निशिकांत दुबे : देश की राजनीति में एक नया विवाद छिड़ गया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया है कि ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी बीजू पटनायक 1960 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के बीच कड़ी का काम करते थे। इस बयान से बीजू जनता दल (BJD) में भारी आक्रोश फैल गया और पार्टी के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति से इस्तीफा दे दिया।
यह विवाद 27 मार्च 2026 को शुरू हुआ जब निशिकांत दुबे ने मीडिया से बातचीत में 1962 के भारत-चीन युद्ध का जिक्र करते हुए ये आरोप लगाए।
निशिकांत दुबे ने क्या कहा?
#निशिकांत दुबे ने दावा किया कि 1962 का युद्ध नेहरू ने पूरी तरह अमेरिकी धन और CIA एजेंटों के सहयोग से लड़ा। उन्होंने कहा, “अमेरिका ने तिब्बत पर चीन के कब्जे के डर से वहां अपनी सेना और CIA एजेंट भेजे थे। दलाई लामा और उनके भाई अमेरिकी सरकार के लगातार संपर्क में थे।”

दुबे के अनुसार, उस समय ओडिशा के मुख्यमंत्री बीजू पटनायक अमेरिकी सरकार, CIA और नेहरू के बीच मुख्य लिंक थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ओडिशा का चारबतिया हवाई अड्डा (Charbatia Air Base) यू-2 विमानों का अड्डा था और 1963 से 1979 तक यहां अमेरिकी सेना तैनात रही। दुबे ने नेहरू के दो पत्र भी जारी किए, जिनमें उन्होंने अधिकारियों को अमेरिकी राजदूत से संपर्क करने और बीजू पटनायक को महत्वपूर्ण काम सौंपने की बात कही थी।
दुबे ने कहा, “बीजू पटनायक जी नेहरू जी और अमेरिका/CIA के बीच महत्वपूर्ण कड़ी थे।”
BJD का तीखा विरोध और इस्तीफा
इस बयान से BJD में गुस्सा फूट पड़ा। बीजद के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने 28 मार्च को राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया।
- पात्रा ने कहा, “मैं ऐसे व्यक्ति के अधीन काम नहीं कर सकता जो दिवंगत श्री बीजू पटनायक
- जी के बारे में इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी सार्वजनिक रूप से करें।
- उन्होंने इस्तीफा को “विरोध और सैद्धांतिक” आधार पर दिया।
- BJD के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देबी प्रसाद मिश्रा ने बयान को “अशोभनीय, शरारतपूर्ण और
- एक देशभक्त का अपमान” बताया। उन्होंने निशिकांत दुबे से माफी मांगने की मांग
- की और कहा कि पार्टी इस बयान की कड़ी निंदा करती है।
- BJD के अन्य सांसदों मानस मंगराज, सुभाशीष खुंटिया और मुजीबुल्ला खान
- (मुन्ना खान) ने भी दुबे पर ओडिशा के गौरव का अपमान करने का आरोप लगाया।
बीजू पटनायक कौन थे?
- #बीजू पटनायक (1916-1997) ओडिशा के लोकप्रिय नेता, स्वतंत्रता सेनानी
- और दो बार मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने 1961-63 और 1990-95 तक ओडिशा की कमान संभाली।
- उनके बेटे नवीन पटनायक ने 1997 में उनके नाम पर बीजू जनता दल (BJD)
- की स्थापना की, जो लंबे समय तक ओडिशा में सत्ता में रही।
बीजू पटनायक को विमानन, औद्योगिक विकास और ओडिशा की प्रगति का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने चारबतिया एयर बेस को विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। BJD उन्हें “देशभक्त” और “विजनरी लीडर” बताती है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और प्रभाव
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब भाजपा और BJD के बीच ओडिशा में राजनीतिक समीकरण पहले से ही संवेदनशील हैं। BJD ने इसे ओडिशा की भावनाओं का अपमान बताया है।
- सस्मित पात्रा ने कहा कि बीजू पटनायक जैसे महान नेता पर ऐसे “झूठे और जिम्मेदारिहीन
- आरोप लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है। BJD का तर्क है कि ये दावे बिना ठोस सबूत के हैं
- और नेहरू-विरोधी राजनीति का हिस्सा हैं।
- दूसरी ओर, निशिकांत दुबे ने ऐतिहासिक दस्तावेजों (नेहरू के पत्र) का हवाला देकर अपने
- दावे को मजबूत बताया। उन्होंने 1962 युद्ध को अमेरिकी हस्तक्षेप से जोड़ा।
ऐतिहासिक संदर्भ
- 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों पर कई चर्चाएं होती रही हैं।
- कुछ इतिहासकारों का मानना है कि युद्ध के बाद अमेरिका ने भारत को सैन्य सहायता दी थी
- लेकिन CIA और किसी भारतीय नेता के बीच “लिंक” का आरोप नया और विवादास्पद है।
- चारबतिया एयर बेस का इस्तेमाल अमेरिकी गतिविधियों के लिए हुआ या नहीं, यह अभी भी बहस का विषय है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
ऐसे आरोप अक्सर राजनीतिक बहस को गर्माते हैं। कुछ विश्लेषक इसे नेहरू परिवार और कांग्रेस पर हमले का हिस्सा मानते हैं, जबकि अन्य इसे ऐतिहासिक तथ्यों की नई व्याख्या बताते हैं। BJD का इस्तीफा दिखाता है कि क्षेत्रीय दलों के लिए अपने संस्थापक के सम्मान की रक्षा कितनी महत्वपूर्ण है।
- यह घटना संसदीय समितियों में भी तनाव बढ़ा सकती है
- क्योंकि इस्तीफा लोकसभा अध्यक्ष के पास भेजा गया है।
- निशिकांत दुबे का बीजू पटनायक-CIA-नेहरू लिंक वाला दावा राष्ट्रीय स्तर पर
- चर्चा का विषय बन गया है। BJD ने इसे सिरे से खारिज कर माफी की मांग की है
- और सस्मित पात्रा का इस्तीफा इस आक्रोश का प्रतीक है।
यह विवाद दर्शाता है कि भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक घटनाओं की व्याख्या अभी भी संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। अब देखना होगा कि भाजपा इस पर क्या रुख अपनाती है और BJD अपना विरोध कितना आगे बढ़ाती है।
ओडिशा की जनता और राजनीतिक दल बीजू पटनायक की विरासत को लेकर काफी संवेदनशील हैं। क्या यह विवाद बड़े राजनीतिक गठबंधनों को प्रभावित करेगा? समय ही बताएगा।
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