पाकिस्तान वार्ता : दुनिया इन दिनों ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण गंभीर तेल संकट से जूझ रही है। ऐसे में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए एक बड़ी कूटनीतिक पहल की है। रविवार को इस्लामाबाद में तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से जहाजों के लिए खोलने और युद्ध रोकने के तरीकों पर चर्चा की गई। यह बैठक वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल और LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) का परिवहन इसी रास्ते से होता है। ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के चलते ईरान ने इस जलमार्ग पर सख्ती बढ़ा दी थी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो गई।

इस संकट से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। कई देशों में पेट्रोल-डीजल और LPG के दाम बढ़ गए हैं। पाकिस्तान, भारत, चीन और श्रीलंका जैसे देश इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के प्रमुख फतिह बिरोल ने इसे इतिहास की सबसे बड़ी ऊर्जा संकट बताया है, जो 1973 और 1979 के तेल शॉक से भी बड़ा है।
पाकिस्तान में हुई बैठक के मुख्य बिंदु
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने इस बैठक की मेजबानी की। बैठक में ईरान, अमेरिका या इजरायल के कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं थे, लेकिन इसका मुख्य फोकस अमेरिका-ईरान के बीच सीधी बातचीत शुरू करवाना और युद्ध को जल्द समाप्त करना था।
तुर्किये के एक राजनयिक सूत्र ने कहा, “अंकारा की प्राथमिकता युद्धविराम हासिल करना है। जहाजों का सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना विश्वास बहाली का महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।”
- बैठक में होर्मुज से तेल प्रवाह प्रबंधित करने के लिए एक कंसोर्टियम या संघ बनाने का प्रस्ताव रखा गया।
- तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब ने पाकिस्तान को इसमें शामिल होने का अनुरोध किया
- लेकिन पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके अलावा
- खाड़ी में समुद्री यातायात से जुड़े प्रस्ताव अमेरिका को भेजे गए हैं, जिनमें स्वेज नहर जैसी शुल्क संरचना शामिल है।
चीन ने इस पहल का पूरा समर्थन किया है और सभी पक्षों ने पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर भरोसा जताया है। इशाक डार ने कहा कि क्षेत्रीय शक्तियों के विदेश मंत्रियों ने युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के तरीकों पर चर्चा की और उन्हें इस्लामाबाद में संभावित अमेरिका-ईरान वार्ता की जानकारी भी दी गई।
पाकिस्तान वार्ता ईरान से पाकिस्तान को मिली बड़ी राहत
- बैठक से पहले इशाक डार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर बड़ी खबर दी।
- ईरान ने पाकिस्तानी ध्वज वाले 20 जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी है।
- यह फैसला पाकिस्तान के लिए तेल-गैस संकट में बड़ी राहत है।
- ईरान ने वाणिज्यिक पोतों पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में भी ढील दी है।
- पाकिस्तानी सूत्रों के अनुसार, यह कदम शांति की दिशा में सकारात्मक संकेत है, हालांकि अमेरिका
- और ईरान के बीच दूरी अभी भी बनी हुई है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है
- कि युद्ध निर्णायक मोड़ पर पहुंच रहा है, जबकि ईरानी नेता बातचीत से इनकार करते रहे हैं।
तेल संकट का वैश्विक प्रभाव और भारत पर असर
इस संकट से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ रहा है। तेल की कीमतें बढ़ने से मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और कई विकासशील देशों की मुद्रा कमजोर हो रही है। पाकिस्तान में तो पेट्रोल की कीमतों में भारी उछाल आया है और सरकार ने ऊर्जा समिति गठित कर रोजाना समीक्षा शुरू कर दी है।
- भारत के लिए होर्मुज अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारा बड़ा हिस्सा तेल आयात खाड़ी देशों
- से इसी रास्ते से होता है। हालांकि भारत का सीधा उल्लेख बैठक में नहीं हुआ
- लेकिन वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने से भारतीय बाजार पर भी असर पड़ सकता है।
- भारत को वैकल्पिक मार्गों और रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व का सहारा लेना पड़ सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
- विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज पूरी तरह खुल जाता है और सुरक्षित जहाज यातायात बहाल होता है
- तो तेल संकट कुछ हद तक कम हो सकता है। पाकिस्तान की मध्यस्थता अगर सफल रही
- तो अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत शुरू हो सकती है।
- हालांकि, फिलहाल स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। मुस्लिम देशों का यह प्लान तेल प्रबंधन
- और शांति बहाली दोनों पर फोकस कर रहा है, लेकिन युद्धविराम के बिना स्थायी समाधान मुश्किल दिख रहा है।
निष्कर्ष: पाकिस्तान में हुई यह वार्ता कूटनीति का एक अच्छा उदाहरण है, जिसमें क्षेत्रीय देशों ने मिलकर वैश्विक संकट का समाधान ढूंढने की कोशिश की। ईरान द्वारा 20 पाकिस्तानी जहाजों को अनुमति देना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन पूरा समाधान अभी दूर है। दुनिया अब इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या ये प्रयास युद्ध रोकने और तेल आपूर्ति बहाल करने में सफल होंगे।