अकोला पुलिस स्टेशन : अकोला ASI यौन शोषण मामला ने महाराष्ट्र पुलिस की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अकोला के सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में तैनात असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) राजेश जाधव (54 वर्ष) पर महिला हिरासत में रखी महिला से उसकी बेटी को यौन favors के बदले 10,000 रुपये देने का प्रस्ताव रखने का गंभीर आरोप लगा है। महिला ने तुरंत शिकायत की, जिसके बाद पुलिस ने ASI को तत्काल सस्पेंड कर दिया। आरोपी फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। यह घटना 1 अप्रैल 2026 को हुई।
पूरा मामला क्या था?
महिला को 80 लाख रुपये के वित्तीय फ्रॉड मामले में गिरफ्तार किया गया था और उसे सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन की लॉकअप में रखा गया था। मंगलवार को ड्यूटी पर तैनात ASI राजेश जाधव ने महिला से कथित तौर पर कहा:

“तुम बहुत खूबसूरत हो, तुम्हारी बेटी भी जरूर खूबसूरत होगी। उसे मेरे पास भेज दो, मैं तुम्हें इसके बदले 10,000 रुपये दूंगा।”
यह बातचीत लॉकअप में हुई, जहां ASI ने अपनी पदवी और वर्दी का दुरुपयोग करते हुए महिला को लालच दिया। महिला ने इस घटना की तुरंत उच्च अधिकारियों को शिकायत कर दी।
पुलिस विभाग की कार्रवाई
- अकोला के जिला पुलिस अधीक्षक अर्चित चंदक ने महिला की शिकायत पर तुरंत संज्ञान लिया
- और ASI राजेश जाधव को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। आरोपी
- पर महिला की गरिमा भंग करने (outraging the modesty of a woman)
- और अन्य संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है।
- पुलिस इंस्पेक्टर अनिल जुमले ने पुष्टि की कि आरोपी अपनी पदवी का दुरुपयोग कर महिला
- को पैसे का लालच दे रहा था। आरोपी के फरार होने के
- बाद पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए छानबीन तेज कर दी है।
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) का स्वतः संज्ञान
- इस घटना पर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने स्वतः संज्ञान लिया। NCW चेयरपर्सन
- विजया राहटकर ने महाराष्ट्र के डीजीपी को पत्र लिखकर तत्काल FIR दर्ज करने
- सख्त विभागीय कार्रवाई करने और निष्पक्ष जांच पूरी कर 7 दिनों में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
- NCW ने इसे “सत्ता का घोर दुरुपयोग और मानवीय गरिमा का उल्लंघन” बताया।
- आयोग ने X पर पोस्ट कर कहा कि पुलिस अधिकारी द्वारा हिरासत में रखी
महिला की बेटी से यौन संबंध की मांग अत्यंत चिंताजनक है।
महिला आयोग की पूर्व सदस्य की प्रतिक्रिया!
महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य डॉ. आशा मिरगे ने कहा:
“यह बेहद चिंताजनक है कि जिन पर हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वही शिकारी बन जाएं। ऐसे लोगों को रोकने के लिए समय पर और सख्त कार्रवाई होना बहुत जरूरी है।”
डॉ. मिरगे ने बताया कि आरोपी ASI राजेश जाधव के खिलाफ करीब 10 साल पहले भी परिवारिक विवाद और महिलाओं के प्रति अनुचित व्यवहार की शिकायतें दर्ज थीं। उन्होंने अकोला पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना भी की।
अकोला पुलिस स्टेशन पुलिस में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
यह घटना पुलिस हिरासत में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल उठाती है। हिरासत में रखी महिला, जो खुद कानूनी मामले में फंसी हुई है, को ऐसे प्रस्ताव से गुजरना पड़ा – यह पुलिस व्यवस्था में सुधार की मांग करता है।
- महाराष्ट्र पुलिस को अब न सिर्फ आरोपी को गिरफ्तार करना है बल्कि लॉकअप और हिरासत
- केंद्रों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू करने होंगे।
- सीसीटीवी कैमरे, महिला स्टाफ की तैनाती और नियमित मॉनिटरिंग जैसे कदम जरूरी हैं।
अंधेरा फैलाने वाला कांड
- ASI राजेश जाधव ने न सिर्फ महिला की गरिमा का अपमान किया, बल्कि पूरे पुलिस विभाग
- की विश्वसनीयता पर भी आंच आई है। महिला ने साहस दिखाकर शिकायत की
- जिससे आरोपी पर कार्रवाई हो सकी। अगर महिला चुप रहती तो यह मामला दब सकता था।
- यह घटना उन कई मामलों की याद दिलाती है जहां कानून की रक्षा करने वाले ही कानून तोड़ते पाए जाते हैं।
- समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस सुधार और जागरूकता दोनों जरूरी हैं।
अकोला का यह मामला पुलिस में सत्ता के दुरुपयोग की एक और मिसाल है। ASI राजेश जाधव की सस्पेंशन और FIR सही दिशा में कदम है, लेकिन आरोपी के फरार होने से जांच को गति देने की जरूरत है। राष्ट्रीय महिला आयोग की निगरानी में निष्पक्ष और तेज जांच होनी चाहिए ताकि दोषी को सख्त सजा मिले।
महिलाओं की सुरक्षा हर संस्थान की जिम्मेदारी है। पुलिस विभाग को ऐसे तत्वों को सख्ती से बाहर निकालना चाहिए। आमजन को भी साहस दिखाकर ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करनी चाहिए।
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