रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है
  • जो मध्य एशिया तक पहुंच बनाती है।
  • भारत सरकार ने राज्यसभा में स्पष्ट रूप से बता दिया कि पीएम मोदी की इजराइल यात्रा
  • के दौरान ईरान पर हमले की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी और इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई।
  • यह स्पष्टीकरण उन अफवाहों और सवालों को खत्म करता है जो यात्रा के समय को लेकर उठाए जा रहे थे।

भारत की विदेश नीति हमेशा से संतुलित, स्वतंत्र और राष्ट्रीय हित पर आधारित रही है। ईरान-इजराइल तनाव के बीच भी भारत शांति की अपील कर रहा है और सभी देशों के साथ अपने आर्थिक व रणनीतिक संबंधों को मजबूत बनाए रखना चाहता है।

आत्मनिर्भर भारत और मजबूत कूटनीति के साथ देश आगे बढ़ रहा है। मध्य पूर्व में स्थिरता भारत के हित में है और सरकार इसी दिशा में प्रयास कर रही है।

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