ईरान युद्ध : ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव और तेल आपूर्ति बाधित होने से LPG (एलपीजी) की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। ऐसे में केंद्र सरकार ने तुरंत कदम उठाते हुए केरोसिन (मिट्टी का तेल) के नियमों में अस्थायी ढील दे दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 29 मार्च 2026 को जारी गजट नोटिफिकेशन में पेट्रोलियम सुरक्षा और लाइसेंसिंग नियमों में छूट दी, ताकि घरेलू उपयोग के लिए केरोसिन की आपूर्ति तेज हो सके।
यह फैसला मुख्य रूप से LPG संकट को देखते हुए लिया गया है, जहां कई परिवारों को खाना पकाने और रोशनी के लिए वैकल्पिक ईंधन की जरूरत पड़ रही है।
सरकार ने केरोसिन नियमों में क्या बदलाव किए?
सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को चुने हुए पेट्रोल पंपों पर केरोसिन स्टोर और वितरित करने की अनुमति दे दी है। प्रत्येक नामित पेट्रोल पंप पर अधिकतम 5000 लीटर केरोसिन स्टोर किया जा सकेगा। एक जिले में अधिकतम दो पेट्रोल पंप इस योजना में शामिल किए जाएंगे।

मुख्य प्रावधान:
- पेट्रोलियम नियम 2002 के तहत केरोसिन के भंडारण, परिवहन और वितरण में लगे डीलरों तथा वाहनों को लाइसेंसिंग प्रावधानों से छूट।
- केवल घरेलू उपयोग (खाना पकाने और रोशनी) के लिए केरोसिन दिया जाएगा। दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई।
- 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में PDS (पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम) के जरिए अस्थायी रूप से सुपीरियर केरोसिन ऑयल (SKO) की एड-हॉक आपूर्ति। इनमें दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात आदि शामिल हैं, जहां पहले केरोसिन की आपूर्ति धीरे-धीरे बंद की जा रही थी।
- यह छूट 60 दिनों के लिए है, जिससे सप्लाई चेन तेज हो सकेगी।
इससे पहले जिन राज्यों में PDS के माध्यम से केरोसिन नहीं मिलता था, वहां अब जरूरत के अनुसार आपूर्ति शुरू हो सकेगी।
ईरान युद्ध का भारत पर क्या असर?
- ईरान युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20% तेल परिवहन का रास्ता है।
- अगर यह रूट प्रभावित हुआ तो तेल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और खाड़ी क्षेत्र से बड़ा हिस्सा आयात इसी रास्ते से होता है।
LPG संकट के कारण कई इलाकों में अफवाहें फैलीं, जिससे कुछ जगहों पर पैनिक बाइंग भी देखी गई। हालांकि सरकार ने साफ किया कि पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर्याप्त है। रिफाइनरियां पूर्ण क्षमता पर चल रही हैं और कच्चे तेल के पर्याप्त स्टॉक मौजूद हैं।
सरकार ने जनता से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और सामान्य रूप से ईंधन खरीदारी करें।
यह फैसला क्यों जरूरी है?
- भारत में केरोसिन मुख्य रूप से गरीब और ग्रामीण परिवारों द्वारा खाना पकाने और लालटेन
- में इस्तेमाल होता था। Ujjwala योजना के बाद LPG कनेक्शन बढ़ने से केरोसिन की मांग कम हुई
- और कई जगहों पर PDS SKO को चरणबद्ध तरीके से बंद किया गया।
- लेकिन ईरान युद्ध के कारण LPG सप्लाई प्रभावित होने से सरकार को पुराने विकल्प को फिर सक्रिय करना पड़ा।
यह कदम ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में है। तेज वितरण से ग्रामीण क्षेत्रों और कम आय वाले परिवारों को राहत मिलेगी। पेट्रोल पंपों पर उपलब्धता बढ़ने से राशन दुकानों पर भीड़ भी कम हो सकती है।
अन्य उपाय क्या कर रही है सरकार?
- रिफाइनरियों को फुल क्षमता पर चलाने के निर्देश।
- वैकल्पिक आयात स्रोतों की खोज (रूस आदि से)।
- LPG आयात बढ़ाने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा।
- पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहा है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं
- जिससे मुद्रास्फीति पर असर पड़ सकता है। लेकिन फिलहाल सरकार ने स्थिति
- को नियंत्रण में रखने के लिए proactive कदम उठाए हैं।
आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- जिन 21 राज्यों/UTs में केरोसिन नहीं मिलता था, वहां अब आसानी से उपलब्ध होगा।
- पेट्रोल पंपों पर सीमित मात्रा में स्टोरेज से स्थानीय स्तर पर सप्लाई सुधरेगी।
- केवल घरेलू उपयोग के लिए होने से ब्लैक मार्केटिंग और औद्योगिक दुरुपयोग रोका जा सकेगा।
- LPG की कमी वाले परिवारों को वैकल्पिक ईंधन मिलने से राहत।
- हालांकि, यह अस्थायी व्यवस्था है। लंबे समय में सरकार को ऊर्जा आयात पर
- निर्भरता कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की जरूरत है।
ईरान युद्ध के बीच भारत सरकार का केरोसिन नियमों में ढील देना एक समयोचित और व्यावहारिक कदम है। इससे LPG संकट से जूझ रहे परिवारों को तुरंत राहत मिलेगी और ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी। पेट्रोल पंपों पर केरोसिन उपलब्ध होने से वितरण आसान और तेज होगा।
सरकार की यह पहल दर्शाती है कि वैश्विक संकट के समय भी आम नागरिकों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है। अब देखना होगा कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति कैसे बदलती है और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाता है।
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